होम / एक्सपर्ट ओपिनियन / क्रेडिट, भुगतान और GST: बजट 2026 में MSME के लिए होगा निर्णायक फैसला?

क्रेडिट, भुगतान और GST: बजट 2026 में MSME के लिए होगा निर्णायक फैसला?

भारत के 7 करोड़ MSMEs के लिए 2026 का बजट बहुत महत्वपूर्ण है. वर्षों से इन्हीं समस्याओं को दोहराते रहने के बाद अब धैर्य कम हो रहा है.

गौरव भगत 3 months ago

भारत की अर्थव्यवस्था की नींव सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) से बनी है, जो देश के कुल निर्यात का 45% और जीडीपी में लगभग 30% का योगदान देते हैं. हालांकि, विडंबना यह है कि यह क्षेत्र कुछ गंभीर समस्याओं से त्रस्त है jaise फंडिंग तक आसान पहुंच की कमी, भुगतान की लंबी अवधि और एक बोझिल कर प्रणाली. बजट 2026 तेजी से करीब आ रहा है और MSME क्षेत्र तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलावों की बेसब्री से मांग कर रहा है. बजट 2025, हालांकि थोड़ा राहत देने वाला था, लेकिन जमीनी स्तर पर इन क्षेत्रों में बदलाव लाने में विफल रहा. क्या 2026 का बजट इस क्षेत्र की किस्मत बदलेगा, जो लंबे समय से समर्थन की प्रतीक्षा कर रहा है?

क्रेडिट संकट: वित्त की कमी को दूर करना
MSMEs के लिए वित्त (क्रेडिट) तक पहुंच एक बड़ी बाधा बनी हुई है. काफी सुधार के बावजूद, औपचारिक ऋण की पैठ अभी भी बहुत कम है. 2025 के नीति आयोग के अनुमान के मुताबिक, लगभग ₹80 लाख करोड़ (~$970 बिलियन) का 'क्रेडिट गैप' मौजूद है, क्योंकि MSME की केवल 19% ऋण ज़रूरतें ही औपचारिक चैनलों के माध्यमों से पूरी होती हैं. इसके कारण लाखों सक्षम छोटे व्यवसाय विकास और वर्किंग कैपिटल के लिए धन की कमी से जूझ रहे हैं. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, MSMEs को मिलने वाला बैंक ऋण लगभग 13% प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है, लेकिन इसने इस बड़े अंतर को पाटने में कोई खास मदद नहीं की है.

उच्च उधारी लागत और collateral की अनिवार्य शर्तों के कारण कई उद्यमी अभी भी ऋण के दायरे से बाहर हैं. इसीलिए कई संघों ने ब्याज में राहत और फंडिंग को आसान बनाने के तरीके सुझाए हैं. उदाहरण के लिए, FACSI ने एक ऐसे कानून की मांग की है जो ₹1 करोड़ तक के संपार्श्विक-मुक्त ऋण का मानक बनाए, जिसकी अधिकतम ब्याज दर 6-7% हो. साथ ही, क्रेडिट गारंटी योजना को मजबूत करने का सुझाव दिया है ताकि बैंक और NBFC बिना किसी डर के ऋण दे सकें. PHDCCI ने नए MSME ऋणों पर 2% ब्याज छूट को फिर से शुरू करने और सूक्ष्म इकाइयों के लिए 'मुद्रा' ऋण की सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया है.

भुगतान में तेजी: देरी से भुगतान की संस्कृति का अंत
क्रेडिट से भी अधिक दबाव वाला मुद्दा देरी से होने वाले भुगतान के कारण पैदा हुआ 'कैश फ्लो' संकट है. आपूर्ति के लिए भुगतान प्राप्त करने में भारी देरी होती है, जो आमतौर पर MSME अधिनियम के तहत अनिवार्य 45 दिनों की सीमा से काफी अधिक है. यह देरी से होने वाला भुगतान ₹9 ट्रिलियन तक पहुँच गया है, जो करोड़ों छोटे व्यवसायों को प्रभावित कर रहा है. टैक्स नियमों की सख्ती के कारण निजी क्षेत्र तो अब समय पर भुगतान की दिशा में बढ़ रहा है, लेकिन सरकारी विभाग और सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) अभी भी 45 दिनों के भीतर भुगतान करने के कानून का उल्लंघन कर रहे हैं. बजट 2026 से MSME की उम्मीद है कि समय पर भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए सख्त नीतियां बनाई जाएंगी. व्यापार संघ स्वचालित दंड (automatic penalties), और पारदर्शिता के लिए सख्त प्रावधानों पर जोर दे रहे हैं. चर्चा है कि सरकार 45 दिनों के बाद बकाया राशि पर ब्याज देना अनिवार्य करने की योजना बना रही है.

GST और अनुपालन: छोटे व्यवसायों पर बोझ कम करना
GST अनुपालन (compliance) एक विशेष बिंदु है जिस पे सरकार को ध्यान देने की जरूरत है. मामूली टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों या निर्माताओं के लिए, हर महीने रिटर्न दाखिल करना और करों का मिलान करना उनके सीमित संसाधनों को खत्म कर देता है. GSTN के आंकड़ों के अनुसार, 84% पंजीकृत फर्मों का वार्षिक टर्नओवर ₹1.5 करोड़ से कम है, और ये सब मिलकर GST राजस्व में 7% से भी कम योगदान देते हैं. इस असंतुलन ने विशेषज्ञों को एक क्रांतिकारी विचार का प्रस्ताव देने के लिए प्रेरित किया है: इन छोटे व्यवसायों को GST से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाए.

