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भारत के 77वें साल के लिए उदय कोटक ने साझा अपना विजन, कही ये बड़ी बात
सोशल साइट एक्स पर पोस्ट में उदय कोटक ने विकास को बढ़ावा देने और व्यापार की ऊर्जा को खुलकर सामने लाने की जरूरत पर जोर दिया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ उदय कोटक ने भारत की प्रगति और प्राथमिकताओं पर अपने "साल के अंत के विचार" साझा किए. उन्होंने सोशल साइट एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में भारत की विकास यात्रा और उद्यमिता को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया.
पोस्ट का शीर्षक था: "मेरे साल के अंत के विचार: 77 साल का भारत...". उदय कोटक ने "रोटी"– Return on Time Invested (समय का सही उपयोग) का महत्व समझाते हुए कहा कि उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करना बेहद जरूरी है. उन्होंने संरक्षणवाद (protectionism) के खिलाफ चेतावनी दी, यह बताते हुए कि इसका फायदा केवल थोड़े समय के लिए होता है, लेकिन यह लंबे समय में प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर सकता है.
My year end musings: India at 77.
— Uday Kotak (@udaykotak) December 29, 2024
1. Go for growth. Let’s get enterprise and animal spirits firing.
2. ROTI is Return on time invested. Go relentlessly for productivity.
3. Shun protectionism. It may benefit in the short term. Long term it makes us uncompetitive.
4. We need a…
उन्होंने चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) खत्म करने के लिए एक ठोस योजना बनाने और रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया. उनका कहना था, "शक्ति ही शक्ति है," और समृद्धि के लिए सुरक्षा सबसे जरूरी है. उन्होंने अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक वित्तीय सुधार (fiscal consolidation) जारी रखने का सुझाव दिया.
कोटक ने ज्यादा नियम-कायदों (overregulation) के खतरों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि "शून्य दुर्घटना नीति" (zero accident policy) विकास को रोक सकती है. उन्होंने मुक्त और निष्पक्ष बाजारों का सम्मान करने की वकालत की और कहा कि सरकार को केवल बड़े बुलबुले या धांधली के मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए.
विविधता और नवाचार (innovation) को बढ़ावा देते हुए कोटक ने भारत की 1.4 अरब की विशाल जनसंख्या की ताकत पर विश्वास जताया और कहा, "अनेक फूलों को खिलने दें." उन्होंने प्रदूषण पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया और भारत को दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर लाने की बात कही. उन्होंने कहा, "हमें सिर्फ बात नहीं करनी, बल्कि उसे अमल में लाना है." यह पोस्ट भारत के सतत और समावेशी विकास के लिए एक व्यापक खाका पेश करता है.
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