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400 पार का नारा जनता ने क्यों नकारा, सामने आ गई असली वजह 

भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियां भी मिलकर 400 सीटें हासिल नहीं कर पाई हैं. प्रशांत किशोर ने इसकी वजह बताई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) में 400 का नारा देने वाली भाजपा को करारा झटका लगा है. पार्टी अकेले 400 सीटें जीतने की बात कर रही थी और उसके पूरे गठबंधन को भी इतनी सीटें नसीब नहीं हुई हैं. भले ही भाजपा के नेतृत्व वाला NDA सरकार बनाने जा रहा है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर भाजपा के प्रदर्शन ने आलाकमान को सोच में डाल दिया है. सियासी पंडित और जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) भाजपा के इस प्रदर्शन के पीछे की सच्चाई बताने की कोशिश की है. हालांकि, ये बात अलग है कि चुनावी नतीजों से पूर्व PK भी यह मान रहे थे कि भाजपा आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी. 

कमजोर प्रत्याशी उतारे 
प्रशांत किशोर के मुताबिक, भाजपा यह मानकर चल रही थी कि हम तो जीतेंगे ही जीतेंगे. BJP के 208 पुराने सांसद जीतकर आए हैं, लेकिन जहां बिना उम्मीदवार देखे किसी को भी टिकट दे दिया गया, वहां पार्टी को शिकस्त मिली. खासतौर पर पश्चिम बंगाल, बिहार आदि में प्रत्याशियों का चुनाव ठीक नहीं रहा. भाजपा को सब पता था, उसके इंटरनल सर्वे में भी सामने आया था कि कौन से उम्मीदवार हार रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मैदान में उतारा गया. क्योंकि पार्टी यह मान बैठी थी कि पीएम मोदी की रैली होगी तो जीत मिल ही जाएगी.

अधूरा था 400 पार का नारा
एक मीडिया हाउस से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि जिसने भी 400 पार का नारा लिखा, उसने आधा लिखा. 400 पार की वजह नहीं बताई गई. जबकि 2014 में नारा लिखा गया था कि बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी मोदी सरकार. तब स्पष्ट था कि महंगाई कम करने के लिए मोदी सरकार चाहिए. 400 पार से कुछ लोगों को लगा कि यह एरोगेंस है. वहीं कुछ ने इसे कॉन्सपिरेंसी माना और विपक्ष ने इसे यह कहकर भुनाया कि ये संविधान बदल देंगे. 400 पार का नारा आने के बाद बीजेपी के कुछ नेताओं ने कह दिया कि संविधान बदलने के लिए 400 से ज्यादा सीटें चाहिए. इससे हर जगह पार्टी को नुकसान हुआ.

मोदी पर अधिक निर्भरता
भाजपा की कमजोर कड़ी पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी पर अत्यधिक निर्भरता ही BJP को कमजोर कर रही है. PK के अनुसार, मोदी पर अत्यधिक निर्भरता से यह हुआ कि बीजेपी कार्यकर्ता ने कहा कि 400 सीटें तो आ ही रही हैं, मुझे अपने कैंडिडेट को सबक सिखाना है. बिहार में जब आप आरके सिंह के बारे में किसी से पूछेंगे तो वे कहेंगे कि इन्होंने बहुत अच्छा काम किया है, लेकिन कार्यकर्ता नाराज थे क्योंकि वे कि उन्हें भाव नहीं देते थे. भाजपा समर्थकों को लगने लगा था कि 400 पार तो हो ही रहा है, तो क्या करना है. 

जीत का अंतर हुआ कम
प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि जो भाजपा और मोदी का विरोध कर रहे थे, उनके पास BJP को रोकने का उद्देश्य. उदाहरण के तौर पर वाराणसी सीट पर पीएम मोदी का वोट शेयर साल 2014 के मुकाबले केवल 2% ही कम हुआ, लेकिन जीत का मार्जिन काफी नीचे आ गया. जबकि विपक्ष का वोट प्रतिशत 20% से 41% पर पहुंच गया. मोदी ने गठबंधन उम्मीदवार अजय राय को डेढ़ लाख वोटों से हराया है, जबकि पिछले चुनाव में मोदी ने करीब चार लाख 80 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी.


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