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टाटा संस में बड़ा फेरबदल, एन. चंद्रशेखरन ने छोड़ा चेयरमैन पद; फरवरी तक संभालेंगे जिम्मेदारी
नोएल टाटा के साथ मतभेदों के बीच इस्तीफा, टाटा संस की लिस्टिंग और बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर भी रही असहमति
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में बड़ा बदलाव हुआ है. एन. चंद्रशेखरन ने चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया है. हालांकि, वह फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल की जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ अहम मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से पहले कुछ शर्तों पर प्रतिबद्धता चाहते थे. इनमें टाटा संस को भविष्य में शेयर बाजार में लिस्ट नहीं किए जाने की गारंटी भी शामिल थी. हालांकि, चंद्रशेखरन ऐसी प्रतिबद्धता देने के पक्ष में नहीं थे. दोनों पक्षों के बीच टाटा संस के बोर्ड में प्रतिनिधित्व को लेकर भी मतभेद बताए गए हैं.
30 से ज्यादा कंपनियों को नियंत्रित करती है टाटा संस
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसके जरिए समूह की 30 से अधिक कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है. इनमें टीसीएस, टाटा मोटर्स और एयर इंडिया जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी में टाटा संस ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था. इसके बाद से ही उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज थीं.
1987 में टाटा समूह से जुड़े थे चंद्रशेखरन
एन. चंद्रशेखरन 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे. उन्होंने 2009 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सीईओ की जिम्मेदारी संभाली. इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने कई बड़े कारोबारों और रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार किया. हालांकि, पिछले कुछ समय में समूह को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है.
एयर इंडिया से लेकर JLR तक कई चुनौतियां
पिछले एक साल में टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों से जुड़े कई घटनाक्रम चर्चा में रहे हैं. एयर इंडिया को विमान दुर्घटना के बाद नियामकीय जांच का सामना करना पड़ा. वहीं, टीसीएस पर कीमतों का दबाव देखने को मिला. टाटा समूह की ब्रिटिश ऑटो कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) पर साइबर हमले के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ.
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेदों का इतिहास भी पुराना है. 2016 में तत्कालीन चेयरमैन साइरस मिस्त्री को टाटा संस के बोर्ड ने पद से हटा दिया था. इसके बाद टाटा समूह और मिस्त्री के बीच लंबे समय तक कानूनी विवाद चला था.
चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है, जब टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व और टाटा संस की रणनीतिक दिशा को लेकर आगे के फैसले पर बाजार की नजर रहेगी.
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