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विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय करेंसी बाजार में निवेश हुआ आसान, RBI ने हटाईं पाबंदियां

RBI का यह फैसला भारतीय करेंसी मार्केट के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे निवेश बढ़ने, बाजार में स्थिरता आने और रुपए की वैश्विक पहचान मजबूत होने की उम्मीद है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपए के कारोबार को अधिक उदार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. ऑफशोर डेरिवेटिव्स से जुड़े कई प्रतिबंध हटाकर केंद्रीय बैंक ने विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार को और आकर्षक बना दिया है. इस फैसले से न सिर्फ रुपए की तरलता बढ़ेगी बल्कि इसके अंतरराष्ट्रीय उपयोग को भी मजबूती मिलेगी.

ऑफशोर डेरिवेटिव्स पर ढील

RBI ने ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) मार्केट में ट्रेडिंग से जुड़े कुछ कड़े नियमों को वापस ले लिया है. अब अधिकृत डीलर रुपए से जुड़े डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को केवल चुनिंदा यूजर्स तक सीमित नहीं रखेंगे. इससे बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और ट्रेडिंग ज्यादा आसान होगी.

निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

नए नियमों के तहत विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय करेंसी मार्केट में एंट्री और ऑपरेशन दोनों सरल हो जाएंगे. साथ ही, यूजर्स को कॉन्ट्रैक्ट दोबारा बुक करने की अनुमति भी मिलेगी, जिससे हेजिंग और रिस्क मैनेजमेंट आसान होगा.

हालांकि RBI ने पूरी तरह छूट नहीं दी है. रजिस्टर्ड डीलर्स को संबंधित पक्षों के साथ रुपए आधारित डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी. छूट केवल मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स के कैंसलेशन, रोलओवर और अनिवासी यूजर्स के साथ बैक-टू-बैक ट्रांजेक्शन तक सीमित है.

मार्च में लगाए गए थे कड़े कदम

गौरतलब है कि मार्च में RBI ने रुपए में तेज गिरावट और वैश्विक अस्थिरता के चलते सख्त कदम उठाए थे. उस समय ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था.

केंद्रीय बैंक ने तब ऑफशोर बाजार में बढ़ती सट्टेबाजी को नियंत्रित करने के लिए पाबंदियां लगाई थीं. इन कदमों के चलते बैंकों ने बड़ी मात्रा में सट्टा सौदे बंद किए, जिससे रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर से संभलने में सफल रहा.

रुपए के अंतरराष्ट्रीयकरण पर जोर

RBI ने साफ किया है कि ये कदम बाजार को गहरा और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में उठाए गए हैं. केंद्रीय बैंक का लक्ष्य रुपए को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इसकी भूमिका बढ़ाना है.

 


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