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महादेव बेटिंग ऐप के को-फाउंडर रवि उप्पल दुबई में गिरफ्तार
सौरभ चंद्राकर के ओमान से भारत प्रत्यर्पण के कुछ दिनों बाद हुई उप्पल की गिरफ्तारी, 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क के संचालन का है आरोप
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के सह-संस्थापक और करोड़ों रुपये के कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार के प्रमुख आरोपी रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार किया गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरफ्तारी उनके कारोबारी साझेदार सौरभ चंद्राकर के ओमान से भारत प्रत्यर्पण के कुछ दिनों बाद हुई है. दोनों पर दुबई से सट्टेबाजी नेटवर्क संचालित करने का आरोप है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) और कई राज्यों की पुलिस एजेंसियां कर रही हैं.
सौरभ चंद्राकर को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के समन्वय से चलाए गए प्रत्यर्पण अभियान के बाद रविवार को भारत लाया गया था. छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले चंद्राकर और उप्पल पर महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाने का आरोप है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद जून में रॉयल ओमान पुलिस ने चंद्राकर को हिरासत में लिया था. इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान के सामने औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध प्रस्तुत किया था. सीबीआई के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों प्रमोटरों के पास वानुआतु के पासपोर्ट हैं, जिन्हें कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल किया गया था.
75 हजार करोड़ रुपये से अधिक के नेटवर्क की जांच
रवि उप्पल की गिरफ्तारी और सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को इस कथित सट्टेबाजी सिंडिकेट के दोनों प्रमुख संचालकों से पूछताछ का मौका मिलेगा. अधिकारियों को उम्मीद है कि पूछताछ से नेटवर्क के विस्तार, उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने में मदद मिलेगी. इस कथित सट्टेबाजी कारोबार का आकार 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है.
भारत पहुंचने के बाद सौरभ चंद्राकर को रायपुर ले जाया गया, जहां बुधवार को सीबीआई ने अदालत से उसका ट्रांजिट रिमांड हासिल किया. इसके बाद उसे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया. वहीं, रवि उप्पल फिलहाल दुबई में हिरासत में है. उसे भारत लाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की उम्मीद है.
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े सूत्रों का मानना है कि उप्पल से पूछताछ में नेटवर्क से जुड़े प्रमुख लोगों की पहचान करने, सट्टेबाजी कारोबार का दायरा समझने और इसमें शामिल धन के लेनदेन का पता लगाने में मदद मिल सकती है. उप्पल ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी आरोपी है. उससे कथित सट्टेबाजी कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन के बारे में पूछताछ की जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एजेंसियां विदेश में मौजूद अन्य प्रमुख आरोपियों को भी भारत लाने की तैयारी कर रही हैं.
हजारों लोगों का ग्राहक नेटवर्क बनाने का आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों प्रमोटरों ने हजारों लोगों का ग्राहक नेटवर्क तैयार किया और अवैध सट्टेबाजी के जरिए हजारों करोड़ रुपये कमाए. इस रकम को कथित तौर पर हवाला के जरिए विदेश भेजा गया. इसमें से कुछ रकम भारत में लोगों को कमीशन और अन्य अनुचित भुगतान के रूप में दिए जाने का भी आरोप है.
महादेव ऑनलाइन बुक पर क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस और फुटबॉल जैसे खेलों पर सट्टा लगाने की सुविधा उपलब्ध थी. इसके अलावा तीन पत्ती, पोकर, ड्रैगन टाइगर जैसे कार्ड गेम, अन्य किस्म के खेल और वर्चुअल क्रिकेट पर भी दांव लगाए जाते थे. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्लेटफॉर्म के जरिए भारत में चुनावों पर भी सट्टा लगाने की सुविधा दी जाती थी.
फ्रेंचाइजी मॉडल पर चलाया जा रहा था कारोबार
रिपोर्ट के मुताबिक, सट्टेबाजी का यह नेटवर्क कई वेबसाइटों और इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के निजी समूहों के जरिए संचालित किया जाता था. इसके लिए 'पैनल ओनर' नाम से जाने जाने वाले बिचौलियों की मदद ली जाती थी. इनका काम नए ग्राहकों को जोड़ना और पैसों के लेनदेन की व्यवस्था करना था.
पैनल ओनर ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े संपर्क नंबरों का प्रचार करते थे. विज्ञापनों में रुचि दिखाने वाले लोगों को व्हाट्सऐप नंबरों पर भेजा जाता था, जहां उन्हें प्लेटफॉर्म से जुड़ने और पैसे जमा करने की प्रक्रिया समझाई जाती थी.
यूजर्स को सट्टा लगाने के लिए निर्धारित बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने होते थे. इसके बदले उन्हें क्रेडिट या टोकन दिए जाते थे, जिनका इस्तेमाल ऐप पर दांव लगाने के लिए किया जा सकता था. उदाहरण के तौर पर, 5,000 रुपये जमा करने पर यूजर के खाते में 10,000 टोकन क्रेडिट किए जा सकते थे.
ग्राहकों को जोड़ने और उनसे पैसे जमा कराने की जिम्मेदारी देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय पैनल ओनर को दी गई थी. इससे कई बैंक खातों के जरिए बड़ी संख्या में यूजर्स और वित्तीय लेनदेन को संभालना आसान हो जाता था.
हालांकि, जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का केंद्रीय संचालन दुबई से सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के नियंत्रण में था. ईडी के एक पुराने बयान में दुबई स्थित मुख्य प्रतिष्ठान को नेटवर्क का 'हेड ऑफिस' बताया गया था.
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों प्रमोटर फ्रेंचाइजी जैसे मॉडल पर इस कारोबार को चला रहे थे. इसमें वे बिचौलियों को अलग-अलग पैनल या शाखाएं बेचते थे, जबकि कारोबार से होने वाले मुनाफे का करीब 80 फीसदी हिस्सा अपने पास रखते थे.
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