होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / नेताजी का असली परिचय: याद तो बहुत आएंगे...जब भी दोस्ती की बात होगी

नेताजी का असली परिचय: याद तो बहुत आएंगे...जब भी दोस्ती की बात होगी

जिससे नेताजी दो-तीन बार मिल लिए और अगर कभी वो कहीं फंस गया तो उसकी सहायता पक्की.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अकु श्रीवास्तव
(संपादक, नवोदय टाइम्स)

नेताजी का जाना दोस्ती शब्द को नए आयाम देने वाले नेता के रूप में हमेशा ज्यादा और बड़ा रहेगा. न जाने कितने सुदामा मित्रों को मुलायम सिंह ने पहचान दी, रुतबा दिया, पद दिया और वक्त जरूरत पर लक्ष्मी जी की कृपा भी कराई. आप मुलायम सिंह यादव को एक जमीनी नेता कह सकते हैं. आप उन्हें कुछ क्रांतिकारी कदमों के लिए याद कर सकते हैं.

गरीबों की जरूर करते थे मदद
आप उन्हें लोकतंत्र का नायक भी कह सकते हैं. आप उन्हें यदुवंशियों की अस्मिता को उच्चतम स्तर पर ले जाने वाला कह सकते हैं, लेकिन सच तो यह है कि उन्हें आज से पचास साल बाद भी जब तक उन्हें जानने वाला एक समर्थक, सैफई ऐसे कई गांवों से जुड़ाव रखने वाला रामलाल, रामपाल या राजाराम जिंदा रहेगा तब तक वो बताता रहेगा कि नेताजी ने उनके साथ जो भला किया, घर की कम से कम एकाध पीढ़ी तो नहीं कर पाएगी. यानी जिससे नेताजी दो-तीन बार मिल लिए और अगर कभी वो कहीं फंस गया तो उसकी सहायता पक्की. गरीब हो तो और पक्की. थोड़ा बहुत दोस्त हो तो हर बार पुराने परिचय को याद दिलाने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह थी कि समाज के किसी भी क्षेत्र में उनके दोस्त मिल जाएंगे. राजनीति के कट्टर दुश्मन भी उनके दोस्त हो सकते हैं और रहे. जिन पत्रकारों ने थोड़ा बहुत भी फील्ड में काम किया, वो अपने को उनका मित्र होने का दावा कर सकते थे और जरूरत पड़ी तो उन्होंने उसको निभाया भी.

हाथ को दबा कर पूछ लेते- सब ठीक?
साल, दो साल, पांच साल आप न भी मिलें तो भी जब मिलते, शायद सबके हाथ को दबा कर पूछ लेते- सब ठीक? और अगर आपने कुछ कह दिया तो जाते वक्त उनकी आंखें आपको ढूंढ़ रही होती थीं और कई बार ऐसा भी हुआ कि उनकी कार में उनके/उनकी प्रमुख सचिव, जो उनके साथ कार में बैठने के लिए साथ-साथ रहते थे/थीं, उनको वो कार से हटा देते और कहते आप दूसरी कार में आओ और यह हमारे साथ जाएंगे. वापसी के दौरान कार में घर पहुंचने के पहले "मित्र" की बात सुनते और कार से उतरते ही अपने उसे दिन के ड्यूटी अफसर को पर्याप्त निर्देश दे देते और साफ कहते जब काम हो जाए तो उन्हें बताया जाए. घर में जीवन, मरण या खुशी के मौके पर उनका फोन आना सामान्य बात रहती रही है. कोई और जरूरत हो तो बताना, उनका दूसरा वाक्य होता.

राजनीति में अपने दल में उन्होंने दूसरी पंक्ति खड़ी की और उसे पर्याप्त सम्मान दिया. जनेश्वर मिश्र, मोहन सिंह, बेनी प्रसाद वर्मा आदि इसके बड़े उदाहरण रहे और उन्होंने दल के लिए तीसरी पंक्ति की लंबी चौड़ी फौज तैयार की.

निंदक उनको अपने तरीके से याद कर सकते हैं. राजनैतिक विरोधियों में एक भी ऐसा मिलना मुश्किल है, जिसकी जरूरत पर उन्होंने मदद न की हो. 

