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BW इवेंट: 'बदलावों के साथ खुद को नहीं बदला, तो पीछे छूट जाएंगे B स्कूल'

B स्कूलों को कम्युनिटी, बिजनेस, ग्लोबल लेवल पर जो कुछ भी हो रहा है, उससे सिंक होना होगा. बदलाव बहुत तेजी से हो रहे हैं, यदि वो पीछे रह गए, तो ग्रूम नहीं कर पायेंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

BW Businessworld द्वारा दिल्ली में Business School Summit And Awards 2023 का आयोजन किया गया, जिसमें एजुकेशन इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों ने शिरकत की और अपने विचार व्यक्त किए. इस दौरान, 'From Classroom to Career' विषय पर हुए पैनल डिस्कशन में MDI, Gurgaon के निदेशक प्रोफेसर अरविन्द सहाय, Jamnalal Bajaj Institute of Management Studies (JBIMS), Mumbai के निदेशक डॉ श्रीनिवासन आर अयंगर,  Birla Institute of Management Technology (BIMTECH), Greater Noida के निदेशक डॉ हरिवंश चतुर्वेदी XLRI, Jamshedpur के Dean (Academics) प्रोफेसर Sanjay Patro ने हिस्सा लिया. मॉडरेटर की भूमिका BW Businessworld के Senior Correspondent अर्जुन यादव ने निभाई. 

इंडस्ट्री रेडी नहीं हैं स्टूडेंट्स
अर्जुन यादव ने इस सवाल के साथ पैनल डिस्कशन की शुरुआत की कि पैनलिस्ट स्टूडेंट्स की कैंपस से करियर की यात्रा को कैसे देखते हैं? इसके जवाब में डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने कहा कि मैनेजमेंट एजुकेशन को तेजी से बदलती इंडस्ट्री, बिजनेस, सोसाइटी, ग्लोबल लेवल पर जिओ पॉलिटिक्स के अनुसार खुद को ढालना होगा. आज B स्कूलों के सामने ये बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है कि पहले वो खुद समझें, फिर फैकल्टी को प्रशिक्षित करें, फिर पाठ्यक्रम में बदलाव करें और कुछ बदलाव पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने के लिए भी करने होंगे. उन्होंने आगे कहा कि कैंपस टू करियर B स्कूलों और रिक्रूटर्स के लिए काफी प्रासंगिक विषय रहा है. रिक्रूटर्स भारत और दुनियाभर में यह शिकायत कर रहे हैं कि उन्हें टॉप B स्कूल से स्टूडेंट्स जरूर मिल रहे हैं, लेकिन वो इंडस्ट्री रेडी नहीं है. उन्हें दोबारा ट्रेनिंग, एक्सपोजर दिया जाता है और इसमें काफी समय और पैसा खर्च होता है. उनका तर्क है कि जब स्टूडेंट कैंपस में 2 साल बिताकर आते हैं, तो इंडस्ट्री रिक्रूटर्स को उन पर खर्चा क्यों करना चाहिए?

बदलावों से सिंक करना होगा 
BIMTECH ग्रेटर नोएडा के निदेशक डॉ हरिवंश चतुर्वेदी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इंडस्ट्री को ऐसे मैनेजमेंट स्टूडेंट्स की जरूरत है जो इंडस्ट्री के लिए पूरी तरह तैयार हों, जो पहले दिन से वैल्यू डिलीवरी कर सकें. हालांकि, ये बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि कंटेम्परेरी बदलाव और स्ट्रक्चरल बदलाव के बीच डिसकनेक्शन है. B स्कूलों को कम्युनिटी, बिजनेस, ग्लोबल लेवल पर जो कुछ भी हो रहा है, उससे सिंक होना होगा. बदलाव बहुत तेजी से हो रहे हैं, यदि आप पीछे रह गए, तो ग्रूम नहीं कर पायेंगे, बिजनेस रेडी, इंडस्ट्री रेडी नहीं बन पाएंगे. इसलिए बिजनेस लीडर्स को सभी बदलवों से अवगत रहना होगा.  

