होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / आम लोगों के लिए ये संकेत है अच्छा, जानिए एक्सपर्ट का क्या है कहना

आम लोगों के लिए ये संकेत है अच्छा, जानिए एक्सपर्ट का क्या है कहना

एक्सपर्ट तरुण तत्संगी का मानना है कि नई फसल की आवक बढ़ने पर सोयाबीन का भाव 4,500 रुपये के निचले स्तर तक भी लुढ़क सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: मंडियों में नई फसल की आवक बढ़ने पर सोयाबीन का भाव 4,500 रुपये प्रति क्विंटल के निचले स्तर तक लुढ़क सकता है. चालू खरीफ सीजन में सोयाबीन की बंपर फसल की संभावना, सरसों का ज्यादा स्टॉक और मलेशिया में सीपीओ की कीमतों में कमजोरी की वजह से सोयाबीन की कीमतों में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है. कीमतों में गिरावट आम आदमी के लिए अच्छा संकेत है, क्योंकि आने वाले समय में रिफाइंड तेल की कीमतें गिर सकती हैं.

कहां तक जा सकता है भाव
ओरिगो ई-मंडी के असिस्टेंट जनरल मैनेजर (कमोडिटी रिसर्च) तरुण तत्संगी के मुताबिक इंदौर में सोयाबीन का भाव हमारे अनुमान के अनुसार 5,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया है. उनका कहना है कि हम 6,800 रुपये के स्तर से लगातार मंदी में हैं और आगे चलकर भाव 5,000 रुपये के निचले स्तर को छू सकता है. तरुण तत्संगी का मानना है कि नई फसल की आवक बढ़ने पर सोयाबीन का भाव 4,500 रुपये के निचले स्तर तक भी लुढ़क सकता है. हालांकि उनका कहना है कि इन स्तरों के नीचे और गिरावट की उम्मीद नहीं है और सोयाबीन का भाव इस स्तर पर स्थिर हो सकता है और खरीदार इस भाव के आस-पास सक्रिय हो जाएंगे.

जरूरत के मुताबिक ही सोयाबीन की हो रही खरीदारी
तरुण कहते हैं कि क्रूड सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी ऑयल पर आयात शुल्क को खत्म करने, इंडोनेशिया और मलेशिया से सीपीओ और पामोलीन की ज्यादा सप्लाई और सूरजमुखी ऑयल के आयात में बढ़ोतरी अभी भी सोयाबीन की कीमतों में गिरावट के लिए वैध कारण हैं. उनका कहना है कि इंडस्ट्री में अभी निराशा की भावना है. दरअसल, ऑयल और ऑयलसीड में भारी उतार-चढ़ाव नई सामान्य स्थिति हो गई है और इसी को लेकर हमने हमने विभिन्न उद्योगपतियों के साथ बात की है. कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव की वजह से मिलर्स और प्रोसेसर अपनी इकाइयों को चलाने के लिए स्टॉक की एक छोटी मात्रा रखने के लिए घबरा रहे हैं, क्योंकि वे कीमतों में भारी उठापटक के लिए अपनी कारोबार को जोखिम में नहीं डालना चाहते हैं. मिलर्स और प्रोसेसर अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने के साथ ही ऑर्डर के आधार पर ही खरीदारी कर रहे हैं.

पिछले साल के समान है सोयाबीन की बुआई
2 सितंबर 2022 तक देशभर में सोयाबीन की बुआई 120.4 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो पिछले साल के 120.60 लाख हेक्टेयर के समान है. सोयाबीन की बुआई लगभग खत्म हो चुकी है. अब सोयाबीन के रकबे में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होने के आसार हैं. 

खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी
जुलाई 2022 में भारत का खाद्य तेल आयात मासिक आधार पर 28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 12,05,284 टन दर्ज किया गया था, जबकि जून 2022 में यह आंकड़ा 9,41,471 मीट्रिक टन था. हालांकि सालाना आधार पर आयात में 31 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जुलाई 2021 में 9,17,336 मीट्रिक टन आयात हुआ था. नवंबर 2021 से जुलाई 2022 तक भारत का खाद्य तेल का कुल आयात 9.70 मिलियन मीट्रिक टन दर्ज किया गया था, जबकि पिछले ऑयल वर्ष की समान अवधि में कुल आयात 9.37 मिलियन मीट्रिक टन था.

