होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / सच्ची स्वतंत्रता: समावेशी समाज के लिए सार्वभौमिक रचना और सहायक प्रौद्योगिकी अनिवार्य

सच्ची स्वतंत्रता: समावेशी समाज के लिए सार्वभौमिक रचना और सहायक प्रौद्योगिकी अनिवार्य

NCPEDP के कार्यकारी निदेशक अरमान अली के अनुसार प्रत्येक नागरिक को अवसरों और संसाधनों तक समान पहुंच प्राप्त होना ही सच्ची स्वतंत्रता है.  

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत अपना 77वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. ऐसे में स्वतंत्रता की अवधारणा पर गहन शोध की आवश्यकता है. सच्ची स्वतंत्रता राजनीतिक स्वायत्तता से अलग है. सच्ची स्वतंत्रता वहां है जहां प्रत्येक नागरिक को उनकी क्षमताओं की परवाह किए बिना, अवसरों और संसाधनों तक समान पहुंच प्राप्त है. ये विचार नेशनल सेंटर फॉर प्रोमोशन ऑफ इम्पलायमेंट फॉर डिसएबल्ड पीपुल (NCPEDP) के कार्यकारी निदेशक अरमान अली ने व्यक्त किए हैं. अरमान अली ने देश में समावेशी समाज के निर्माण को लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं, तो आइए जानते हैं उनके इस लेख में समाज के लिए क्या संदेश है?  

सार्वभौमिक रचना (Universal Design) क्या है?
सार्वभौमिक रचना समावेशी स्वतंत्रता की बुनियाद है. यह सिर्फ रचना या बनावट का एक दर्शन नहीं है, बल्कि एक समावेशी समाज का खाका है. यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि बिना किसी भेदभाव के एक ऐसे  वातावरण का निर्माण किया जाए जहां उत्पाद और सेवाओं का उपयोग हर किसी के लिए अधिकतम सीमा तक संभव हो. 
 

दिव्यांगजनों के लिए सार्वभौमिक रचना की आवश्यकता

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी विविधता के लिए जाना जाता है. इस देश में दिव्यांगजनों की विभिन्न आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक सार्वभौमिक रचना की आवश्यक है. सार्वभौमिक रचना का अर्थ है एक ऐसा वातावरण तैयार करना जिसमें उत्पादों, इमारतों और स्थानों का निर्माण इस तरह से किया जाए कि इसका अधिकतम इस्तेमाल हर कोई बिना किसी परेशानी के सहजता से कर सके. सार्वभौमिक रचना का अर्थ है एक ऐसा वातावरण बनाना जहां दिव्यांगजन शिक्षा और रोजगार से लेकर सामाजिक और नागरिक गतिविधियों तक जीवन के हर पहलू में बिना किसी बाधा के पूरी तरह से भाग ले सकें. यह दृष्टिकोण केवल सामाजिक न्याय का मामला नहीं है, यह देश के भविष्य में एक रणनीतिक बदलाव का भी परिचायक है. 

सहायक प्रौद्योगिकी (Assistive Technology) की परिवर्तनकारी भूमिका

सहायक प्रौद्योगिकी (AT) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सार्वभौमिक रचना की दृष्टि को साकार करने में पूमहत्वर्ण घटक हैं. ये प्रौद्योगिकियां केवल उपकरण नहीं हैं. ये दिव्यांगता और समाज में पूर्ण भागीदारी के बीच की खाई को पाटती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक संस्थानों ने दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने में सहायक प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया है. उदाहरण के लिए, स्पीच-टू-टेक्स्ट सॉफ्टवेयर, संचार बोर्ड और श्रवण यंत्र जैसी प्रौद्योगिकियां संचार क्षमताओं को बढ़ाती हैं, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और त्वरित संदेश जैसे आईटी समाधान कनेक्टिविटी और पहुंच में इजाफा करती हैं. वहीं, रैंप, लिफ्ट और गति प्रदान करने वाली अन्य सहायक उपकरणों से दिव्यांगजनों को प्रत्यक्ष सहायता सुनिश्चित की जाती है. साथ में, सहायक प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी बाधाओं को कम करती हैं, जिससे दिव्यांगजनों के लिए सेवाओं तक पहुंच, शिक्षा में संलग्न होना और कार्यबल में भाग लेना आसान हो जाता है.

