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भारत की अर्थव्यवस्था छठे स्थान पर पहुंची, IMF के अनुमान में GDP 3.92 ट्रिलियन डॉलर
IMF के अप्रैल 2026 के अनुमान में जापान और ब्रिटेन भारत से आगे. वहीं, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए दो साल में करीब 28% घटा
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारत 2025-26 में 3.92 ट्रिलियन डॉलर के नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के साथ दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अप्रैल 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के आधार पर सरकार ने मंगलवार को संसद में यह जानकारी दी. इसी के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की एसेट क्वालिटी में सुधार से जुड़े आंकड़े भी पेश किए गए.
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि IMF की रैंकिंग मौजूदा अमेरिकी डॉलर विनिमय दरों पर आधारित नॉमिनल GDP के आधार पर तय की जाती है. ऐसे में आर्थिक वृद्धि, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव, कीमतों में बदलाव, राष्ट्रीय खातों में संशोधन और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि जैसे कई कारण देशों की रैंकिंग को प्रभावित कर सकते हैं.
कभी पांचवें और चौथे स्थान पर था भारत का अनुमान
भारत ने सितंबर 2022 में नॉमिनल GDP के आधार पर ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया था. इसके बाद अप्रैल 2025 में IMF ने अनुमान जताया था कि भारत 2025 में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. उस समय भारत की नॉमिनल GDP 4.187 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था.
सरकार की ओर से 30 दिसंबर 2025 को जारी सालाना आर्थिक समीक्षा में भी कहा गया था कि भारत जापान को पीछे छोड़ चुका है और देश की GDP करीब 4.18 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है. हालांकि, IMF के अप्रैल 2026 के ताजा अनुमानों में जापान और ब्रिटेन दोनों भारत से आगे हैं, जिसके चलते भारत 2025-26 में छठे स्थान पर पहुंच गया है.
मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और MSME पर सरकार का फोकस
सरकार भारत की आर्थिक विकास क्षमता को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है. इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, बुनियादी ढांचा और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं. सरकार प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर्स में ढील, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार जैसे कदमों के जरिए आर्थिक वृद्धि को गति देने की कोशिश कर रही है.
इसके अलावा, पीएम गति शक्ति और नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी के माध्यम से लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. सरकार इनोवेशन, डिजिटलीकरण और रिसर्च को बढ़ावा देने के साथ-साथ सार्वजनिक पूंजीगत खर्च, उदारीकृत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति और प्रत्यक्ष कर एवं GST से जुड़े सुधारों के जरिए निवेश को समर्थन दे रही है.
भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौतों पर भी जोर दिया जा रहा है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से 5 अगस्त 2026 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की सकल बिक्री ₹29.8 लाख करोड़ रही.
PSB का सकल NPA दो साल में 28% घटा
इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की एसेट क्वालिटी में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय सुधार हुआ है. PSBs का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी ग्रॉस एनपीए 31 मार्च 2026 तक घटकर ₹2,45,634 करोड़ रह गया, जो दो साल पहले ₹3,39,541 करोड़ था.
इस तरह सकल एनपीए में करीब 28% की कमी दर्ज की गई है. इसी अवधि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का ग्रॉस एनपीए रेशियो भी 3.47% से घटकर 1.93% रह गया.
बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों में 89% की गिरावट
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी के मामलों में भी बड़ी कमी आई है. 2023-24 में जहां 54,850 मामले सामने आए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 5,786 रह गई. यह करीब 89% की गिरावट है.
PSBs की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वित्त वर्षों में 5,147 मामलों में कर्मचारियों की जवाबदेही तय की गई. वहीं, धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार उधारकर्ताओं के खिलाफ 9,451 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई.
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