ऐसे करें स्टूडेंट्स को तैयार
वहीं, प्रोफेसर अरविन्द सहाय ने इंडस्ट्री से जुड़े विभिन्न सेगमेंट के बारे में बात करते हुए कहा कि कुछ लोग फ्रेश बेचलर डिग्री के साथ MBA या उसके समक्ष प्रोग्राम में भाग लेते हैं. जबकि कुछ वो होते हैं, जिनके पास 4 या 5 साल का अनुभव होता है. उदाहरण के तौर पर हम 0 से 3 साल के अनुभव वाले ग्रुप में ऐसे स्टूडेंट हैं, जिन्हें कुछ अनुभव होता है. इसी तरह, 4 से 5 वाले ग्रुप में वो स्टूडेंट जिन्हें काफी ज्यादा अनुभव होगा. 0 से 3 साल के अनुभव वालों को पता नहीं होता कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है, क्योंकि उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है. तो हम उन्हें इंडस्ट्री रेडी कैसे बना सकते हैं? हम उन्हें चार तरीके से ऐसा बना सकते हैं. 1. उन्हें कुछ वोकेशनल टूल्स देकर, उन्हें खास इंडस्ट्री के लिए chatgPT के इस्तेमाल में ट्रेन करके,  ताकि वे एनालिस्ट, मार्केटिंग मैनेजर, डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर अपना काम ज्यादा प्रभावित ढंग से कर सकें. लेकिन हमें यह भी ध्यान देना है कि क्या हमें उन्हें तकनीशियन बनाना है या फिर इस तरह डेवलप करना है कि वो कांसेप्ट को समझ सकें कि इंडस्ट्री कैसे काम करती है. उन्हें स्ट्रक्चरल टर्म, आर्गेनाइजेशनल टर्म, और टेक्नोलॉजी टर्म की समझ हो. ताकि जब स्टूडेंट किसी संस्था में जाए तो यह समझने के लिए पूरी तरह तैयार हो कि संस्था कैसे काम करती है. 

ये है बेस्ट वैल्यू क्रिएशन
प्रोफेसर सहाय ने आगे कहा - जब इंडस्ट्री कहती है कि फ्रेशर या 2 साल के अनुभव वाले लोग इंडस्ट्री रेडी लोग नहीं है, तो यदि आप उन्हें ध्यान से सुनें तो पाएंगे कि वो वोकेशनल स्कूल से हैं. जो मैनेजमेंट के लिए ITI के सामान है. यदि मैनेजमेंट स्कूल एक निश्चित कैलेबर से ऊपर के मैनेजर प्रदान करने की इच्छा रखते हैं, तो कुछ बदलाव की जरूरत है. हमें स्टूडेंट्स को तकनीशियन नहीं बनाना, बल्कि मैनेजर और लीडर बनाना है. उन्होंने कहा कि आजकल लोग जल्दी ही स्पेशलाइजेशन कर लेते हैं. यदि उन्हें लीडर बनना है तो उन्हें संस्था के अन्य कामकाज की भी अच्छी समझ होनी चाहिए. उन्हें अलग-अलग एरिया के बीच कनेक्शन बनाना आया चाहिए. शिक्षक के तौर पर हमें बेहद स्पष्ट रहना चाहिए कि सरकार का अपना अलग उद्देश्य है, बिजनेस का अपना अलग उद्देश्य है और शिक्षा का अपना अलग उद्देश्य है. हमें यह परिभाषित करना है कि वो उद्देश्य क्या है, ताकि जब स्टूडेंट वहां जाए तो वो वैल्यू क्रिएट कर पाए. बेस्ट वैल्यू क्रिएशन वो है जब आप लोगों को समझाते हैं कि उन्हें कैसे सीखना है. मैं अपने स्टूडेंट से कहता हूं कि मैं आपको मार्केटिंग या इंटरनेशनल बिजनेस नहीं सिखा रहा, मैं तुम्हें अलग-अलग परिस्थितियों में क्या करना है ये बता रहा हूं.

