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आधार से UPI तक: क्या दुनिया को भारत के DPI मॉडल को अपनाना चाहिए?

भारत दुनिया को एक ज्यादा समान, सबको जोड़ने वाला और समृद्ध डिजिटल भविष्य बनाने में मदद कर सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत ने हमेशा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और इनोवेशन की भावना से दुनिया को आकर्षित किया है. बॉलीवुड की बढ़ती लोकप्रियता से लेकर योग और आयुर्वेद जैसी प्राचीन पद्धतियों तक, भारत ने वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अब, अपनी तकनीकी ताकत और डिजिटल समावेशन के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, भारत दुनिया को एक और विशेषज्ञता निर्यात करने के लिए तैयार है: डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI).

यह कहानी एक ऐसे देश की है जो कभी बुनियादी ढांचे की कमी से जूझ रहा था, लेकिन अब डिजिटल क्रांति के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है. यह बदलाव दिखाता है कि भारत की डिजिटल प्रगति सिर्फ देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक नया रास्ता दिखा रही है.

सिर्फ नौ वर्षों में भारत ने डिजिटल प्रगति के पारंपरिक समय को तोड़ दिया और दशकों का विकास बहुत तेजी से पूरा कर लिया. इस अद्भुत बदलाव की नींव है DPI, जो सिर्फ तकनीकी उपकरणों का एक समूह नहीं है, बल्कि सेवाओं को विकसित करने, उन तक पहुंचने और उनका उपयोग करने का एक बिल्कुल नया तरीका है. इसमें UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), आधार, पैन, पेंशन प्लेटफॉर्म, ई-KYC, सरकारी क्लाउड और विभिन्न API नेटवर्क शामिल हैं. ये सुविधाएं जो कभी नई मानी जाती थीं, अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं. इनके कारण लेन-देन आसान हुआ है, सरकारी सेवाओं तक पहुंच सुगम हो गई है और एक मजबूत डिजिटल अर्थव्यवस्था का निर्माण हुआ है.

इस डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत बनाने और सभी को जोड़ने के लक्ष्य के साथ ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) जैसी पहल सामने आई हैं. यह प्लेटफॉर्म बड़ी टेक कंपनियों के एकाधिकार को चुनौती देता है, छोटे व्यापारियों को सशक्त बनाता है और खरीदारों व विक्रेताओं के लिए एक समान अवसर प्रदान करता है. सितंबर 2024 तक ONDC पर 10 करोड़ से अधिक लेन-देन हो चुके हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है.

भविष्य में DPI और अधिक प्रभावशाली हो सकता है, खासकर जब यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों के साथ जुड़ेगा. यह बदलाव वित्त, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी सुधार लाएगा, जिससे सेवाएं और अधिक तेजी से, आसानी से और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उपलब्ध हो सकेंगी. DPI सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नया मॉडल बन रहा है.

भारत की DPI कहानी से सीखने योग्य बातें

भारत को अलग बनाता है सिर्फ इसका बड़ा स्तर (स्केल) नहीं, बल्कि इसकी नीयत (इरादा) भी. DPI सिर्फ एक तकनीकी प्रगति नहीं है, बल्कि यह सरकार, संस्थानों और आम लोगों को जोड़ने वाला एक बहुपक्षीय ढांचा (multifaceted framework) है. भारत की सफलता कई कारणों से हुई है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है – सरकार और उद्योग (प्राइवेट सेक्टर) की साझेदारी की शक्ति और तकनीक का उपयोग सामाजिक बदलाव के लिए एक उत्प्रेरक (catalyst) के रूप में करना.

आधार, भारतनेट प्रोजेक्ट, पासपोर्ट सेवा प्रोजेक्ट (PSP) जैसे बड़े प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण हैं कि सरकार और निजी कंपनियों की साझेदारी से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं. सरकार और उद्योग की ताकत को मिलाकर, भारत ने ऐसे डिजिटल समाधान तैयार किए हैं, जो न केवल लोगों को सशक्त बनाते हैं, बल्कि देश की प्रगति में भी मदद करते हैं. उदाहरण के लिए, आधार परियोजना ने 1.3 अरब से अधिक लोगों की पहचान को डिजिटल रूप से जोड़कर उन्हें सरकारी योजनाओं और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच दिलाने में क्रांतिकारी बदलाव किया.

