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यूं ही गौतम अडानी नहीं बन गये दुनिया के दूसरे सबसे रईस! समझिए उनकी रणनीति

अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के नजरिये से देखेंगे तो पाएंगे कि गौतम अडानी की सूझबूझ और भविष्य को लेकर योजनाएं, दीर्घकालिक हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

अजय शुक्ला
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

मल्टी टेक्नोलॉजी कंपनी अमेजन (Amazon) के मालिक जेफ बेजोस को पछाड़ कर अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी दुनिया के दूसरे सबसे रईस शख्स बन गये हैं. ब्लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्स के मुताबिक, इस वक्त बेजोस और अडानी की संपत्ति मामूली अंतर के साथ लगभग बराबर है. अडानी समूह ने मार्केट कैप की दौड़ में टाटा समूह को पीछे छोड़ दिया है. अडानी समूह की कंपनियों का संयुक्त एम-कैप टाटा समूह के 21.04 लाख करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण के मुकाबले बढ़कर 21.14 लाख करोड़ रुपये हो गया है.

गौतम अडानी की सूझबूझ और भविष्य को लेकर योजनाएं
मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाला रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह 17.49 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ तीसरे स्थान पर आया है. मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अकेले ग्रुप के मार्केट कैप में 17 लाख करोड़ रुपये का योगदान दिया है. सामान्य नजरिये से देखेंगे तो पाएंगे कि अडानी समूह ने कुछ ऐसा नहीं किया कि वो दुनिया के दूसरे नंबर के सबसे बड़े रईस बन जाएं, मगर अर्थशास्त्र के सिद्धांतों के नजरिये से देखेंगे तो पाएंगे कि गौतम अडानी की सूझबूझ और भविष्य को लेकर योजनाएं, दीर्घकालिक हैं.

आपदा में अवसर को अपना हथियार बनाया
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिद्धांत आपदा में अवसर को अपना हथियार बनाया है. यही नहीं, वो मौका नहीं चूकते और वक्त से पहले उसका लाभ योजनाबद्ध तरीके से उठाते हैं. यही उनकी सफलता का मूल मंत्र है. उन्होंने नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भरता के सिद्धांत को भी पकड़ा है. यही कारण है कि उन्होंने किसी देशी कंपनी से कोई मदद नहीं ली बल्कि नीति निर्धारकों को अपनी मुट्ठी में करके आगे बढ़ गये, जो बाजार पर काबू करने का सबसे बेहतर तरीका रहा.

वे सीमेंट उद्योग पर एकाधिकार
आलोचना आसान है मगर उसके बीच सफलताओं को अपने कदमों में लाकर रखना कठिन. हमें इस बात का पता है कि अंबुजा और एसीसी के चेयरमैन बनने के बाद अडानी ने इंडिया सीमेंट और नुवोको विस्टास के अधिग्रहण की तैयारी कर ली है. जल्द ही वे सीमेंट उद्योग पर एकाधिकार कर देश के सबसे बड़े सीमेंट कारोबारी बन जाएंगे. इस एकाधिकार के बाद बाजार में सीमेंट के दाम तय करने की क्षमता अडानी के पास होगी.

कोई बड़ी मुनाफे वाली नहीं हैं अडानी की कंपनी
अडानी समूह की कोई भी कंपनी दुनिया क्या देश में भी कोई बड़ी मुनाफे वाली नहीं हैं. बावजूद इसके, अपनी बाजारू रणनीति के बूते वो सबसे आगे हैं. अडानी की कम्पनीज के पीई रेशियो (प्राइस टू अर्निंग रेशियो) देखकर आप हैरान रह जाएंगे. अडानी ट्रांसमिशन का पीई रेशियो नेगेटिव में दस हजार से भी ज्यादा है. यानी कंपनी नुकसान में है, फिर भी उस कंपनी के शेयर का मार्केट आसमान छू रहा है. किसी शेयर की वैल्यू देखने का सबसे भरोसेमंद पैरामीटर पीई रेशियो ही होता है, मगर कुछ विशेषज्ञ प्राइस टू बुक वैल्यू को भी भरोसेमंद पैरामीटर मानते हैं.

पीई रेशियो डरावने लगते हैं
अडानी की सभी कंपनियों की पीई रेशियो को देखें तो डरावने लगते हैं. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अगर 2024 में देश की सरकार बदली तो अडानी के शेयर्स बाजार को भारी नुकसान पहुंचाएंगे. इससे आप समझ सकते हैं कि अडानी समूह की बाजारू रणनीति अचूक और वक्त से पहले मार करने वाली है. इसके कारण ही उनके शेयर मुनाफा कमा रहे हैं और निवेशकों को लाभ दे रहे हैं.

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