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बैंकिंग संकट पर आया Raghuram Rajan का बयान, कहा - 'कुछ भी हो सकता है'

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बैंकिंग सेक्टर में अभी और उथल-पुथल की आशंका जताई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) जब कुछ बोलते हैं, तो दुनिया सुनती है. 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट को लेकर उनकी भविष्यवाणी सटीक साबित हुई थी. अब उन्होंने मौजूदा बैंकिंग संकट को लेकर कुछ ऐसा कहा है, जो चिंता बढ़ा सकता है. राजन का कहना है कि अमेरिका के सिलिकॉन वैली बैंक, सिग्नेचर बैंक और यूरोप के क्रेडिट स्विस के चलते शुरू हुए वैश्विक बैंकिंग संकट का असर आगे भी देखने को मिल सकता है. उन्होंने वैश्विक बैंकिंग सेक्टर में और बड़े उथल-पुथल की चेतावनी दी है.  

कुछ भी हो सकता है
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कॉटलैंड के ग्लासगो में एक इंटरव्यू के दौरान पूर्व RBI गवर्नर और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि  सिलिकॉन वैली बैंक और क्रेडिट सुइस के रेस्क्यू के बाद बैंकिंग प्रणाली अधिक उथल-पुथल की ओर बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि एक दशक में केंद्रीय बैंकों से नकदी की बाढ़ सहित कई कारणों ने वित्तीय प्रणाली के भीतर नाजुकता पैदा कर दी है, क्योंकि नीति निर्माताओं ने नीति को कड़ा कर दिया है. राजन ने कहा कि मैं अच्छे की उम्मीद करता हूं, लेकिन कुछ भी हो सकता है. क्योंकि हमने जो कुछ देखा वह अप्रत्याशित था. 

2005 में भी चेताया था
पूर्व RBI गवर्नर ने कहा कि चिंता यह है कि लंबी अवधि के लिए बहुत आसानी से पैसे की उपलब्धता और अधिक नकदी गलत प्रोत्साहन और स्ट्रक्चर बनाती है, जो सब कुछ उलटने पर नाजुक हो जाती है. राजन ने अपनी चेतावनी से एक तरह से स्पष्ट किया है कि सिलिकॉन वैली बैंक और क्रेडिट सुइस संकट वित्तीय प्रणाली में गहरी समस्याओं का संकेत है. बता दें कि 2005 में IMF के मुख्य अर्थशास्त्री रहते हुए राजन ने बैंकिंग सेक्टर को लेकर चेतावनी दी थी, जो बाद में वैश्विक आर्थिक संकट के रूप में सामने आई. राजन अब यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर हैं. 

इधर, छंटनी की तैयारी
उधर, यूरोप के क्रेडिट सुइस (Credit Suiss) को टेकओवर करने वाले UBS ने छंटनी की योजना बनाई है. UBS बड़े पैमाने पर Credit Suiss के स्टाफ में कटौती कर सकता है. इसके तहत कम से कम 20 से 30 कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है. UBS टेक ओवर पूरा होने के बाद क्रेडिट सुइस के 25000 से 36000 कर्मचारियों को जॉब से बाहर निकाला जा सकता है. यूबीएस द्वारा की जाने वाली इस छंटनी के चलते अकेले स्विट्जरलैंड में 11,000 स्टाफ की नौकरी जा सकती है. हालांकि, अभी तक यूबीएस द्वारा छंटनी के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है. विलय से पहले यूबीएस में स्टाफ की संख्या 72000 और Credit Suisse में 50,000 से अधिक है. गौरतलब है कि यूबीएस स्विजरलैंड के सबसे प्रमुख बैंकों में से एक है.  

167 साल पुराना है बैंक 
स्विट्जरलैंड के UBS समूह ने आर्थिक मुश्किलों में घिरे क्रेडिट सुइस बैंक को 3.23 अरब डॉलर में खरीद रहा है. यह पूरा सौदा शेयरों पर आधारित है, इसके तहत क्रेडिट सुइस के शेयरधारकों को 22.48 शेयरों के बदले यूबीएस का एक शेयर मिलने जा रहा है. करीब 167 साल पुराना क्रेडिट सुइस बैंक स्विट्जरलैंड का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है. मालूम हो कि ग्लोबल बैंकिंग संकट (Global Banking Crisis) की शुरुआत अमेरिका से हुई है. यूएस के सिलिकॉन वैली बैंक और सिग्नेचर बैंक भी डूब गए हैं. 

भारत में क्या होगा?
UBS के फैसले को लेकर आ रही खबरों से भारत में क्रेडिट सुइस के कर्मचारी बेचैन हैं. बैंक के भारत में करीब 15 हजार कर्मचारी हैं, जिसमें से 5 से 7 हजार बैंक के डायरेक्शन ऑपरेशन से जुड़े हैं. जबकि बाकी बैंक के ग्लोबल आईटी ऑपरेशन से ताल्लुख रखते हैं. इस स्विस बैंक के छह भारतीय शहरों में ऑफिस हैं. इसमें मुंबई, पुणे, गुरुग्राम, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता शामिल हैं. बैंक के मुंबई, पुणे और गुरुग्राम ऑफिस के कर्मचारी सीधे तौर पर बैंक के दिन-प्रतिदिन के कामकाज से जुड़े हुए हैं.  

ऐसी है UBS की स्थिति
क्रेडिट सुइस के पास भारत में धन प्रबंधन, निवेश बैंकिंग और ब्रोकरेज सेवाओं का लाइसेंस है. यह शेयरों के ऐवज में व्यवसायों को फंडिंग देने के मामले में भी बहुत सक्रिय है. मार्च 2022 तक, स्विस लेंडर के पास भारत में 2,800 करोड़ रुपए का डिपॉजिट बेस था. हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं है कि UBS भारत में क्रेडिट सुइस के ऑपरेशन को जारी रखेगा या नहीं. भारत में यूबीएस का ऑपरेशन बहुत छोटा रहा है, बैंक ने 2013 में देश में अपनी एकमात्र शाखा बंद कर दी थी. इसके बाद इसने एक नकद इक्विटी व्यवसाय चलाया जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को पार्टिसिपेटरी नोट्स के माध्यम से देश में लेनदेन करने की अनुमति मिली.
 


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