Protean eGov Technologies और NPCI जैसी कंपनियों ने इस डिजिटल बदलाव में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने सरकार के बड़े पैमाने पर चलने वाले डिजिटल अभियानों को सफल बनाने के लिए नई तकनीकी सेवाएं और विशेषज्ञता प्रदान की है. Protean, विशेष रूप से, कई सरकारी विभागों के साथ मिलकर कर (टैक्स) ढांचे, पैन कार्ड जारी करने और पेंशन सेवाओं के निर्माण में मदद कर रही है.

हाल ही में, इसने सरकार के Agristack प्रोजेक्ट में योगदान दिया, जिसके तहत किसानों की एक डिजिटल पहचान (Farmer ID), जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, फसल पंजीकरण और मिट्टी की सेहत के रिकॉर्ड बनाए जा रहे हैं. साथ ही, PM विद्यालक्ष्मी और विद्यसारथी प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्रों को शिक्षा ऋण (लोन) और छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) देने की प्रक्रिया को सरल और डिजिटल किया गया है, जिससे पिछले दस सालों में लाखों छात्रों को फायदा हुआ है.

NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) ने भारत में डिजिटल भुगतान (पेमेंट) प्रणाली में क्रांति ला दी है. UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), रुपे क्रेडिट कार्ड, भारत कनेक्ट और भीम ऐप के जरिए लेन-देन को आसान और लाखों लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है. इससे न केवल भारत में डिजिटल भुगतान बढ़ा है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक नया मानक (बेंचमार्क) स्थापित हुआ है.

भारत की DPI पहल (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं) सिर्फ तकनीकी विकास के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक कल्याण (social welfare) और समानता (equity) को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई हैं. उदाहरण के लिए, CoWIN प्लेटफॉर्म ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान में बड़ी भूमिका निभाई. इस प्लेटफॉर्म के जरिए 2.2 अरब (220 करोड़) से अधिक वैक्सीन डोज़ दी गईं, जिससे टीकाकरण प्रक्रिया को आसान और प्रभावी बनाया गया.

इसके अलावा, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन जैसी डिजिटल स्वास्थ्य योजनाएं (Digital Health Initiatives) स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और उनकी कार्यक्षमता को सुधार रही हैं. यह एकीकृत (unified) डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म पूरे देश के स्वास्थ्य केंद्रों को जोड़ने का काम कर रहा है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को आसानी से साझा किया जा सके और इलाज बेहतर हो.

इसी तरह, प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों ने 45 करोड़ (450 मिलियन) से अधिक भारतीयों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली (formal financial system) से जोड़ा है. इससे खासतौर पर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया है, क्योंकि अब वे बचत खाते, ऋण (लोन) और बीमा सेवाओं तक आसानी से पहुंच बना सकती हैं.

भारत की DPI (डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) यात्रा यह दिखाती है कि कैसे एक देश तकनीक का उपयोग करके बड़ी समस्याओं को हल कर सकता है और अपने नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकता है. भारत का DPI मॉडल एक परतदार (layered) प्रणाली है, जो खुले मानकों (open standards) और आपसी जुड़ाव (interoperability) पर आधारित है. यह पूरे डिजिटल सिस्टम में नए नवाचार (innovation) को बढ़ावा देता है और विभिन्न संगठनों को मिलकर डिजिटल समाधान बनाने की आज़ादी देता है.

भारत के पास DPI समाधानों को दुनिया भर में फैलाने की अपार क्षमता है. आज जब कई देश डिजिटल बदलाव के लिए भारत से सीखना चाहते हैं, तो भारत अपने मजबूत तकनीकी कौशल और शुरुआती बढ़त (early mover advantage) का उपयोग करके DPI नवाचार का वैश्विक केंद्र (global hub) बन सकता है. हमारा अनुभव साझा करना सिर्फ एक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है.  भारत दुनिया को एक अधिक समान, समावेशी और समृद्ध डिजिटल भविष्य बनाने में मदद कर सकता है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों से मेल खाते हों.

(कॉलमनिस्ट- लॉयड मैथियास, एक एंजेल निवेशक (Angel Investor) और बिजनेस रणनीतिकार (Business Strategist) हैं.)

(कॉलमनिस्ट- शैलेश हरिभक्ति, एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट, इंटरनल ऑडिटर, सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर और फ्रॉड एग्जामिनर हैं. वह भारतीय अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक नीति के प्रमुख विचारक माने जाते हैं. वह कई प्रतिष्ठित कंपनियों में बोर्ड चेयरमैन, ऑडिट कमेटी चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्यरत हैं.)
 


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