सहायक प्रौद्योगिकी में निवेश नैतिक अनिवार्यता के साथ आर्थिक आवश्यकता भी 

सहायक प्रौद्योगिकी में निवेश करना केवल एक नैतिक अनिवार्यता नहीं है; यह एक आर्थिक आवश्यकता भी है. सहायक प्रौद्योगिकी तक अधिक पहुंच से दिव्यांगजनों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है, जिससे उत्पादकता में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य देखभाल की लागत कम होगी और शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व स्तर पर 3 में से 1 व्यक्ति को 2050 तक सहायक उत्पादों की आवश्यकता होगी, फिर भी उच्च लागत और उपलब्धता की कमी के कारण वर्तमान में केवल 5-15 प्रतिशत तक ही पहुंच है.

इसे भी पढ़ें-आर्थिक और सामाजिक प्रगति के माध्यम से भारत को एकीकृत करना है मोदी 3.0 और NDA का लक्ष्य

2030 तक इतना हो जाएगा भारत के सहायक उपकरण बाजार का मूल्य 

भारत का सहायक उपकरण बाजार, जिसका मूल्य 2023 में 613.65 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, 5.5 प्रतिशत की सीएजीआर के साथ 2030 तक 904.60 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. यह आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है. देश सहायक प्रौद्योगिकी बाजार में खुद को वैश्विक नेता के रूप में स्थापित कर सकता है. भारत सरकार का अपने “मेक इन इंडिया” पहल के तहत देश को एक शीर्ष निर्माता के रूप में स्थापित करने पर ध्यान इस लक्ष्य के साथ पूरी तरह से मेल खाता है.

वैश्विक बाजार में इतना है सहायक प्रौद्योगिकी का मूल्य 
सहायक प्रौद्योगिकी का केंद्र बनकर, भारत न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी प्रवेश कर सकता है, जिसका मूल्य 2021 में 21.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2028 तक 28.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

रणनीतिक निवेश के लिए एक आह्वान

भारत को वास्तव में स्वतंत्रता और समानता के आदर्शों को अपनाने के लिए सहायक प्रौद्योगिकी  और सूचना प्रौद्योगिकी में निवेश पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. इसमें अनुसंधान और विकास के लिए बढ़े हुए बजट आवंटन के साथ-साथ ऐसी नीतियां भी शामिल हैं, जो इन प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने को बढ़ावा देती हैं. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया और एनसीपीईडीपी के नेतृत्व में सहायक प्रौद्योगिकी हब जैसी पहल की स्थापना, इस दिशा में एक यही कदम है. इस हब का लक्ष्य भारत को इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहायक प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता का वैश्विक केंद्र बनाना है.

नौकरियों में दिव्यांगजनों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण जरूरी

इसके अलावा सहायक प्रौद्योगिकी केवल उपकरण उपलब्ध कराने के विषय में नहीं है; यह एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के विषय में है जो इन प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग का समर्थन करता है. इसमें कर्मियों को प्रशिक्षण देना, जागरूकता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि सहायक उत्पाद उन लोगों के लिए किफायती और सुलभ हों जिन्हें उनकी आवश्यकता है. उदाहरण के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दिव्यांगजनों के अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सभी नौकरियों में 4 प्रतिशत आरक्षण देना जरूरी है. हालांकि, कम साक्षरता स्तर, कौशल और प्रौद्योगिकी तक पहुंच की कमी और सामाजिक पूर्वाग्रह जैसी चुनौतियों के कारण कई कंपनियां इस लक्ष्य से पीछे रह जाती हैं. सहायक प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ाकर इन चुनौतियों का समाधान संभव है. इससे दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के अवसरों में सुधारकर उनको आर्थिक रूप से और मजबूत किया सकता है.

