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रघुराम राजन ने बताया Budget-2023 में कौनसी गलती से बचे सरकार

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने मोदी सरकार को बजट के लिए एक सुझाव दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

मोदी सरकार फरवरी में पेश होने वाले बजट (Budget-2023) की तैयारियों में मशगूल है. ऐसे में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने बताया है कि सरकार को बजट में क्या नहीं करना चाहिए. एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में राजन ने कहा कि उन्हें डर है कि कहीं बजट में टैरिफ में इजाफा न कर दिया जाए. 

इसलिए जरूरी है Tariff में वृद्धि रोकना    
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और RBI के पूर्व गवर्नर ने आगे कहा कि यह बजट केंद्र सरकार के लिए काफी महत्वपूर्ण है. यह रिफार्म के विजन पर केंद्रित होना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को टैरिफ में बढ़ोत्तरी से बचना चाहिए. भारत को चीन का एक विश्वसनीय विकल्प बनाने के लिए, राजन का मानना है कि भारत को टैरिफ में इजाफे को रोकना होगा, क्योंकि ऐसा करना भारत में निवेश करने के लिए तैयार कंपनियों की राह में बाधा के समान है.

ये है नंबर-1 विकल्प
रघुराम राजन ने कहा कि भारत के ऐसा देश है, जिससे विदेशी कंपनियां आकर्षित हैं. हालांकि, कंपनियों के लिए यह अभी भी नंबर वन विकल्प नहीं है. कंपनियां अक्सर वियतनाम जैसे देशों को तवज्जो देती हैं, क्योंकि वहां नीतियां थोड़ी अधिक स्पष्ट और कम अस्थिर हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को नीतियों को अधिक स्पष्ट और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) के अनुकूल बनाना होगा. राजन के मुताबिक, यूएस बेस्ड कंपनियों के लिए मेक्सिको एक और विकल्प है, क्योंकि North American Free Trade Agreement यानी NAFTA का हिस्सा होने के चलते, यहां उनके लिए अतिरिक्त लाभ हैं.

PLI स्कीम पर उठाए सवाल 
RBI के पूर्व गवर्नर ने सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम पर भी बात की. उन्होंने इस योजना के तहत केंद्र द्वारा दी जा रही सब्सिडी पर चिंता जताई. उन्होंने सवाल किया कि इन प्रोत्साहनों के समाप्त होने के बाद, क्या हमारे पास इंडस्ट्री होगी या लोग देश में अस्थायी रूप से उत्पादन करने के लिए इन प्रोत्साहनों का लाभ उठा रहे हैं? राजन ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ऐसे क्षेत्र में सब्सिडी प्रदान कर रहा है, जहां उसकी कोई जरूरत नहीं है.

क्या है PLI स्कीम?
सरकार ने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और आयात बिल कम करने के लिए मार्च 2020 में इस योजना की शुरुआत की थी. इसमें सरकार कंपनियों को भारत में बने प्रोडक्ट की बिक्री के आधार पर इंसेंटिव देती है. विदेशी कंपनियों को भारत में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आमंत्रित करने के अलावा, इस योजना का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को देश में अपना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है.


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