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McKinsey रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारत के लोगों के पास अमीर बनने के लिए हैं सिर्फ 33 साल
जनसंख्या बदलाव से चुनौतियां बढ़ रही हैं, जिससे आर्थिक विकास और सरकारी वित्त पर दबाव है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एक नई McKinsey रिपोर्ट ने भारत की जनसंख्या की स्थिति पर चिंता जताई है. इसमें चेतावनी दी गई है कि भारत के पास केवल 33 साल हैं—यानी एक पीढ़ी का समय—जिसके बाद उसकी आबादी का वृद्ध होने का स्तर आज की उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के बराबर हो जाएगा. रिपोर्ट बताती है कि भारत को तेजी से आर्थिक विकास करना होगा ताकि वह "बूढ़ा होने से पहले अमीर" बन सके, क्योंकि उसकी आबादी उम्मीद से तेज़ी से बूढ़ी हो रही है.
भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़ रहा है, लेकिन यह अभी भी उच्च-आय वाले देशों के स्तर का केवल 18% है. यह एक बड़ी चुनौती है, खासकर देश के जनसंख्या रुझानों को देखते हुए. रिपोर्ट बताती है कि भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.98 बच्चे प्रति महिला हो गई है, जो 2.1 के प्रतिस्थापन दर से कम है. संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि भारत की जनसंख्या 2061 में 1.7 अरब पर पहुंचकर चरम पर होगी और फिर घटने लगेगी.
वृद्ध होती जनसंख्या भारत के आर्थिक विकास को धीमा कर देगी. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के जनसांख्यिकीय लाभ में तेज गिरावट आएगी. 1997 से 2023 तक, भारत की अनुकूल जनसंख्या ने प्रति व्यक्ति जीडीपी वृद्धि में हर साल 0.7 प्रतिशत अंक का योगदान दिया. लेकिन 2050 तक यह लाभ घटकर सालाना केवल 0.2 प्रतिशत अंक रह जाएगा.
जैसे-जैसे भारत की आबादी बूढ़ी होगी, सरकारी वित्त और परिवारों पर दबाव बढ़ेगा. 2050 तक हर बुजुर्ग के लिए केवल 4.6 कामकाजी उम्र के लोग होंगे, जो आज 10 हैं. 2100 तक यह अनुपात 1.9 पर आ जाएगा, जो जापान की मौजूदा स्थिति जैसी होगी. इससे सरकार के बजट और परिवारों की बुजुर्गों का समर्थन करने की क्षमता पर और दबाव पड़ेगा.
रिपोर्ट बताती है कि इन चुनौतियों को कुछ हद तक कम करने के लिए भारत महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी बढ़ा सकता है. 20-49 साल की महिलाओं में यह भागीदारी सिर्फ 29% है, जबकि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में यह 50-70% है. कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से बूढ़ी होती आबादी के आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिल सकती है.
भारत अपनी बढ़ती वैश्विक महत्वता से भी फायदा उठा सकता है. अभी यह दुनिया के कुल उपभोग का 9% है, लेकिन 2050 तक यह बढ़कर 16% हो सकता है, जिससे भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाएगा. McKinsey रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि भारत को नीति में बदलाव और संरचनात्मक सुधार करने की ज़रूरत है ताकि वह अपनी जनसांख्यिकीय बढ़त का पूरा लाभ उठा सके, इससे पहले कि बूढ़ी होती आबादी के कारण आर्थिक दबाव शुरू हो जाए.
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