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अपहेल्थ धोखाधड़ी मामले में Glocal ने US Arbitration आदेश को किया खारिज

इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने ग्लोकल हेल्थकेयर सिस्टम्स को 110 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया है. इस पर ग्लोकल ने अपना बयान जारी किया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स के इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (आईसीए) ने ग्लोकल (Glocal) हेल्थकेयर सिस्टम्स, उसके प्रमोटरों और अन्य को अपहेल्थ फ्राड केस में अनुबंध (Contract) के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें 110 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया है. इस आदेश के बाद ग्लोकल ने भी अपनी सफाई में बयान जारी किया है. 

इस मामले पर ग्लोकल की प्रतिक्रिया

ग्लोकल ने मध्यस्थता (Arbitration) आदेश को एकतरफा बताते हुए कहा है कि शिकागो, इलिनोइस में बैठे एक आईसीसी ट्रिब्यूनल ने मेसर्स ग्लोकल हेल्थकेयर सिस्टम्स प्राइवेट के खिलाफ एकतरफा और विकृत फैसले की सूचना दी है. यह सुलभ स्वास्थ्य सेवा का क्षेत्र और इसके शेयरधारक UpHealth Holdings Inc, UpHealth Inc and Avi Katz, Raluca Dinu, Martin S. Beck आदि द्वारा की गई आपराधिक धोखाधड़ी का मामला है, जिसे संबंधित अदालतों और जांच अधिकारियों दोनों ने सीधे स्वीकार कर लिया है. ग्लोकल या उसके प्रबंधन/शेयरधारकों द्वारा गलत बयानी का कोई सबूत नहीं मिलने पर, निजी न्यायाधिकरण अपहेल्थ होल्डिंग्स इंक को नियंत्रण खोने के दावे पर हर्जाना देने के लिए आगे बढ़ा, जिसे कभी भी स्थानांतरित नहीं किया गया था और न ही वैध रूप से स्थानांतरित किया जा सकता था, क्योंकि यह लेनदेन अपहेल्थ होल्डिंग्स इंक द्वारा गंभीर आपराधिक धोखाधड़ी का एक हिस्सा था. इसे बाद में स्वैच्छिक दिवालियापन के लिए दायर किया है और अमेरिका में एसईसी और भारत के जांच अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है.

ट्रिब्यूनल ने दिया ये कारण

ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया एकमात्र कारण यह है कि ग्लोकल और अन्य ने अपना केस पेश नहीं किया, इसलिए वे इस फैसले के लिए जिम्मेदार हैं. ग्लोकल ने हमेशा कहा है कि इस मामले में आपराधिक जांच की जरूरत है और इसमें ऐसे मुद्दे शामिल हैं, जो गैर-मध्यस्थता योग्य हैं. ऐसी कार्यवाहियों में भाग लेना कानूनी प्रक्रिया के हर सिद्धांत के विपरीत होगा.

ये है मामले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी
1. कंपनी के साथ-साथ इसके प्रमोटरों/शेयरधारकों की मध्यस्थता कार्यवाही में गैर-भागीदारी के बावजूद एकपक्षीय फैसला सुनाया गया.

2. मध्यस्थता न्यायाधिकरण को बिना किसी पूर्वाग्रह के मध्यस्थता के लिए संदर्भित मुद्दों पर संज्ञान लेने के लिए स्पष्ट कानूनी बाधा के बारे में बार-बार सूचित किया गया था, जो कि प्रत्यक्ष तौर पर गैर-मध्यस्थता योग्य थे. हालांकि, ट्रिब्यूनल अपने अधिकार क्षेत्र को दी गई चुनौती पर कोई भी प्रारंभिक निष्कर्ष जारी करने में विफल रहा, जो कि स्थापित कानूनी सिद्धांतों का सरासर उल्लंघन है. वहीं,नट्रिब्यूनल ने दावेदारों द्वारा की जा रही धोखाधड़ी और झूठी गवाही का सबूत देने वाले दस्तावेजों को पढ़ने से इनकार कर दिया और दस्तावेजी तथ्यों के विपरीत बयान दिए. ट्रिब्यूनल द्वारा जारी किया गया फैसला इस बात का सबूत है कि गंभीर धोखाधड़ी से जुड़े मामलों को निजी ट्रिब्यूनल की दया पर क्यों नहीं छोड़ा जा सकता है.