FISME और कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि GST छूट की सीमा को वर्तमान ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹1.5 करोड़ कर दिया जाए, ताकि लगभग 99% छोटे व्यवसायों को नियमित जीएसटी अनुपालन से मुक्त किया जा सके. तर्क सरल है: उनका राजस्व योगदान न्यूनतम है, लेकिन उनके लिए अनुपालन लागत बहुत अधिक है. FACSI ने छोटे व्यवसायों के लिए वर्तमान जटिल फॉर्मों के बजाय एक एकल सरलीकृत फॉर्म की मांग की है. इसके अतिरिक्त, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (जहाँ इनपुट पर टैक्स आउटपुट से अधिक होता है) के कारण फंसे हुए रिफंड को समयबद्ध तरीके से वापस करने की भी मांग की जा रही है.

निष्कर्ष: सुधार या गिरावट?
भारत के 7 करोड़ MSMEs के लिए 2026 का बजट बहुत महत्वपूर्ण है. वर्षों से इन्हीं समस्याओं को दोहराते रहने के बाद अब धैर्य कम हो रहा है. यदि यह बजट केवल खोखले वादों या छोटे-मोटे बदलावों तक सीमित रहता है, तो MSMEs को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता के और कम होने का डर है. मांगों के पूरा न होने का मतलब होगा ऋण की कमी, जिसके कारण छोटे व्यवसायों को या तो विकास की योजनाएं रोकनी पड़ेंगी या बहुत ऊँची दरों पर साहूकारों से उधार लेना पड़ेगा.

दूसरी ओर, इन क्षेत्रों में प्रभावी बदलाव एक नई क्रांति की शुरुआत कर सकते हैं. ऋण और तरलता की बाधाओं को दूर करने से छोटे उद्यम तकनीक और नियुक्तियों पर निवेश कर पाएंगे. भुगतान में तेजी लाने से बाजार में विश्वास बढ़ेगा और व्यवसायों को दिवालिया होने से बचाया जा सकेगा. GST और अन्य नियमों को सरल बनाने से उद्यमियों के हजारों घंटे और रुपये बचेंगे, जिन्हें वे नवाचार (innovation) में लगा सकेंगे.

अतिथि लेखक-गौरव भगत, संस्थापक, गौरव भगत एकेडमी


टैग्स
सम्बंधित खबरें

टैगोर से टाटा तक: पश्चिम बंगाल अवसरों की भूमि

उद्योग पेशेवर डॉ. अजय शर्मा लिखते हैं, 1960 के दशक में भारत के जीडीपी में बंगाल की हिस्सेदारी 10% से अधिक थी, जो 2023-24 तक घटकर लगभग 5.6% रह गई है.

1 day ago

बंगाल के जनादेश का सम्मान जरूरी: भरोसा लौटे, गौरव पुनर्जीवित हो, सम्मान स्थापित हो

प्रबल बसु रॉय लिखते हैं, शासन का अगला चरण, चाहे स्थानीय स्तर पर इसका नेतृत्व कोई भी करे, भाषण या इरादों के आधार पर नहीं आंका जाएगा, इसे परिणामों के आधार पर परखा जाएगा.

1 day ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

2 days ago

प्रसार भारती में प्रसून होने का महत्व

टाटा मोटर्स के सीएमओ शुभ्रांशु सिंह लिखते हैं, विज्ञापन ने प्रसून जोशी को सटीकता और जटिलता को कुछ यादगार शब्दों में समेटने की क्षमता दी.

2 days ago

गोदरेज इंडस्ट्रीज की नई ब्रांड पहचान: सिर्फ डिजाइन नहीं, बड़े बदलाव का संकेत

इस लेख में लेखक गणपति विश्वनाथन ने गोदरेज इंडस्ट्रीज की रीब्रांडिंग और उसके मौजूदा संकेतों का विश्लेषण किया है.

4 days ago


बड़ी खबरें

अडानी के अमेरिकी नियामकों के साथ शांत समझौता करने की संभावना

उच्च दांव वाला DOJ–SEC मामला “नो-एडमिशन” समझौते की ओर बढ़ रहा है, जो वाशिंगटन और भारत के सबसे शक्तिशाली व्यापारिक साम्राज्यों में से एक के बीच एक संतुलित रीसेट का संकेत देता है.

2 hours ago

शशि शेखर वेम्पति बने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के नए अध्यक्ष

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वेम्पति ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बोर्ड से इस्तीफा दिया है. वे 2024 से इस संस्था में प्रोफेशनल डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे.

1 hour ago

गुजरात में दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी, 3,936 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

सरकार का उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का मजबूत हिस्सा बनाना है. इन नई परियोजनाओं को इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है.

4 hours ago

L&T का Q4 मुनाफा 3% घटा, लेकिन रेवेन्यू और ऑर्डर बुक में मजबूत बढ़त

इस तिमाही में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू 11% बढ़कर 82,762 करोड़ रुपये पहुंच गया. मजबूत ऑर्डर इनफ्लो और कई सेक्टर्स से मिले बड़े प्रोजेक्ट्स ने कंपनी की टॉपलाइन को सपोर्ट किया.

4 hours ago

बाजार में गिरावट के बाद रिकवरी के संकेत, आज इन शेयरों में रहेगी हलचल

मंगलवार को सेंसेक्स 252 अंक यानी 0.33% गिरकर 77,017.79 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 86.50 अंक (0.36%) टूटकर 24,032.80 के स्तर पर आ गया.

7 hours ago