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स्मृति शेष: आपदा से भी अवसर खोज निकालने वाले जादूगर थे अनिल अग्रवाल
"केजरीवाल ने वैश्विक व्यापार साम्राज्य खड़ा किया और सिंगापुर के प्रधानमंत्री , रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एवं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना मित्र माना."
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
- समीर अहलूवालिया
मैं 2017 की गर्मियों में पहली बार अनिल केजरीवाल से मिला था. मेरे दोस्तर स्वप्निल, जो उनके वेल्थ मैनेजर थे, ने मुझे स्टार्ट-अप में संभावित निवेश के लिए उनसे मिलने के लिए बुलाया, जिसकी मैंने योजना बनाई थी. मुझे नहीं पता था कि गुड़गांव में उनके आलीशान अरालियास पेंटहाउस में एक घंटे की यह संक्षिप्त मुलाकात एक ऐसे रिश्ते में बदल जाएगी, जिसे मैं न तो विशुद्ध रूप से पेशेवर कह सकता हूं और न ही व्यक्तिगत.
IITians के थे दीवाने
इस लेख के माध्यम से मैं कुछ ऐसे किस्से साझा करके उस व्यक्ति को याद करने की कोशिश करूंगा, जो 70 साल की उम्र में 27 साल जैसा युवा था, जिन्होंने न केवल मुझ पर, बल्कि उन लोगों के जीवन पर भी अमिट छाप छोड़ी, जो किसी न किसी रूप में उनसे जुड़े रहे. IIT कानपुर में पढ़ाई करने के बाद, अनिल केजरीवाल IIT की जीवनशैली और आमतौर पर IITians के दीवाने थे. अपनी पहली मुलाकात के बाद, मुझे अहसास हुआ कि उनसे निवेश प्राप्त करना मुश्किल है, क्योंकि मैंने उस प्रतिष्ठित संस्थान में पढ़ाई नहीं की है. अनिल केजरीवाल आईआईटी के पर्याय थे. उन्होंने 1992 में सिंगापुर में आईआईटी एलुमनाई का पहला ग्लोबल चैप्टर स्थापित किया, वे इसी देश के नागरिक थे. उनकी अग्रणी पहलों में दिल्ली एनसीआर, कोलकाता और बेंगलुरु में शायद भारत के पहले आईटी पार्क स्थापित करना शामिल है. 1980 के दशक में, वे भारत से कंप्यूटर के सबसे बड़े निर्यातक थे, ये वो दौर था जब भारत में कंप्यूटर दुर्लभ माने जाते थे.
तैयार रखते थे प्लान B
पहली मुलाकात के कुछ हफ़्ते बाद, अनिल केजरीवाल, जिन्हें मैं अनिल सर कहता था, ने मुझे फ़ोन करके लंच पर मिलने के लिए कहा. यह ऐसी कई बैठकों में से संभवतः पहली थी जहां हमने लगभग हर विषय पर चर्चा की. राजनीति, शासन, हमारा काम और उनका व्यवसाय करने का तरीका, जो दूरदर्शी और अग्रणी था लेकिन अपने दृष्टिकोण में मितव्ययी था. उनकी जो बात सबसे अलग थी वह यह कि जब भी मैं उनसे मिला, वे अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ चुके थे, और प्लान बी भी तैयार कर लिया था, जो पीछे हटने पर नहीं बल्कि उनके अगले बिग मूव पर केन्द्रित था.
ऐसे शुरू की ग्लोबल कंपनी
हम लगभग हर महीने मिलने लगे, या तो अरालियास क्लब में या इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में. उनके व्यक्तित्व में कुछ ऐसा आकर्षण था जो मुझे उनकी ओर खींचता था और समय के साथ मुझे अहसास हुआ कि दूसरे लोग भी ऐसा ही महसूस करते हैं. उनके सरल व्यक्तित्व और युवा दिल वाली बातचीत ने हमारी उम्र और पृष्ठभूमि के अंतर को धुंधला कर दिया. हम दोस्त बन गए थे जो साथ में घूमते भी थे. उनकी जिंदगी में एक अहम् मोड़ तब आया जब 2020 में कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में लिया. अनिल सर ने मुझे लॉकडाउन के दौरान एक दिन बुलाया और आयोडीन और इसके लाभों के बारे में एक बताया. साथ ही यह भी कि यह वायरस के खिलाफ सबसे अच्छा बचाव कैसे है. जब हम सब केवल लॉकडाउन के प्रभाव के बारे में सोच रहे थे, अनिल सर ने एक व्यावसायिक अवसर को महसूस किया. अगले कुछ हफ्तों में, उन्होंने 70 साल की उम्र में एक स्टार्ट-अप के रूप में i2 Cure लॉन्च किया. इस तरह जब दुनिया लॉकडाउन में थी, एक ग्लोबल कंपनी का जन्म हुआ. कुछ ऐसा था अनिल केजरीवाल का जादू.