VIDEO : एयरलाइंस कंपनियों में मची सस्ता टिकट देने की होड़, जानिए कितना हुआ किराया


टैग्स
सम्बंधित खबरें

भारत के आर्थिक आत्मविश्वास का दशक

भारत जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो आत्मविश्वास के लिए एक मजबूत आधार मौजूद है. यह न तो आत्मसंतुष्टि है और न ही अति-उत्साह, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित आत्मविश्वास है.

18 hours ago

भारत @ 80: उपलब्धियों की लंबी छलांग, अधूरी चुनौतियां और विकसित भारत 2047 की राह

लेखक डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी कहते हैं, अब भारत के सामने सवाल बदल चुका है. सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि देश विकास कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या विकास संतुलित, उत्पादक, समावेशी और मानवीय बन सकता है.

1 day ago

भारत की सबसे युवा पीढ़ी के प्रति हमारी सामाजिक जिम्मेदारी

पहली नौकरी के विरोधाभास से लेकर AI साक्षरता और लोकतांत्रिक असहमति की सेहत तक, Gen Z को भारत के भविष्य में भागीदार के रूप में देखने का तर्क, न कि एक ऐसी समस्या के रूप में जिसे संभालने की जरूरत है

3 days ago

बुढ़ापे की रफ्तार धीमी करने का विज्ञान

बेहतर नींद और पर्याप्त पानी से लेकर संतुलित आहार और नियमित व्यायाम तक, जीवनशैली की नौ आदतें सूजन (इन्फ्लेमेशन) को कम कर सकती हैं, बुढ़ापे की रफ्तार धीमी कर सकती हैं और बीमारियों के खतरे को घटा सकती हैं.

1 week ago

अगला केरल मॉडल: गरिमा के साथ बढ़ती उम्र

डॉ. प्रो. सुधा चंद्रशेखर के अनुसार, जैसे-जैसे केरल भारत के सबसे अधिक दीर्घायु समाजों में से एक बनता गया, वैसे-वैसे यह उन शुरुआती राज्यों में भी शामिल हो गया, जिन्हें उस सवाल का सामना करना पड़ा जिसका सामना आने वाले वर्षों में कई अन्य राज्यों को भी करना होगा: जब हर 5 में से 1 व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष से अधिक हो, तो ऐसा समाज कैसा होना चाहिए?

1 week ago


बड़ी खबरें

भारत के आर्थिक आत्मविश्वास का दशक

भारत जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो आत्मविश्वास के लिए एक मजबूत आधार मौजूद है. यह न तो आत्मसंतुष्टि है और न ही अति-उत्साह, बल्कि तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित आत्मविश्वास है.

18 hours ago

विकसित भारत की ‘सप्तधारा’: मैन्युफैक्चरिंग से AI तक, पीएम मोदी ने बताया 2047 का रोडमैप

लाल किले से पीएम मोदी ने देश की 7 बड़ी ताकतों पर रखा फोकस. 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग देने का ऐलान, मैन्युफैक्चरिंग, किसान, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी और सॉफ्ट पावर को बताया विकसित भारत की बुनियाद

1 day ago

भारत @ 80: उपलब्धियों की लंबी छलांग, अधूरी चुनौतियां और विकसित भारत 2047 की राह

लेखक डॉ. ब्रजेश कुमार तिवारी कहते हैं, अब भारत के सामने सवाल बदल चुका है. सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि देश विकास कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि क्या विकास संतुलित, उत्पादक, समावेशी और मानवीय बन सकता है.

1 day ago

जी के 3,100 करोड़ रुपये के फंड जुटाने पर रोक क्यों? सैट ने सेबी के फैसले पर उठाए सवाल

प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि जब दो महीने की रोक खत्म होने के बाद निवेश की अनुमति है, तो अभी इस पर रोक लगाने का आधार क्या है. सार्वजनिक शेयरधारकों के भारी समर्थन को भी न्यायाधिकरण ने अहम माना.

1 day ago

स्टेशनरी बेचने से IIGJ के CEO तक... देबाशीष बिस्वास की 30 साल की प्रेरक यात्रा

बैंकिंग से शिक्षा जगत तक 30 साल का सफर, 60 हजार से ज्यादा छात्रों को दे चुके हैं मार्गदर्शन देवाशीष बिस्वास

1 day ago