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Gossip & Tales: माधबी पुरी बुच को किया गया दिल्ली तलब, क्या सरकार उठा सकती है बड़ा कदम?

सूत्रों का कहना है कि सरकार सोच रही है कि बुक से पद छोड़ने के लिए कहा जाए या नहीं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

US शॉर्ट सेलर हिंडेनबर्ग की रिपोर्ट के बाद SEBI प्रमुख माधबी पुरी बुक को नई दिल्ली बुलाया गया. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा और वित्त मंत्री से मुलाकात की. दरअसल, 11 अगस्त को हिंडेनबर्ग ने भारत पर अपनी दूसरी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें SEBI प्रमुख पर कई आरोप लगाए गए हैं. नई दिल्ली में चर्चा है कि अगर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचता है और सुप्रीम कोर्ट जांच के लिए एक समिति गठित करता है, जैसा कि जनवरी 2023 में अडानी ग्रुप पर पहली हिंडेनबर्ग रिपोर्ट के बाद किया था, तो बुच को अस्थायी रूप से अपने पद से हटने के लिए कहा जा सकता है.

पिछले 10 वर्षों में, नरेंद्र मोदी की सरकार ने बहुत ही कम बार किसी नियामक प्रमुख को उनके कार्यकाल के समाप्त होने से पहले हटाया है. बुच का तीन साल का कार्यकाल मार्च 2025 में समाप्त होगा, लेकिन सरकार के भीतर यह राय है कि वर्तमान में SEBI प्रमुख पर लगे टकराव के आरोपों और नकारात्मक खबरों के चलते, बुच का पद पर बने रहना बहुत लंबा हो सकता है. अगर संभावित सुप्रीम कोर्ट जांच समिति बुक के कार्यकाल के दौरान कोई गंभीर रिपोर्ट देती है, तो इससे सरकार की भी बदनामी हो सकती है, खासकर अगर सरकार ने उन्हें समर्थन दिया.

ब्लैकस्टोन भी बना चिंता का कारण

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में ब्लैकस्टोन से जुड़ा आरोप सरकार को चिंतित कर रहा है. हिंडेनबर्ग के अनुसार, SEBI प्रमुख REIT (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) को बढ़ावा दे रही थीं और उन्होंने इसे अपनी पसंदीदा चीजों में से एक घोषित किया था. इस दौरान, उनके पति को अमेरिका के सबसे बड़े फंड मैनेजर्स में से एक ब्लैकस्टोन ने सलाहकार के रूप में नियुक्त किया था, जिसका REITs में बड़ा निवेश था. हिंडनबर्ग का कहना है कि बुक के कार्यकाल के दौरान SEBI की नीतियां इतनी सहायक थीं कि ब्लैकस्टोन ने REIT उत्पादों से 7100 करोड़ रुपये से अधिक निकाल लिए, जबकि उनके पति धवल बुक ब्लैकस्टोन के साथ काम कर रहे थे. दिलचस्प बात यह है कि धवल बुच का फंड मैनेजमेंट या रियल-एस्टेट में कोई अनुभव नहीं था, क्योंकि उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर के सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट विभाग में काम किया था. फिर भी, हिंडनबर्ग का आरोप है कि ब्लैकस्टोन ने बुक को सलाहकार के रूप में नियुक्त किया ताकि SEBI प्रमुख को प्रभावित किया जा सके.

अडानी मुद्दा

SEBI प्रमुख का कहना है कि उन्होंने 22 मार्च 2017 को, SEBI में पूरी तरह से शामिल होने से पहले, IIFL वेल्थ द्वारा चलाए जा रहे मॉरीशस आधारित ग्लोबल डायनैमिक ऑपर्चुनिटीज फंड में अपनी लगभग 7 करोड़ रुपये की निवेश की हिस्सेदारी छोड़ दी थी. इसके अलावा, फंड ने स्पष्ट किया है कि उसने अडानी कंपनियों के किसी भी उपकरण में निवेश नहीं किया था. हिंडनबर्ग का कहना है (प्राइवेट ईमेल पत्राचार के अनुसार) कि धवल बुच ने इन निवेशों को फरवरी 2018 तक रखा, बुच को अप्रैल 2022 में SEBI प्रमुख नियुक्त किया गया था. हिंडनबर्ग का कहना है कि IIFL वेल्थ द्वारा बनाए गए इसी संरचना का उपयोग गौतम अडानी के भाई विनोद अडानी ने टैक्स हेवन्स में फंड मूव करने और भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के लिए किया. इसलिए, हिंडनबर्ग का कहना है कि जब SEBI अडानी ग्रुप की विभिन्न उल्लंघनों की जांच कर रही थी, तब SEBI प्रमुख ने खुद को जांच से अलग नहीं किया, जिससे टकराव का मुद्दा उठता है.

अन्य आरोप अब तक प्रभावी नहीं लगे हैं, क्योंकि हिंडनबर्ग SEBI प्रमुख के खिलाफ किसी भी आपराधिक इरादे या पैसे की तस्करी, रिश्वत या किसी अन्य दुष्कर्म को साबित करने में विफल रही है. इसके अलावा, हिंडनबर्ग को जनवरी 2023 में अपनी पिछली रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले शॉर्ट सेलिंग गतिविधियों और फ्रंट रनिंग में शामिल होने के लिए SEBI से एक शो-कॉज नोटिस भी मिला है.

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).
 


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