निष्कर्ष: वास्तव में समावेशी स्वतंत्रता की ओर

जैसा कि हम भारत की आजादी के 77वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं, यह चिन्हित करना जरूरी है कि सच्ची आजादी तभी हासिल की जा सकती है जब प्रत्येक नागरिक को अवसरों, संसाधनों और एक पूर्ण जीवन जीने का समान अवसर मिले. सार्वभौमिक रचना और सहायक तकनीक केवल दिव्यांगजनों को समायोजित करने के विषय में नहीं हैं, वे व्यक्तियों को समाज में योगदान करने और उनकी पूरी क्षमता का एहसास करने के लिए सशक्त बनाने के बारे में हैं.

स्वतंत्र ही नहीं समावेशी समाज के निर्माण की जरूरत
एनसीपीईडीपी-एमफैसिस (MPhasis) यूनिवर्सल डिजाइन अवार्ड्स, अब अपने 15वें वर्ष में, एक समावेशी समाज के निर्माण में सुगम्यता की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करेगा. यह स्मरण करता है कि स्वतंत्रता की ओर यात्रा जारी है, और यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पीछे न छूटे. सहायक प्रौद्योगिकी में निवेश करके और सार्वभौमिक रचना के सिद्धांतों को अपनाकर, भारत एक ऐसे समाज का निर्माण करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है जो न केवल स्वतंत्र हो बल्कि वास्तव में समावेशी भी हो.


टैग्स  
सम्बंधित खबरें

मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता

इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.

13 hours ago

Modi@76: मेक इन इंडिया से ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ तक, भारत के मैन्युफैक्चरिंग के अगले अध्याय की कमान संभालेंगे MSMEs

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के इस विशेष अवसर पर, पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक परिदृश्य में आए बदलावों को देखना जरूरी है.

17 hours ago

मोदी @76: शिक्षा के क्षेत्र में कैसे बदला फोकस, यूनिवर्सिटी विस्तार से डिजिटल अकादमिक आईडी तक

नई शिक्षा नीति से स्किल इंडिया और APAAR तक, नरेंद्र मोदी सरकार के दौर में शिक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर बदलाव की कोशिश

17 hours ago

जन्मदिन विशेष: गुजरात से राष्ट्रीय मंच तक मोदी की 25 साल की यात्रा पर एक नजर

7 अक्टूबर 2001 को मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने और इस अक्टूबर में वह सरकार के प्रमुख के रूप में 25 साल पूरे करेंगे, पहले गुजरात में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर, यह एक ऐसी उपलब्धि है, जिसे समकालीन भारत में बहुत कम राजनेता हासिल कर सकते हैं.

18 hours ago

मोदी @76: शिक्षा और कौशल से विकसित भारत की ओर

डॉ. विनोद बछेती लिखते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और कौशल विकास पर बढ़ा फोकस

20 hours ago


बड़ी खबरें

मोदी @76: वडनगर से दिल्ली तक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष, संगठन और नेतृत्व के 25 साल का सफर

17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 76 वर्ष के हो गए हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर BJP देशभर में महीने भर चलने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू करेगी.

1 day ago

मोदी के जन्मदिन पर पुतिन और ट्रंप की शुभकामनाएं, रूस-अमेरिका के साथ रिश्तों के बीच भारत का संतुलन

रूस और अमेरिका से आए जन्मदिन संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब बदलते वैश्विक आर्थिक संबंधों के बीच भारत रणनीतिक रिश्तों, व्यापार हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साध रहा है.

13 hours ago

मोदी @76: भारत की विकास गाथा के केंद्र में उद्योग और उद्यमिता

इस लेख में इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन और भारत को एक मजबूत विनिर्माण, नवाचार और निर्यात अर्थव्यवस्था में बदलने पर विचार रखें हैं.

13 hours ago

टाटा संस में चंद्रशेखरन की री-अपॉइंटमेंट पर नोएल टाटा की आपत्ति, बोले- ‘अब आगे बढ़ने का समय’

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.

14 hours ago

PM मोदी @76: ड्रोन विजन से इनोवेशन से इम्पैक्ट की ओर बढ़ता भारत

कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सर्वे और आपदा प्रबंधन तक बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल, नीति सुधार, मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग और उद्यमिता से सेक्टर को मिल रही रफ्तार

15 hours ago