होम / बिजनेस / विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय करेंसी बाजार में निवेश हुआ आसान, RBI ने हटाईं पाबंदियां

विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय करेंसी बाजार में निवेश हुआ आसान, RBI ने हटाईं पाबंदियां

RBI का यह फैसला भारतीय करेंसी मार्केट के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे निवेश बढ़ने, बाजार में स्थिरता आने और रुपए की वैश्विक पहचान मजबूत होने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपए के कारोबार को अधिक उदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. ऑफशोर डेरिवेटिव्स से जुड़े कई प्रतिबंध हटाकर केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को और आकर्षक बना दिया है. इस फैसले से न सिर्फ रुपए की तरलता बढ़ेगी बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय उपयोग को भी मजबूती मिलेगी.

ऑफशोर डेरिवेटिव्स पर ढील

RBI ने ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) मार्केट में ट्रेडिंग से जुड़े कुछ कड़े नियमों को वापस ले लिया है. अब अधिकृत डीलर रुपए से जुड़े डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को केवल चुनिंदा यूजर्स तक सीमित नहीं रखेंगे. इससे बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और ट्रेडिंग ज्यादा आसान होगी.

निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

नए नियमों के तहत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय करेंसी मार्केट में एंट्री और ऑपरेशन दोनों सरल हो जाएंगे. साथ ही, यूजर्स को कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने की अनुमति भी मिलेगी, जिससे हेजिंग और रिस्क मैनेजमेंट आसान होगा.

हालांकि RBI ने पूरी तरह छूट नहीं दी है. रजिस्टर्ड डीलर्स को संबंधित पक्षों के साथ रुपए आधारित डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी. छूट केवल मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के कैंसलेशन, रोलओवर और अनिवासी यूजर्स के साथ बैक-टू-बैक ट्रांजेक्शन तक सीमित है.

मार्च में लगाए गए थे कड़े कदम

गौरतलब है कि मार्च में RBI ने रुपए में तेज गिरावट और वैश्विक अस्थिरता के चलते सख्त कदम उठाए थे. उस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था.

केंद्रीय बैंक ने तब ऑफशोर बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए पाबंदियां लगाई थीं. इन कदमों के चलते बैंकों ने बड़ी मात्रा में सट्टा सौदे बंद किए, जिससे रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से संभलने में सफल रहा.

रुपए के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर

RBI ने साफ किया है कि ये कदम बाजार को गहरा और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में उठाए गए हैं. केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रुपए को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी भूमिका बढ़ाना है.

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

16 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

17 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

18 hours ago

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

19 hours ago

पावर प्लांट्स में सिर्फ 9 दिन का कोयला, 42% घटा स्टॉक; लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी चुनौती

बिजली की बढ़ती मांग और परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का दबाव बढ़ा, 190 में से 51 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

20 hours ago


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

19 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

16 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

17 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

18 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

1 day ago