परिवार का सदस्य माना
अनिल सर ने कंपनी को एक सच्चे स्टार्टअप की तरह चलाया. लीन टीम, सिंपल ऑफिस और सैलरीज पर एक कैप. मैं अक्सर उनसे इसका कारण पूछता और वे कहते कि वे बिना किसी बाहरी निवेश की आवश्यकता के, एक स्टार्टअप को कैसे चलाना चाहिए, इसे फिर से परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं. मेरी कंपनी ने i2 Cure उत्पादों की रेंज के लिए ज्ञान-आधारित सामग्री बनाने के लिए कुछ काम किया. वे मुझे याद दिलाते रहे कि यह एक स्टार्टअप है और इसलिए वे इस प्रोजेक्ट लिए मुझे केवल अपनी जेब से ही भुगतान कर सकते हैं. "कोई चिंता नहीं अनिल सर, केवल हमारी जेब से लगने वाले खर्चों की पूर्ति ही काफी है. जब कंपनी बढ़ेगी, तो मैं सब वसूल लूंगा," यह मेरा जवाब था. इस एक वाक्य ने अगले कुछ वर्षों में हमारे रिश्ते को परिभाषित किया. उन्होंने मुझे i2 Cure की संस्थापक टीम का हिस्सा बताया और सभी से अपने परिवार के सदस्य के रूप में पर परिचय कराया. पेशेवर और व्यक्तिगत रिश्ते के बीच की रेखा अब हमेशा के लिए मिट चुकी थी.
ऐसे थे उनके दोस्त
केजरीवाल ने वैश्विक व्यापार साम्राज्य खड़ा किया और सिंगापुर के प्रधानमंत्री , रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपना मित्र माना. उन्होंने पिछले दो वर्षों में अधिकांश समय बांग्लादेश में बिताया, जहां उन्होंने बड़े पैमाने पर डायलिसिस केंद्र स्थापित करने और कॉक्स बाज़ार समुद्र तट क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई. वह बांग्लादेश में आईआईटी-प्रकार के संस्थान की स्थापना के लिए भी चर्चा के अंतिम चरण में थे. कुछ महीने पहले उन्होंने मुझे व्लादिमीर पुतिन के एक करीबी विश्वासपात्र बोरिस टिटोव से मिलने के लिए बुलाया, जो रूस में एक टॉप पॉलिटिकल लीडर होने के साथ-साथ रूस की सबसे बड़ी वाइन कंपनी अब्रू-डुरसो के मालिक हैं. उन्होंने सब से मेरा अपने परिवार के सदस्य के रूप में परिचय कराया. अनिल सर रूसियों के साथ मिलकर भारतीय बाजार में डिब्बाबंद संगरिया लॉन्च करने के इच्छुक थे.
वो आखिरी मुलाकात
मैं उनसे आखिरी बार 29 जुलाई को मिला था, जिस दिन वे आईआईटी स्टडी टूर के लिए तंजानिया जा रहे थे, जो उनकी अंतिम विश्राम स्थली में तब्दील हो गया. हम इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में लंच पर मिले. वे हमेशा की तरह ही खुशमिजाज, नए विचारों से भरे हुए थे और अफ्रीका में व्यापार के अवसरों की तलाश करने को लेकर उत्साहित थे, उनका पहले से ही तंजानिया जाने का प्लान था. हम खान मार्केट गए क्योंकि अनिल सर को अपनी एसिडिटी की समस्या से निपटने के लिए दवाइयां खरीदनी थीं. मैंने उन्हें अजवाइन और सेंधा नमक का एक देसी मिश्रण भी दिया, जिसे मैं अपने साथ रखता हूं, और उन्हें बेहतर महसूस हुआ. पहली बार, उन्होंने अपने परिवार के बारे में विस्तार से बात की, जो उनके सामान्य चरित्र का हिस्सा नहीं था. मुझे नहीं पता था कि यह हमारी आखिरी मुलाकात होगी. अनिल केजरीवाल ने जो ऊर्जा, भावना और उद्यमशीलता का जज्बा दिखाया, उसकी बराबरी बहुत कम लोग कर सकते हैं. वे भले ही हमें छोड़कर जा चुके हैं, लेकिन मैं जब भी आसमान को देखता हूं तो लगता है कि वे वहां किसी नए बिज़नेस आईडिया को आकार दे रहे होंगे.
(लेखक Content Advisory Group के पार्टनर हैं)
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