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पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि: एक दूरदर्शी जिन्होंने समावेशी विकास का समर्थन किया

आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्य तिथि पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. उन्होंने समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचितों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित किया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्य तिथि पर हम एक दूरदर्शी विचारक, महान राष्ट्रवादी और एक ऐसे नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने अपना जीवन भारत की सेवा में समर्पित किया. उनका दृष्टिकोण, जो भारतीय संस्कृति की जड़ों में गहराई से निहित है, आज भी हमारे राष्ट्रीय सफर में समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता की ओर मार्गदर्शन करता है. 'समग्र मानववाद' के समर्थक पंडित दीनदयाल जी ने एक ऐसे आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था की कल्पना की थी जिसमें हर व्यक्ति, खासकर सबसे हाशिये पर रहने वाला व्यक्ति, गरिमा के साथ जीवित रह सके. उनका 'अंत्योदय' का सिद्धांत—अर्थात आखिरी व्यक्ति का उत्थान—आज भी भारत की नीति निर्धारण प्रक्रिया को प्रभावित करता है.

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का 'अंत्योदय' और समग्र मानववाद का दृष्टिकोण
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितंबर 1916 को हुआ था. वह केवल एक राजनीतिक विचारक नहीं, बल्कि एक दार्शनिक, अर्थशास्त्री, इतिहासकार और समाजशास्त्री भी थे. उनका 'समग्र मानववाद' का सिद्धांत भौतिक और आध्यात्मिक प्रगति को सामंजस्यपूर्ण तरीके से एकीकृत करने की कोशिश करता था. उन्होंने आत्मनिर्भर और विकेन्द्रीकृत आर्थिक मॉडल का समर्थन किया, जिसमें गाँवों को विकास का मुख्य केंद्र माना गया. 'अंत्योदय' उनके विचारधारा का आधार था—एक ऐसी अडिग प्रतिबद्धता कि सबसे गरीब व्यक्ति का उत्थान हो.
उनकी दृष्टि न केवल विचारधारात्मक थी, बल्कि व्यावहारिक भी थी. उनका मानना था कि एक राष्ट्र तभी प्रगति कर सकता है जब उसकी विकास नीतियाँ सामाजिक पदानुक्रम के अंतिम व्यक्ति के इर्द-गिर्द केंद्रित हों. उनके विचार गांधीजी की ग्राम स्वावलंबन की विचारधारा से मेल खाते थे और इसने ऐसी शासन प्रणालियों को प्रेरित किया जो मानव कल्याण को प्राथमिकता देती हैं.

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों की समकालीन प्रासंगिकता
'अंत्योदय' और उनके दृष्टिकोण के साथ मेल खाते हुए, भारत सरकार ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को ध्यान में रखते हुए कई पहलें शुरू की हैं, जिनका उद्देश्य समग्र और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है. ये योजनाएँ गरीबी उन्मूलन, कौशल विकास, रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विद्युतीकरण और वित्तीय समावेशन पर केंद्रित हैं—जो सीधे तौर पर उनके दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती हैं.

1. दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना (DAY)
यह महत्वाकांक्षी योजना शहरी और ग्रामीण गरीबों को कौशल विकास और स्व-रोजगार के अवसरों के माध्यम से उन्नति प्रदान करने पर केंद्रित है. यह ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह (SHGs) के गठन को प्रोत्साहित करती है, जिससे वे वित्तीय संसाधनों तक पहुँच प्राप्त कर सकें और अपनी आजीविका में सुधार कर सकें.
2. डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)
DBT पंडित दीनदयाल जी के उस विश्वास का प्रतीक है, जिसमें मध्यस्थों को कम करने और पारदर्शी शासन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. इस योजना के तहत सब्सिडी और कल्याणकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए जाते हैं, जिससे लीकेज समाप्त होती हैं और वित्तीय समावेशन में वृद्धि होती है.
3. दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY)
2014 में लॉन्च की गई, DDU-GKY राष्ट्रीय कौशल विकास नीति के तहत एक प्रमुख योजना है. यह योजना ग्रामीण युवाओं को वेतन आधारित कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित है, जिससे भारत के जनसांख्यिकीय अधिशेष को जनसांख्यिकीय लाभ में बदला जा सके. यह योजना 'मेक इन इंडिया' अभियान में महत्वपूर्ण योगदान करती है, जिससे ग्रामीण युवाओं को देश की आर्थिक प्रगति में भाग लेने का अवसर मिलता है.
4. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (DDUGJY)
विधुत आधुनिक विकास की नींव है, और 2015 में लॉन्च की गई DDUGJY ने हजारों गाँवों को रोशन किया, जो स्वतंत्रता के बाद से अंधेरे में थे. यह योजना ग्रामीण विद्युतीकरण में सहायक रही है, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में जीवन गुणवत्ता में सुधार हुआ है.
5. मुद्रा योजना
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के महत्व को पहचानते हुए, सरकार ने माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (MUDRA) बैंक की स्थापना की. यह पहल गैर-कॉर्पोरेट छोटे व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों में उद्यमिता और स्व-रोजगार को बढ़ावा देती है.
6. प्रधानमंत्री उज्जवला योजना
2016 में लॉन्च की गई उज्जवला योजना, सबसे प्रभावशाली सामाजिक कल्याण योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे (BPL) households को LPG कनेक्शन प्रदान करना है. पारंपरिक खतरनाक ईंधनों को स्वच्छ रसोई गैस से बदलकर, इस योजना ने भारत भर में लाखों महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार किया है.
7. दीनदयाल उपाध्याय स्वानी योजना
यह आगामी पहल एक मजबूत ग्रामीण उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र की कल्पना करती है. यह योजना गाँवों में युवाओं के लिए स्व-रोजगार के अवसर उत्पन्न कर, स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखती है.

एक धरोहर: भारत के भविष्य को सशक्त बनाना
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के आदर्श आज भी हमारे नीति निर्धारकों और शासन प्रणालियों को प्रेरित करते हैं. उनके द्वारा अपंगों और वंचितों के उत्थान में अडिग विश्वास आज भी विभिन्न सामाजिक-आर्थिक नीतियों की नींव है. उनका दर्शन हमें यह याद दिलाता है कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है जब यह सभी के लिए समृद्धि सुनिश्चित करता है, और कोई भी पीछे न छूटे.
जब हम उनके बलिदान और समर्पण को याद करते हैं, तो यह अनिवार्य है कि हम उनके आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएं. उन विकास नीतियों को बढ़ावा देकर जो समाज की अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को प्राथमिकता देती हैं, हम एक ऐसा राष्ट्र बना सकते हैं जो न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो, बल्कि सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण और सांस्कृतिक रूप से गहरे जुड़े हुए हों. पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी को सच्ची श्रद्धांजलि हमारे सामूहिक संकल्प में है—'अंत्योदय' को सुनिश्चित करते हुए, ताकि प्रगति की रोशनी हमारे समाज के हर कोने तक पहुंचे.

(अतिथि लेखक- डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा, राज्यसभा सांसद और राज्य महासचिव, भाजपा झारखंड)


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