3. अपराधियों ने बेईमानी से और धोखाधड़ी से ग्लोकल के शेयरधारकों को शेयर खरीद समझौते में प्रवेश करने के लिए प्रेरित किया, यह अच्छी तरह से जानते हुए कि उनके पास समझौते के दायित्वों को पूरा करने का न तो इरादा था और न ही साधन थे और शेयर खरीद समझौते की आड़ में केवल इसका इस्तेमाल किया गया था इन समझौतों को बाद में ग्लोकल द्वारा समाप्त कर दिया गया और परिणामस्वरूप ग्लोकल में अपराधियों की बहुमत हिस्सेदारी भी रद्द कर दी गई है.

4. ग्लोकल ने अपने साथ हुई जटिल धोखाधड़ी के बारे में जानने के तुरंत बाद भारत में अधिकारियों को सतर्क किया और तुरंत डॉ. एवी काट्ज़, रालुका दीनू, मार्टिन सैमुअल, आर्थर बेक, रमेश बालकृष्णन, रंजिनी रामकृष्ण सहित मेसर्स अपहेल्थ इंक के प्रिंसिपलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा के तहत इन अपराधों की पश्चिम बंगाल में सक्रिय जांच चल रही है.

5. जहां तक ​​एफआईआर का सवाल है, जांच एजेंसी को आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अमेरिका में इन व्यक्तियों की जांच के लिए पर्याप्त सबूत मिले हैं और उन्होंने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंप दी है.

6. भारत में एक सक्षम वाणिज्यिक अदालत ने भी अपराधियों द्वारा ग्लोकल के खिलाफ की गई धोखाधड़ी का एक स्पष्ट निष्कर्ष वापस कर दिया है. इस बारे में आईसीसी ट्रिब्यूनल को भी सूचित किया गया था, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया.

 7. ग्लोकल ने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन, यूएसए (एसईसी) के पास अपहेल्थ इंक के खिलाफ आपराधिक प्रवर्तन कार्रवाई की मांग करते हुए एक शिकायत भी दर्ज की थी. एसईसी को सूचित किया गया था कि अपहेल्थ इंक ने 1934 के प्रतिभूति विनिमय अधिनियम की (i) धारा 10(बी), (ii) शीर्षक 15 यू.एस. कोड § 78जे (बी) और (iii) शीर्षक का उल्लंघन करते हुए असाधारण अनुपात की प्रतिभूति धोखाधड़ी की है. इसके अलावा, अपहेल्थ इंक ने सिक्योरिटीज और कमोडिटीज धोखाधड़ी भी की है, जिसके लिए टाइटल 18 यू.एस. कोड § 1348 के तहत कारावास की सजा हो सकती है.

 8. ऐसे न्यायाधिकरण द्वारा जारी किया गया कोई भी फैसला अमान्य है.

9. कंपनी ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों सहित प्रतिष्ठित दिग्गजों से कानूनी राय और प्रमुख वैश्विक फोरेंसिक सलाहकारों से फोरेंसिक राय प्राप्त की है. कंपनी इस तरह के दोषपूर्ण, निरर्थक और गैर-स्थायी पुरस्कार के प्रवर्तन के किसी भी और हर तरीके का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है. अन्य मामले जिन पर ट्रिब्यूनल अपनी राय दे रहा है,  जिनमें अपहेल्थ होल्डिंग्स द्वारा धोखाधड़ी से प्राप्त शेयर भी शामिल हैं, जो भारतीय न्यायालयों का विषय है और उक्त अतिरिक्त शेयरों को कोर्ट की टिप्पणियों और फोरेंसिक और कानूनी रिपोर्टों के विधिवत प्राप्त होने के बाद ग्लोकल बोर्ड द्वारा पहले ही रद्द कर दिया गया है.

10. कंपनी उक्त संस्थाओं के खिलाफ नुकसान का दावा दायर करने की प्रक्रिया में भी है. शुरुआती अनुमानों के आधार पर इसकी मात्रा 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने की संभावना है.


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