याद तो आएंगे नेताजी..जब भी दोस्ती की बात होगी. 

(रेखांकन- साभार मनोज सिंहा)
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago

3C फ्रेमवर्क से बंगाल की आर्थिक पुनर्बहाली को मिलेगी नई दिशा

बंगाल की चुनौती संसाधनों की कमी नहीं है. वास्तविक समस्या यह है कि राज्य अपनी मौजूदा संपत्तियों को एक प्रभावी आर्थिक रणनीति में बदलने में विफल रहा है.

22 hours ago

भारत-जापान साझेदारी और मानव-केंद्रित एआई का भविष्य

प्रोफेसर सी. राज कुमार लिखते हैं, 'भारत और जापान एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां वे AI के लिए चौथा और मौलिक मार्ग विकसित कर सकते हैं.

5 days ago

ईरान को ‘अनफ्रीज’ करना: असली चुनौती अब शुरू होगी

सिद्धार्थ अरोड़ा लिखते हैं, 'अमेरिका-ईरान शांति समझौता अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और रिपोर्टों के अनुसार 60 दिनों की अवधि में लगभग 24 अरब डॉलर जारी किए जा सकते हैं. ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यह पैसा जब ईरान पहुंचेगा, तब उसका क्या होगा?'

6 days ago

2026 की तीसरी तिमाही का ज्योतिष: एआई, संघर्ष और वैश्विक परिवर्तन

ज्योतिषाचार्य विक्रम चन्दीरमानी लिखते हैं कि 2026 के पहले छह महीनों के दौरान इनमें से कई विषय पहले ही उभरने लगे हैं. प्रौद्योगिकी कंपनियों के मूल्यांकन को लेकर चिंताएँ लगातार अधिक स्पष्ट होती जा रही हैं. यह चिंता केवल AI से जुड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की कुछ सबसे मूल्यवान निजी कंपनियों, जैसे स्पेसएक्स, के उच्च मूल्यांकन को लेकर भी देखी जा रही है.

1 week ago


बड़ी खबरें

₹860 करोड़ का कोहिनूर सौदा, राज ठाकरे की चुप्पी

एक राजनेता एक रियल एस्टेट सौदे में प्रवेश करता है. एक सरकारी संस्था से जुड़ी वित्तीय कंपनी ₹225 करोड़ का निवेश करती है. फिर वही संस्था ₹135 करोड़ के नुकसान के साथ उस सौदे से बाहर निकलती है.

15 hours ago

मिडिल ईस्ट प्रैक्टिस के लिए प्राइमस पार्टनर्स ने मोहन दोईफोडे को बनाया MD

पूर्व डेलॉइट कंसल्टिंग लीडर GCC क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और क्लाइंट संबंधों को देंगे नई दिशा

15 hours ago

GDP से आगे: क्यों भारत की प्रगति का पैमाना सिर्फ आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि खुशहाली और जीवन गुणवत्ता भी होना चाहिए

पूर्व उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव और लेखक आलोक रंजन का मानना है कि भारत की विकास यात्रा को केवल आर्थिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए. उनके अनुसार, खुशहाली, जीवन की गुणवत्ता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समावेशी विकास को भी प्रगति का महत्वपूर्ण पैमाना बनाया जाना चाहिए.

20 hours ago

Truhome Finance को 3,000 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए सेबी की मंजूरी

कंपनी के कुल एयूएम में 57.37 प्रतिशत हिस्सा हाउसिंग लोन का है, जबकि 39.22 प्रतिशत हिस्सा लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी का है. अन्य ऋण उत्पादों की हिस्सेदारी 3.41 प्रतिशत है.

16 hours ago

दुनिया ने बनाया युवा संस्कृति का संग्रहालय, भारत को चाहिए ऐसे दर्जनों संग्रहालय

इस संग्रहालय को अलग बनाने वाली बात इसकी वस्तुओं को संग्रहित करने की सोच है. टीम अपने दृष्टिकोण को "बॉटम-अप क्यूरेशन" कहती है, जिसे जानबूझकर हस्तनिर्मित रखा गया है.

16 hours ago