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क्या OCCRP के आरोपों की गोली से घायल होगी Vedanta? शेयर तो कुछ और ही इशारा कर रहे 

OCCRP ने अपनी रिपोर्ट में अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता पर पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने के लिए लॉबिंग का आरोप लगाया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने अडानी समूह (Adani Group) के बाद वेदांता (Vedanta) को निशाना बनाया है. शुक्रवार को सामने आई OCCRP की रिपोर्ट में अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) की कंपनी वेदांता पर पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने के लिए गुपचुप तरीके से लॉबिंग करने के आरोप लगाए गए. अनिल अग्रवाल पहले से ही तमाम तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं, ऐसे में क्या ये रिपोर्ट उनकी परेशानियों में और इजाफा करेगी? ये सवाल सबसे अहम हो गया है. 

क्या कहती है रिपोर्ट?
सबसे पहले जानते हैं कि OCCRP की रिपोर्ट में वेदांता के बारे में क्या कहा गया है. रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान जनवरी, 2021 में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने तत्कालीन पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से कहा था कि सरकार को माइनिंग कंपनियों को नए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस हासिल किए बिना 50% उत्पादन बढ़ाने की अनुमति देनी चाहिए. इससे देश में इकॉनमिक रिकवरी तेज हो सकती है. इसके अलावा, वेदांता की ऑयल कंपनी केयर्न इंडिया की तरफ से ऑयल ब्लॉक्स में एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग के लिए जन सुनवाई को खत्म करने के लिए लॉबिंग की, जो सफल रही थी.

ज्यादा प्रभाव नामुमकिन
पिछला कुछ वक्त अनिल अग्रवाल के लिए अच्छा नहीं गया है. कर्ज का बोझ, सरकार की चेतावनी और सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के सपने का टूटनाअग्रवाल को पहले ही परेशान किए हुए है. अग्रवाल को उम्मीद थी कि फॉक्सकॉन के साथ मिलकर देश का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने से उनकी कई दिक्कतों का अंत हो सकता है, लेकिन फॉक्सकॉन ने इस पार्टनरशिप में आगे बढ़ने से इंकार कर दिया. अनिल अग्रवाल की गिनती ऐसे कारोबारियों में होती है, जिनका उद्देश्य केवल मुनाफा कमाना ही नहीं है. लिहाजा, पर्यावरण कानूनों को कमजोर करने का आरोप उनकी छवि को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, जानकार मानते हैं कि चूंकि मामला पुराना हो गया है, इसलिए अब उसका उतना ज्यादा प्रभाव नहीं होगा. 

रिपोर्ट आते ही चढ़े स्टॉक 
जानकारों के मुताबिक, OCCRP की रिपोर्ट में ऐसे किसी तथ्य का जिक्र नहीं है, जिससे पता चलता हो कि अनिल अग्रवाल की वजह से कौनसा कानून कमजोर हुआ और पर्यावरण को उससे क्या नुकसान उठाने पड़े. इसलिए रिपोर्ट की मारक क्षमता खास नहीं रहने वाली. वैसे, स्टॉक मार्केट के नजरिये से देखें, तो ये रिपोर्ट एक तरह से अग्रवाल की वेदांता के लिए शुभ नजर आती है. शुक्रवार को कंपनी का शेयर 1.59% की तेजी के साथ 236 रुपए पर बंद हुआ, जबकि इससे पहले स्टॉक में लगातार गिरावट आ रही थी. इसके उलट जब OCCRP ने अडानी ग्रुप पर आरोप लगाये थे, तब समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट शुरू हो गई थी.

रिकवरी मोड में Adani Group
अडानी समूह की कंपनियों के शेयर शुक्रवार को रिकवरी मोड में दिखाई दिए. इस लिहाज से देखें, तो अडानी पर OCCRP की रिपोर्ट कुछ खास असर नहीं डाल पाई. ग्रुप की अधिकांश कंपनियों के शेयरों में कल तेजी दर्ज की है. अडानी पावर करीब साढ़े तीन फीसदी की उछाल के साथ 332 रुपए पर बंद हुआ. Adani Enterprises के शेयर भी 1.27% की तेजी के साथ कारोबार करते रहे. अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर कल 2% से ज्यादा की मजबूती के साथ 948 रुपए के लेवल पर पहुंच गए थे. वहीं, हिंडनबर्ग की रिपोर्ट जब सामने आई थी, तो अडानी समूह को बड़ा नुकसान हुआ था. इस रिपोर्ट का प्रभाव अब भी कुछ हद तक समूह पर मौजूद है.        
 


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