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मोदी सरकार में गेमिंग इडस्ट्री को मिली छूट, अब दुनिया पर छाएगा भारत, जानिए कैसे?

‘डिज़ाइन इन इंडिया, डिज़ाइन फॉर द वर्ल्ड’ का नारा, भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को विश्व स्तरीय गेमिंग उत्पादों में बदलने की एक पहल है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अगस्त 2024 के अपने 78वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ग्लोबल गेमिंग इडस्ट्री में अग्रणी बनाने के लिए एक विजन प्रस्तुत किया. उनकी सोच "डिज़ाइन इन इंडिया, डिज़ाइन फॉर द वर्ल्ड" देश के युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विरासत का उपयोग कर इनोवेटिव और विश्वस्तरीय गेमिंग प्रोडक्ट्स बनाने के लिए प्रेरित करती है. इस पहल का उद्देश्य भारत की स्वदेशी क्षमताओं पर गर्व करना और देश को क्रिएटिव इंडस्ट्री में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करना है. 

प्राइमस पार्टनर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ऑनलाइन गेमिंग मार्केट का रेवेन्यू FY2029 तक 2.4 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, और 2019 से 2022 के बीच यह GDP में 27.5% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दिखा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस क्षेत्र में वुमन वर्कफोर्स का विस्तार कुल वर्कफोर्स वृद्धि से अधिक तेज़ी से हुआ है, जिसमें 103.15% की वार्षिक वृद्धि दर देखी गई. यह प्रवृत्ति न केवल उद्योग के तेज़ विकास को दर्शाती है, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और लैंगिक विविधता को भी रेखांकित करती है.

गेमिंग, AVGC (एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. 2026 तक, भारत में AVGC सेक्टर के कुल रेवेन्यू में ऑनलाइन गेमिंग का योगदान 68% तक होने की उम्मीद है. अपनी प्राचीन संस्कृति और साहित्यिक धरोहर के कारण, भारत AVGC क्षेत्र में आधुनिक इनोवेशन के लिए अनूठे रूप से सक्षम है. प्रधानमंत्री का यह विजन युवाओं को प्रेरित करता है कि वे अपनी क्रिएटिविटी का उपयोग कर ऐसे उत्पाद डिज़ाइन करें, जो न केवल घरेलू ज़रूरतों को पूरा करें, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बनाएं.

भारत अपने मूल्यों और कथाओं पर आधारित गेम्स बनाकर दुनिया को एक नया दृष्टिकोण दे सकता है. यह पहल आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, नई नौकरियां पैदा करेगी और इनोवेशन को प्रोत्साहित करेगी. भारतीय संस्कृति को दर्शाने वाले गेम्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की रचनात्मक क्षमता और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण बन सकते हैं. इसके अलावा, ये गेम्स सांस्कृतिक राजदूत के रूप में काम करेंगे, भारत की समृद्ध और विविध विरासत को वैश्विक दर्शकों के सामने लाएंगे. यह सांस्कृतिक निर्यात न केवल भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी प्रशंसा बढ़ाएगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की छवि और प्रभाव को भी मजबूत करेगा. 

दुनिया के लोकप्रिय गेम "एज ऑफ एम्पायर्स" ने अलग-अलग ऐतिहासिक युगों को दिखाकर विश्वभर में लोकप्रियता हासिल की. भारतीय गेम डेवलपर्स इस दृष्टिकोण से प्रेरणा ले सकते हैं और भारत के विभिन्न ऐतिहासिक युगों, जैसे अशोकन काल से लेकर मुगल युग तक, को दर्शाने वाले गेम्स बना सकते हैं. प्रधानमंत्री मोदी का यह दृष्टिकोण भारतीय गेमिंग को केवल वैश्विक बाजार में भागीदार बनने से कहीं आगे ले जाने का है. वे भारत को गेमिंग निर्माण और खपत दोनों में अग्रणी भूमिका में देखना चाहते हैं. 

इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) को बढ़ावा देना आवश्यक है. सही सहयोग से भारत में उच्च गुणवत्ता वाले, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक गेम्स के निर्माण के लिए जरूरी फंडिंग, संसाधन और विशेषज्ञता मिल सकेगी. सबसे महत्वपूर्ण, सहायक नीतियां और प्रोत्साहन उद्योग के विकास में तेजी ला सकते हैं. वित्तीय प्रोत्साहन जैसे टैक्स में छूट, सब्सिडी, और "डिज़ाइन इन इंडिया, डिज़ाइन फॉर द वर्ल्ड" के दृष्टिकोण के अनुरूप प्रोजेक्ट्स के लिए अनुदान भारतीय गेमिंग उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं. इस प्रकार, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर पर आधारित गेम्स के निर्माण के माध्यम से न केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत को एक वैश्विक रचनात्मक शक्ति के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और यह जरूरी नहीं है कि प्रकाशन के विचारों से मेल खाते हों.

(लेखक- डॉ. एसजी सूर्या, स्टेट सेक्रेटरी, बीजेपी तमिलनाडु)
 


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