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Zomato ने 3 महीने में कर डाली तगड़ी कमाई, मुनाफे में 389 प्रतिशत का बंपर उछाल
जोमैटो का एड्जस्टेड EBIDTA वर्ष की समान अवधि के 41 करोड़ रुपये के मुकाबले कई गुना बढ़कर 331 करोड़ रुपये हो गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी जोमैटो (Zomato) का जुलाई-सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 388% बढ़कर 176 करोड़ रुपए हो गया है. एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 36 करोड़ रुपए था. जोमैटो ने वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए. कंपनी का दूसरी तिमाही में रेवेन्यू 68.50% बढ़कर 4,799 करोड़ हो गया. एक साल पहले की समान तिमाही में रेवेन्यू 2,848 करोड़ रुपए था.
एक साल में जोमैटो ने 135.58% का रिटर्न दिया
जोमैटो का शेयर आज 3.44% गिरकर 256.55 रुपए पर बंद हुआ. बीते 6 महीने में कंपनी का शेयर 32.69% बढ़ा है. वहीं बीते एक साल में कंपनी के शेयर ने 135.58% का रिटर्न दिया है. कंपनी का मार्केट कैप 2.23 लाख करोड़ रुपए है. फूड डिलीवरी ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) सालाना आधार (YoY) पर 21 प्रतिशत और क्वार्टर आधार (QoQ) पर 5 प्रतिशत बढ़ी है. कंपनी के CFO अक्षत गोयल का कहना है कि बिजनेस में ग्रोथ जारी है.
वहीं ब्लिंकइट के रिवेन्यू में सालाना आधार पर 129 प्रतिशत की ग्रोथ इर्ज की गई है. ये 1,156 करोड़ रुपए पहुंच गई है. इस सेगमेंट के ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 122 प्रतिशत का इजाफा हुआ है और ये 6,132 करोड़ रुपए का रहा है. इसके अलावा कंपनी के ‘डाइनिंग आउट’ बिजनेस से भी इनकम बढ़ी है.
कंसॉलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन
कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड. स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कंसॉलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है. यहां, जोमैटो की ब्लिंकिट समेत 28 सब्सिडियरी, 1 ट्रस्ट और 1 एसोसिएट कंपनी हैं. इन सभी के फाइनेंशियल रिपोर्ट को मिलाकर कंसॉलिडेटेड कहा जाएगा. वहीं, अगर ब्लिंकिट के अलग रिजल्ट को स्टैंडअलोन कहा जाएगा.
कंपनी का कैश बैलेंस हुआ कम
वहीं इस दौरान कंपनी ने पेटीएम के टिकटिंग बिजनेस का भी अधिग्रहण किया है. इस दौरान कंपनी का कैश बैलेंस कम हुआ है. ये 1,726 करोड़ रुपए रह गया है, जो इससे ठीक पिछली तिमाही में 2,014 करोड़ रुपए था. इसकी बड़ी वजह पेटीएम के टिकटिंग बिजनेस के अधिग्रहण के लिए कंपनी का पैसा निकालना है.
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