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तांडव और लास्य की शक्ति: बिजनेस में जोखिम और स्थिरता का संतुलन जरूरी, जानिए कैसे?
तांडव का मतलब है विनाश, लेकिन यह अराजकता के लिए नहीं होता, बल्कि नए रास्ते बनाने के लिए होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बिजनेस की दुनिया एक नृत्य की तरह है, जहां कंपनियां कभी तेज़ और उथल-पुथल भरे बदलाव (तांडव) में होती हैं, तो कभी नए विचारों और रचनात्मकता (लास्य) के साथ बढ़ती हैं. इस संतुलन को बनाए रखना बहुत ज़रूरी है. अगर कोई कंपनी सिर्फ़ पुराने तरीकों और कठोर नियमों पर चलती रही और नए बदलाव नहीं किए, तो वह धीरे-धीरे पीछे रह जाएगी. वहीं, अगर वह बिना किसी ठोस आधार के सिर्फ़ बदलाव पर ज़ोर देती रही, तो उसका टिके रहना मुश्किल हो सकता है.
तांडव-लास्य मॉडल: बिज़नेस में जोखिम और स्थिरता
तांडव का मतलब है विनाश, लेकिन यह अराजकता के लिए नहीं होता, बल्कि नए रास्ते बनाने के लिए होता है. बिज़नेस में इसका मतलब होता है पुराने और बेकार सिस्टम को तोड़कर नए और बेहतर बदलाव लाना. दूसरी ओर, लास्य का मतलब होता है विकास को बढ़ावा देना, ताकि जो बदलाव किए जाएं, वे मजबूत और टिकाऊ आधार पर हों.
उदाहरण के लिए, Warner Bros. Discovery का मामला लें. दिसंबर 2024 में कंपनी ने अपनी संरचना में बड़ा बदलाव किया, और दो हिस्सों में बांट दिया: ग्लोबल नेटवर्क और स्ट्रीमिंग और स्टूडियोज़. यह कदम तांडव जैसा था, जिसमें पुरानी ऑपरेशनल संरचनाओं को तोड़ा गया. CEO डेविड ज़ासलाव ने 2022 के मर्जर के बाद $4 बिलियन की लागत बचाने के लिए कई बड़े कदम उठाए, जैसे कि घाटे में चल रहे प्रोजेक्ट्स को बंद करना और कंटेंट स्ट्रैटेजी को नए तरीके से तैयार करना, ताकि कंपनी का भविष्य टिकाऊ हो. कंपनी ने स्ट्रीमिंग से मुनाफा बढ़ाने के लिए नए उपाय किए, जैसे कि कीमतें बढ़ाना और Max के लिए पैकेज ऑफर करना, जो लास्य की तरह है, क्योंकि यह बदलाव सिर्फ कटौती करने के बारे में नहीं था, बल्कि एक स्थिर भविष्य बनाने के बारे में था.
दूसरी ओर, 2024 में कई कंपनियों के दिवालिया होने का उदाहरण यह बताता है कि बिना स्थिरता के केवल बदलाव करने से गिरावट हो सकती है. 686 कंपनियां दिवालिया हुईं, जो 2010 के बाद सबसे अधिक है, और इससे यह स्पष्ट होता है कि बहुत ज्यादा बदलाव बिना स्थिरता के नुकसान पहुंचा सकता है.
Apple इसका बेहतरीन उदाहरण है. कंपनी ने तांडव का पालन करते हुए पुराने उत्पादों जैसे iPod को बंद किया और पुरानी टेक्नोलॉजी को छोड़ दिया, ताकि वह आगे बढ़ सके. लेकिन लास्य का पालन करते हुए Apple ने अपने सिस्टम को लगातार बेहतर किया, ताकि ग्राहकों के लिए बदलाव आसान हो. M-series प्रोसेसर की तरफ़ बदलाव, जो पहले Intel चिप्स से था, इसका बेहतरीन उदाहरण है. इस बदलाव ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर किया और बैटरी की उम्र को बढ़ाया. इसके अलावा, Apple का AI को अपने उपकरणों में इंटिग्रेट करना भी लास्य को दर्शाता है, क्योंकि यह स्थिर इनोवेशन को बढ़ावा देता है.
वहीं, WeWork का पतन एक उदाहरण है कि जब तांडव बहुत ज्यादा होता है और लास्य की कमी होती है तो गिरावट हो सकती है. कंपनी ने बहुत तेजी से विस्तार किया, लेकिन स्थिर फाइनेंस मैनेजमेंट की कमी के कारण वह गिर गई. वहीं, Microsoft ने तांडव का पालन किया, जब उसने Windows-centric दृष्टिकोण को छोड़ दिया और क्लाउड आधारित इनोवेशन पर ध्यान दिया, जिसके कारण उसे बाजार में वापसी मिली.
हाल ही में, भारतीय कंपनियों ने इस संतुलन को प्रभावी तरीके से अपनाया है. Tata ग्रुप ने N. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में बड़े बदलाव किए, घाटे में चल रही यूनिट्स को बंद किया और साथ ही AI, रिन्यूएबल एनर्जी और ई-कॉमर्स में निवेश किया, जिससे तांडव और लास्य का संतुलन बना. रिलायंस जियो ने भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपने आक्रामक मूल्य निर्धारण से बदल दिया, जो तांडव का उदाहरण है. लेकिन, उसने डिजिटल सेवाओं और खुदरा क्षेत्र में निवेश किया, जो लास्य को दिखाता है और लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखता है.
