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CFA ने आरबीआई को Climate Risk को लेकर दिया ये सुझाव, जानिए क्‍या होता है Climate Risk? 

दुनियाभर में लगातार बदलते मौसम के बीच चर्चा ये हो रही है कि आखिर क्‍लाइमेट रिस्‍क से कैसे बचा जा सकता है. इसी को लेकर दुनियाभर की वित्तिय संस्‍थाएं काम कर रही हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इस साल फरवरी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से जारी की किए गए क्‍लाइमेट रिस्‍क ड्राफ्ट को लेकर अब द सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी की ओर से आरबीआई को सुझाव दिया है. सीएफए ने कहा है कि इस मामले में आरबीआई को जलवायु जोखिम के बारे में अपनी समझ को और बढ़ाने के साथ फाइनेंशियल संस्‍थानों द्वारा होने वाले खुलासे के स्‍तर को बढ़ाने और व्‍यापक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्‍त निरीक्षण तंत्र का पता लगाने की जरूरत है. 

आखिर क्‍या है ये पूरा मामला? 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल आरबीआई की ओर से इस साल फरवरी में क्‍लाइमेट रिस्‍क को लेकर ड्रॉफ्ट रिपोर्ट जारी की गई थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, वित्तिय संस्‍थानों को अपनी गवर्नेंस स्‍ट्रक्‍चर, रणनीति, जोखिम प्रबंधन को लेकर रेग्‍यूलर तरीके से रिपोर्ट देनी होती है. इसका मकसद उनके द्वारा किए गए निवेश की गई राशि की जलवायु आपातकाल में सुरक्षा करना है. आरबीआई ने जब ये ड्रॉफ्ट रिपोर्ट बनाई गई थी उसके बाद इस पर फीडबैक मांगा गया था. अब इसी मामले को लेकर उस पर सीएफए ने अपनी राय दी है. 

सीएफए ने अपने फीडबैक में क्‍या कहा है
CFA की ओर से अपने फीडबैक को लेकर कई अहम बातें कही है. सीएफए ने कहा है कि जबकि ये ड्राफ्ट सभी वित्तिय संस्‍थानों को स्किल्‍स, क्षमता, डेटा की उपलब्‍धता, के बारे में जानकारी मांगता है लेकिन इसमें जानकारियों को देने की आवश्‍यकता के बारे में स्थिति साफ नहीं है, न ही इसमें ये बताया गया है कि आखिर उन्‍हें दूर करने का उपाय क्‍या है. सीएफए की ओर से ये भी कहा गया है कि अगर इसका प्रभावी तरीके से लागू करना है तो उसके लिए जरूरी है कि डिस्‍क्‍लोजर की जरूरतों के बारे में विस्‍तार से बताया जाए. सीएफए ने इस मामले में स्‍पष्‍ट निवेश मानकों, लक्ष्‍यों, सीमाओं, और निवारण तंत्रों को स्‍थापित करने के महत्‍व पर भी जोर दिया है. 

जलवायु जोखिम क्‍या है? 
जलवायु जोखिम, जलवायु परिवर्तन के कारण अलग-अलग उद्योगों को होने वाले नुकसान और हानि की तरह हैं. इंडस्‍ट्री पर ये प्रभाव बाढ़, जंगल की आग, अत्‍यधिक गर्मी, सूखे और तटीय बाढ़ जैसी लॉन्‍ग टर्म जलवायु घटनाओं के कारण होते हैं. मौजूदा समय में अब इंडस्‍ट्री को इसी रिस्‍क को पहचानने और उससे निपटने के लिए तैयार करने को हो रही है. कई कई बार जलवायु परिवर्तन इंडस्‍ट्री के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं. ऐसे में इसके प्रभाव को समझने के लिए आरबीआई की ओर से ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार की गई है.  

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