वैल्यू क्रिएशन हमारा मूल मंत्र 
प्रोफेसर संजय ने B स्कूल में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे कंटेंट का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों से भारतीय B स्कूल के फैकल्टी रिसर्च पर काफी ध्यान दे रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि क्लासरूम में मार्केटिंग आदि के ट्रेडिशनल कोर्स ही पढ़ने में आते हैं. वहीं, JBIMS, Mumbai के निदेशक डॉ श्रीनिवासन आर अयंगर ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि दो साल पहले जब मैंने निदेशक का पद संभाला था. तब हमने 2000 से ज्यादा मिडिल लेवल और सीनियर लेवल पर इंडस्ट्री रेडी प्रोफेशनल तैयार किये थे. दो हजार में से 1400 लेवल 3 टू 7 के बैंकर हैं. उन्होंने आगे कहा कि हम केवल 5 फैकल्टी और 3 फ्लोर के साथ इंस्टिट्यूट चलाते हैं, लेकिन वैल्यू क्रिएशन हमारा मूल मंत्र है और इसी के बल पर हमने जीरो से करोड़ों रुपए का रिवेन्यु बनाया है. डॉ अयंगर ने कहा - निश्चित तौर पर मेरे कस्टमर मेरे स्टूडेंट हैं, हम इसी पर ध्यान देते हैं कि हमारे कस्टमर स्टूडेंट ही हैं. वो भुगतान करते हैं और हमें उनका ख्याल रखना होता है. लेकिन मैं ये भी मानता हूं कि मेरे कस्टमर इंडस्ट्री भी है. यदि मैं इंडस्ट्री को अपना कस्टमर कहूंगा हूं तो मेरे स्टूडेंट एक प्रोडक्ट हैं. तो मैं कोर प्रोडक्ट पर ज्यादा फोकस करूंगा. 

इस तरह से बना रहे जुड़ाव 
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ अयंगर ने कहा कि हमारे पास 30 MHRD स्टूडेंट हैं, जो कोर्स हमने 2 साल पहले शुरू किया था. हमने कोर्स शुरू करने के दो महीने में ही 20 CHROs को आमंत्रित किया. मैंने कंटेंट रिसर्च पेपर, सेमिनार पेपर बनाए. गेस्ट फैकल्टी को बुलाने का काम हर बी स्कूल करता है, लेकिन हमने उन्हें एंगेज किया. हमने उनसे कहा कि ये सेट पेपर हैं, आप अपनी इंडस्ट्री प्रॉब्लम लेकर आएं हम 2 अपने स्टूडेंट देंगे, जिन्हें आप मेंटर कर सकते हैं. जब CHRO कुछ मुद्दों के साथ आते हैं तो हम उन्हें वैल्यू क्रिएशन देते हैं. जब मैं किसी कंपनी में जाता हूं तो पूछता हूं कि आपकी क्या प्रॉब्लम है, क्या मैं उसे दूर कर सकता हूं. मुझे बिजनेस नहीं चाहिए. मेरी फैकल्टी कॉर्पोरेट जाती है और संबंधित डोमेन पढ़ाने का प्रयास करती है और अनुभव हासिल करती है. इसके कई लाभ होते हैं, फैकल्टी से लेकर इंस्टिट्यूट और स्टूडेंट सभी को कुछ न कुछ हासिल होता है. हम ज्यादा भुगतान नहीं करते, लेकिन फिर भी 100 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी साथ हमारे साथ इसलिए हैं कि हम वैल्यू क्रिएशन पर जोर देते हैं. हम वैल्यू क्रिएट करते हैं.


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