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BW Gen AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जितना है समाधान, उतना ही है नुकसान

AI इन दिनों बड़ी चर्चाओं में चल रहा है. AI की हेल्प से लोग अपने काम आसान कर सकते हैं. लेकिन दूसरी ओर इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है. यही कारण है कि लोग इस पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा दिल्ली में Gen AI समिट आयोजित की जा रही है. समिट में भारत में AI की प्राइवेसी और AI पर विश्वास को लेकर बातचीत हुई. इस पैनल में AI कंपनियों से जुड़े कई लोगों ने अपने अनुभवों को साझा किया. इस पैनल में सेल्सफोर्स (Salesforce India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) संकेत अटल, MakeMy Trip के वाइस प्रेसिडेंट व SBU में हेड डेटा साइंटिस्ट नरसिम्हा एम, Invincible Robo League Robotics & AI Chair (Northern Region) की फाउंडर श्रुति खरबंदा मौजूद रही.

AI टेक्नोलॉजी के 2 पहलू

सेल्सफोर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) संकेत अटल ने AI पर फोकस करते हुए कहा कि AI टेक्नोलॉजी के 2 पहलू है एक पॉजिटिव साइड और दूसरा नेगेटिव साइड. लोगों के मन में AI को लेकर काफी डर है. लेकिन व्यापार के नजरिए से देखा जाए तो AI का इस्तेमाल व्यापार को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है और हमारा लक्ष्य है कि AI के मदद से हर किसी के जीवन को आसान बनाया जाए. कंज्यूमर का AI पर विश्वास करना एक अच्छा संकेत है. जिस तरह AI टूल्स विकसित किए जाते हैं उसे देखते हुए लोग इन पर भरोसा कर रहे हैं.

BW Gen AI समिट: 'Why, When AI नहीं, बल्कि How AI पर होनी चाहिए बात'

बदलाव और सुधार का रास्ता है AI

MakeMy Trip के वाइस प्रेसिडेंट व SBU में हेड डेटा साइंटिस्ट नरसिम्हा एम जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी की दुनिया में बड़ा बदलाव लेकर आई है. बहुत से बिजनेस खुद के विकास के लिए इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मल्टीपल सोर्सेज से डेटा लेकर कस्टमर्स का पैटर्न, उनकी पसंद, नापसंद के बारे में पता लगाता है. इससे कस्टमर्स के बिहेवियर को समझने में मदद मिलती है. AI के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है क्योंकि यह टेक्नोलॉजी अनेक क्षेत्रों में बदलाव और सुधार का दरवाजा खोल रही है.

AI के लिए नियम-कानूनों का अभाव

Invincible Robo League Robotics & AI Chair (Northern Region), फाउंडर श्रुति खरबंदा ने समिट में कहा कि AI की हमारे जीने और काम करने के तरीके में बहुत बड़े बदलाव लाने की क्षमता है. हालांकि, किसी भी शक्तिशाली तकनीक की तरह, AI भी कुछ जोखिमों और खतरों के साथ आता है जिन पर बात करने की आवश्यकता है. जिस तेजी AI में डेवलपमेंट हो रहा है नई-नई मुसीबतें भी सामने आ रही हैं. वॉइस और फेस रिकग्नाइजेशन टेक्नोलॉजी के जरिए यूजर की प्राइवेसी का खतरा बना रहता है. जरूरी नहीं कि AI मशीनें हर बार यूजर की कमांड को सही तरीके से समझ सकें, कई मायनों में इसका असर उल्टा हो सकता है. वर्तमान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के तो कई तरीके मौजूद हैं, लेकिन इन्हें किस हद तक इस्तेमाल में लाया जाना चाहिए, इसके लिए नियम-कानूनों का अभाव है.
 


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