होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / मोदी सरकार को आखिर क्यों नजर नहीं आ रहा कोरोना का बढ़ता खौफ?

मोदी सरकार को आखिर क्यों नजर नहीं आ रहा कोरोना का बढ़ता खौफ?

चीन में कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खतरा केवल चीन तक सीमित नहीं रहेगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

क्या कोरोना वायरस की विदाई हो गई है? इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं है. भारत सहित कई देशों में जहां इसका प्रभाव काफी कम हो गया है. वहीं, चीन में लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं. पिछले कुछ समय से चीन में स्थिति खराब बनी हुई है और वहां हालात अब तेजी से बिगड़ रहे हैं. 2019 में चीन के वुहान में ही सबसे पहले कोरोना का पता चला था और फिर यह रॉकेट की स्पीड से पूरी दुनिया में फैल गया था. ऐसे में चीन के बिगड़ते हालात केवल उसके लिए ही चिंता का विषय नहीं हैं. यह पूरी दुनिया, खासकर भारत के लिए खतरे की घंटी की हैं.

देर से जागने के लगे थे आरोप
चीन, भारत का पड़ोसी है और दोनों देश लंबी सीमा साझा करते हैं. लिहाजा, अगर कोरोना महामारी वहां पहले जैसी स्थिति में लौट रही है, तो यहां भी उसका असर देखने को मिल सकता है. लेकिन ताज्जुब की बात है कि सरकार स्थिति की गंभीरता को नहीं समझ रही. कोरोना की शुरुआत के समय भी मोदी सरकार पर देरी से जागने के आरोप लगे थे. यह भी कहा गया था कि अगर सरकार समय रहते जरूरी कदम उठाती, तो मौत के आंकड़े को कम किया जा सकता था. हालांकि, न सरकार ने उस समय अपनी गलती मानी और न इस बार वह पहले से ही एहतियातन कोई कदम उठाने को तैयार नजर आती है.

पूरी दुनिया को किया अलर्ट
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले 90 दिनों में चीन की करीब 60 फीसदी आबादी कोरोना संक्रमित हो सकती है. उनका यह भी कहना है कि खतरा केवल चीन तक सीमित नहीं रहेगा. अमेरिका के महामारी विशेषज्ञ डॉ एरिक डिंग ने इस खतरे की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि चीन में जो होता है वह सिर्फ चीन में नहीं रहता, तीन साल पहले यह हमने वुहान से सीखा था. 2022-23 की इस लहर के वैश्विक परिणाम छोटे नहीं होंगे. एरिक यह साफ कहना चाह रहे हैं कि चीन में बिगड़ते हालत पूरी दुनिया को पहले वाली स्थिति में ले जा सकते हैं. गौर करने वाली बात ये है कि 2019 में वुहान में कोरोना का पहला मामला सामने आने के कुछ ही महीने बाद भारत में भी संक्रमण का पहला केस दर्ज किया गया था. इस हिसाब से चीन बढ़ते संक्रमण को भारत सरकार को गंभीरता से लेना ही होगा.

...तो होगा कोरोना विस्फोट
देश में कोरोना प्रोटोकॉल लगभग समाप्त हो गया है. मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग को लोग भूलते जा रहे हैं. ऐसे में चीन से आया एक संक्रमित व्यक्ति कोरोना विस्फोट का कारण बन सकता है. क्रिसमस और फिर नए साल पर होने वाली पार्टियों के लिए बड़े पैमाने पर भीड़ जुटेगी. नए साल पर मंदिरों में भी भक्तों का जनसैलाब उमड़ेगा. यानी कोरोना के पैर पसारने के लिए अनुकूल माहौल होगा. क्या सरकार और उसके स्वास्थ्य विभाग को यह समझ में नहीं आ रहा? सरकार तो दूरदृष्टि रखती है, उसे भविष्य में आने वाले खतरों का आभास पहले से ही हो जाता है, क्योंकि उसके पास परिस्थिति का आकलन और विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों की टीम होती है. तो फिर चीन में बढ़ता कोरोना का कहर उसे क्यों नजर नहीं आ रहा? या फिर वो मान बैठी है कि कोरोना वायरस इस बार चीन की दहलीज पार नहीं करेगा.

