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शहरीकरण और हीटवेव्स: तेलंगाना में गर्मी के दुष्प्रभावों से निपटने के लिए उठाए गए कदम

शहरीकरण और गर्मी के बढ़ते प्रभावों से निपटने के लिए, शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना, ऊर्जा की बचत और भवनों में उन्नत निर्माण तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है.

रितु राणा 1 year ago

भारत में शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव और हीटवेव्स के बढ़ते खतरे ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. शहरी क्षेत्रों में गर्मी की तीव्रता और अवधि में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकारों द्वारा कई कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे शहरी हरितीकरण, ऊर्जा बचत की पहल, और विशेष निर्माण तकनीकों को लागू करना, तेलंगाना और अन्य राज्यों में किए गए उपायों के माध्यम से शहरी हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने और गर्मी के दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं. तो आइए जानते हैं ये उपाय क्या हैं? 

हीटवेव्स की बढ़ती तीव्रता: एक छिपा हुआ खतरा

तेलंगाना राज्य सरकार आपदा प्रबंधन के विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने सोमवार को भारज मंडपम में नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल (NRDC) द्वारा आयोजित  ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम (Global Heat & Cooling Forum: Solutions for a Warming World) में चर्चा के दौरान बताया कि हाल के वर्षों में, भारत में हीटवेव्स की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है. यह समस्या शहरीकरण के साथ और भी गंभीर हो रही है. एक रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में शहरी जनसंख्या लगभग 30% है और 2050 तक यह 50% के आसपास पहुंचने की संभावना है. इस शहरीकरण का प्रमुख कारण ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों का प्रवास है, जिससे शहरी क्षेत्रों का विस्तार और वृद्धि हो रही है. खासकर दक्षिणी राज्यों जैसे कर्नाटका, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में शहरी जनसंख्या 45% से अधिक है.

इन शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग आमतौर पर नीले कॉलर श्रमिक होते हैं, जो गरीब और निम्न श्रेणी के होते हैं. वे असुरक्षित आवासों में रहते हैं, जैसे कि पतली छतों या ऐस्बेस्टस की शीट्स वाले घरों में, उनके कार्य घंटे गर्मी के मौसम में दिन के सबसे कठिन समय में होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिमपूर्ण साबित हो सकते हैं.

हीटवेव्स और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव: एक गंभीर समस्या

विश्व बैंक समूह द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हीटवेव्स एक छिपा हुआ खतरा हैं, जिनके प्रभावों को सही से मापना और रिपोर्ट करना कठिन होता है. रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में हीटवेव्स और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव के खिलाफ कई हस्तक्षेप किए गए हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता को लेकर अभी भी एक महत्वपूर्ण ज्ञान अंतर है. रिपोर्ट में तीन मुख्य उपायों की सिफारिश की गई है:

  1. शहरी ग्रीन निवेश: यह उपाय स्वास्थ्य और उत्पादकता लाभों के आधार पर लागत से अधिक लाभकारी साबित हुआ है.
  2. प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: यह उपाय सबसे प्रभावी माना गया है, जो प्रति डॉलर निवेश पर सबसे बड़ी हानि में कमी प्रदान करता है.
  3. ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और हरियाली बढ़ाना: शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें जल निकायों और तालाबों के आसपास हरित आवरण बढ़ाना शामिल है.

तेलंगाना में ग्रीनिंग प्रयास: एक मिसाल

तेलंगाना राज्य ने शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए 2014 में ग्रीनिंग नीति की शुरुआत की थी. राज्य सरकार के अनुसार, राज्य में हरित आवरण 2014 के स्तर से 7% बढ़कर 2023 के अंत तक पहुंच चुका है. इसके अलावा, राज्य ने स्थानीय निकायों के बजट का 10% ग्रीन बजट के रूप में निर्धारित किया है, जो शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाएगा.

ईसीबीसी और पूल रूफिंग नीति

शहरी हीट आइलैंड प्रभाव से निपटने के लिए तेलंगाना राज्य ने एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (ECBC) को अनिवार्य कर दिया है. इसके तहत सभी भवनों को, जिनकी क्षमता 100 किलोवाट से अधिक हो या जिनका क्षेत्रफल 2000 वर्ग मीटर से अधिक हो, ईसीबीसी का पालन करना होगा। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में 1100 से अधिक भवन ईसीबीसी अनुपालक बन चुके हैं और इससे 500 गीगावाट घंटे ऊर्जा की बचत हुई है.

इसके अलावा, तेलंगाना राज्य ने 2023 में एक पूल रूफिंग नीति की शुरुआत की, जिसके तहत सभी प्रकार के आवासीय और गैर-आवासीय भवनों में पूल रूफिंग की व्यवस्था अनिवार्य की गई है. इस नीति के तहत 2028 तक 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पूल रूफिंग स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है, जो गर्मी को कम करने में मदद करेगा.

हीटवेव्स को आपदा के रूप में पहचानना

भारत सरकार और तेलंगाना राज्य ने हीटवेव्स और उनसे होने वाली मौतों को एक आपदा के रूप में पहचान लिया है. इसके तहत, जिला स्तर पर आपातकालीन उपाय किए जा रहे हैं, जैसे कि पानी की टेबल्स की व्यवस्था और गर्मी के दौरान विशेष सलाह जारी करना. इसके अतिरिक्त, ORS (ओआरएस) की व्यवस्था सभी स्कूलों, बस स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर की जा रही है. इन कदमों से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि यह शहरी जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाने में भी मदद करेगा.


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