साथ ही, Zomato ने Blinkit का अधिग्रहण करके तांडव को अपनाया, जब उसने अपनी फूड सर्विस से बढ़कर क्विक कॉमर्स में कदम रखा. हालांकि इस बदलाव को लेकर शुरू में संदेह था, लेकिन Zomato ने लागत की दक्षता और मुनाफे पर ध्यान केंद्रित किया (लास्य), जिसके परिणामस्वरूप उसने 2023 में अपनी पहली तिमाही का लाभ हासिल किया, यह दिखाता है कि जोखिम और संरचित विकास का संतुलन कितना महत्वपूर्ण है.
अंत में, Citigroup ने 2024 के अंत में 11,000 नौकरियों को खत्म किया, लेकिन साथ ही 8,000 से ज्यादा कर्मचारियों को पदोन्नति दी, जिससे तांडव और लास्य के संतुलन का उदाहरण मिलता है. इसी तरह, Latham & Watkins ने अपनी वित्तीय संरचना में बदलाव करते हुए एक नए प्रमुख को नियुक्त किया, जो वित्तीय बदलावों को सही तरीके से संभालने का प्रयास कर रहे हैं.
कॉरपोरेट की जरूरत: शिव-शक्ति संतुलन को समझना
2024 की एक BCG रिपोर्ट के अनुसार, 68% CEO मानते हैं कि लगातार बदलाव ज़रूरी है, लेकिन वे इसे सही तरीके से लागू करने में मुश्किल महसूस करते हैं, क्योंकि इससे उनकी कंपनियों में अस्थिरता आ सकती है. तांडव-लास्य सिद्धांत एक सही रास्ता दिखाता है:
1. समय पर बदलाव करें: पुराने तरीकों, बिज़नेस मॉडल और बाजारों की पहचान करें जो अब फायदेमंद नहीं हैं और उन्हें बदलें.
2. सुरक्षा का ध्यान रखें: जोखिम लेने के साथ-साथ स्थिरता भी ज़रूरी है. बदलाव इतनी तेज़ी से न हो कि कंपनी उसे संभाल न सके.
3. दोहरे नेतृत्व को अपनाएं: जैसे शिव और शक्ति साथ रहते हैं, वैसे ही बिज़नेस में भी जोखिम उठाने वाले नेताओं को ऐसे लोगों के साथ काम करना चाहिए जो दीर्घकालिक रणनीतियों को संभालें और आगे बढ़ाएं.
4. लचीली संस्कृति अपनाएं: जो कंपनियाँ बदलाव और स्थिरता का सही संतुलन रखती हैं, जैसे Amazon और Tesla, वे अपने आप को लगातार नया रूप देती रहती हैं, लेकिन अपनी मूल पहचान को नहीं खोतीं.
शिव-शक्ति सोच को अपनाना
आज के समय में बिज़नेस एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं. जो कंपनियां तांडव और लास्य के नृत्य को समझकर अपनाएंगी, वे भविष्य का नेतृत्व करेंगी. शिव और पार्वती हमें सिखाते हैं कि विनाश के बाद सृजन ज़रूरी है, और बदलाव हमेशा समझदारी से किया जाना चाहिए.
भारत का कॉरपोरेट सेक्टर भी वैश्विक बाज़ार की तरह लगातार बदल रहा है. जो कंपनियां बिना किसी ठोस योजना के सिर्फ़ बदलाव करती हैं, वे जल्दी गिर जाती हैं, और जो बदलाव से बचती हैं, वे पीछे छूट जाती हैं. भविष्य उन्हीं का होगा जो इस दिव्य नृत्य की तरह दोनों शक्तियों बदलाव और स्थिरता को संतुलित करेंगे. चाहे सिलिकॉन वैली हो या मुंबई, सीख एक ही है, सिर्फ विनाश और सृजन को साथ लाकर ही कंपनियां इस बदलती दुनिया में सफल हो सकती हैं.
(लेखिका के बारे में- प्रियंका शर्मा कैंतुरा एक लेखिका, वक्ता और ब्रांड, प्रतिष्ठा, बदलाव और संस्कृति संचार की विशेषज्ञ हैं. उन्होंने "महादेवी, अस्तित्व के पीछे का अनदेखा सच" और "माई जिफ़ीज़, बिना मिलावट और बिना सजावट के पलों की कहानी" किताबें लिखी हैं, जिनमें पौराणिक कथाओं और समाज से जुड़े विषयों को गहराई से समझाया गया है. उन्हें इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार 2023 और टाइम्स पावर आइकन 2018 सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं. प्रियंका पौराणिक कथाओं की सच्चाई को समझने और गहरी व अर्थपूर्ण बातचीत को बढ़ावा देने के लिए जानी जाती हैं. वे प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में लिखती हैं और अकादमिक व साहित्यिक मंचों पर बोलती हैं. उनकी दूसरी रचनाएं पढ़ने के लिए www.priyankasharmakaintura.com पर जाएं.)
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