कांग्रेसी नहीं अमेरिकी चेतावनी
कांग्रेस लीडर राहुल गांधी ने कोरोना महामारी की शुरुआत में सरकार को चेताया था, लेकिन उनकी चेतावनी को नजरंदाज कर दिया गया. अब चेतावनी देने वाला कोई कांग्रेसी नहीं बल्कि अमेरिकी डॉक्टर है. कम से कम अब तो मोदी सरकार को चेतना चाहिए और कोरोना पाबंदियों-सख्तियों को चीन में हालात सामान्य होने तक अमल में लाना चाहिए. सरकार कह सकती है कि उसने जनता को अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त जागरूक कर दिया है. उन्हें बता दिया है कि मास्क कितना जरूरी है. यह बात सही भी है, लेकिन सरकार को भी यह समझना चाहिए कि भारत में केवल जागरुकता से कुछ नहीं होता. यदि होता तो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामले निम्न स्तर पर पहुंच चुके होते. जागरुकता में जब तक सख्ती नहीं मिलाई जाती, लोगों को कुछ समझ नहीं आता. लिहाजा, बेहतर होगा सरकार पिछली गलती न दोहराए. 
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

बुढ़ापे की रफ्तार धीमी करने का विज्ञान

बेहतर नींद और पर्याप्त पानी से लेकर संतुलित आहार और नियमित व्यायाम तक, जीवनशैली की नौ आदतें सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम कर सकती हैं, बुढ़ापे की रफ्तार धीमी कर सकती हैं और बीमारियों के खतरे को घटा सकती हैं.

1 week ago

अगला केरल मॉडल: गरिमा के साथ बढ़ती उम्र

डॉ. प्रो. सुधा चंद्रशेखर के अनुसार, जैसे-जैसे केरल भारत के सबसे अधिक दीर्घायु समाजों में से एक बनता गया, वैसे-वैसे यह उन शुरुआती राज्यों में भी शामिल हो गया, जिन्हें उस सवाल का सामना करना पड़ा जिसका सामना आने वाले वर्षों में कई अन्य राज्यों को भी करना होगा: जब हर 5 में से 1 व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो, तो ऐसा समाज कैसा होना चाहिए?

1 week ago

एक सरल जीवन की गरिमा

लेखक बृज बख्शी के अनुसार, इतिहास और हमारे आसपास की दुनिया हमें बताती है कि समाज कुछ चुनिंदा प्रसिद्ध लोगों के सहारे नहीं, बल्कि उन लाखों साधारण लोगों के कारण टिके रहते हैं, जो अपने दायित्वों को निरंतरता और समर्पण के साथ निभाते हैं.

1 week ago

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’: क्यों हीरो की यात्रा आज भी बेहतरीन नेतृत्व को परिभाषित करती है

क्रिस्टोफर नोलन की ‘द ओडिसी’ का रूपांतरण जोसेफ कैंपबेल की ‘हीरो जर्नी’ और नेतृत्व, दृढ़ता व व्यक्तिगत बदलाव पर इसके स्थायी सबक को फिर से देखने का अवसर देता है.

1 week ago

जेन Z, शनि और राजनीतिक शक्ति की नई परिभाषा

भारत में भी राजनीतिक लामबंदी की एक पूरी तरह नई शैली का उदय देखा गया है, जो स्थापित राजनीतिक दलों द्वारा नहीं बल्कि डिजिटल रूप से जुड़े युवा नागरिकों द्वारा संचालित है.

29-July-2026


बड़ी खबरें

जुलाई में फिर बढ़ी महंगाई की मार, 4.45% पर पहुंची खुदरा महंगाई; खाने-पीने की चीजों ने बिगाड़ा बजट

लगातार दूसरे महीने RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रही खुदरा महंगाई. जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52% पर पहुंची, जबकि ट्रांसपोर्ट, कपड़े-जूते और पर्सनल केयर से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

5 hours ago

Shiprocket IPO: आज से खुला ₹1,617 करोड़ का IPO, एंकर निवेशकों से जुटाए ₹727 करोड़

12 से 14 अगस्त तक चलेगा सब्सक्रिप्शन, ₹92-97 प्रति शेयर तय किया गया प्राइस बैंड; कर्ज चुकाने में खर्च होंगे ₹210 करोड़

5 hours ago

टाटा संस में हिस्सेदारी पर बड़ी डील की तैयारी? शापूर मिस्त्री परिवार से ₹10,000 करोड़ के बायबैक पर चर्चा

प्रस्तावित ₹10,000 करोड़ का सौदा मिस्त्री परिवार की केवल एक शाखा को कवर करेगा और इसके एक वैकल्पिक निवेश कोष के माध्यम से किए जाने की संभावना है, मामले से जुड़े लोगों ने बताया.

7 hours ago

भारत की सबसे युवा पीढ़ी के प्रति हमारी सामाजिक जिम्मेदारी

पहली नौकरी के विरोधाभास से लेकर AI साक्षरता और लोकतांत्रिक असहमति की सेहत तक, Gen Z को भारत के भविष्य में भागीदार के रूप में देखने का तर्क, न कि एक ऐसी समस्या के रूप में जिसे संभालने की जरूरत है

6 hours ago

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 23% बढ़कर ₹8.11 लाख करोड़ पहुंचा, पूरे साल के लक्ष्य का करीब एक-तिहाई

10 अगस्त तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 23.09% की वृद्धि, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स ने बढ़ाया राजस्व

10 hours ago