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बंपर रिटर्न देने वाले स्मॉल-मिड कैप स्टॉक्स में क्यों आ रही गिरावट? जानिए पूरी डिटेल

जरूरत से ज्यादा सख्त नियामक सर्कुलर के कारण भारी नुकसान हुआ, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिकवाली जल्द ही कम हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

छोटे और मिड-कैप शेयरों की कीमतें अचानक 20 से 60 प्रतिशत तक गिर गई हैं. ऐसा क्या बदलाव हुआ है जो इनकी कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट का कारण बना? शेयर बाजार मांग और आपूर्ति का खेल है. एक्सचेंजों, क्लीयरिंग कॉर्पोरेशनों और सेबी (SEBI) ने एक नया नियम बनाया है, जिसने करीब 1010 छोटे और मिड-कैप शेयरों की मांग और आपूर्ति को प्रभावित कर दिया है, जिससे भारत के पूरे शेयर बाजार को अचानक नुकसान हो रहा है.

हाल ही में आए एक नियामक सर्कुलर के अनुसार, 1010 शेयरों (ज्यादातर छोटे और मिड-कैप) को उन 'गिरवी' शेयरों की सूची से हटा दिया गया है, जिन्हें मार्जिन के रूप में बैंक और ब्रोकरेज से लोन लेने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था. पहले एक्सचेंज की क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन लगभग 1730 शेयरों को गिरवी रखने के लिए स्वीकार कर रही थी, लेकिन नवंबर से यह सूची घटकर केवल 700 शेयरों तक सीमित हो सकती है. साथ ही, बैंक और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) भी इन शेयरों को गिरवी रखकर लोन नहीं देंगे या ज्यादा शेयर गिरवी रखने पर भी कम पैसे देंगे. 

जब यह सर्कुलर आया, उस समय स्टॉकब्रोकरों की मार्जिन ट्रेडिंग की कुल राशि लगभग ₹73,500 करोड़ थी और जिन शेयरों को निवेशकों ने गिरवी रखा था, वे प्रभावित हुए. साथ ही, जिन शेयरों को गिरवी रखकर खरीदा गया था, वे भी प्रभावित हुए क्योंकि अधिकतर निवेशक इतनी जल्दी और पैसा नहीं ला सकते कि मार्जिन की कमी पूरी कर सकें.

भारत में, हाई-नेट-वर्थ व्यक्ति और बड़े व्यापारी अक्सर अपने मौजूदा शेयरों को बैंकों या एनबीएफसी के साथ गिरवी रखकर बड़ी उधारी स्थिति बनाते हैं. आमतौर पर, व्यापारी 20% या 30% मार्जिन लाते थे, और बाकी 70% मार्जिन के लिए ब्रोकर पैसे देते थे ताकि वे बाजार में और व्यापार कर सकें. ये बड़े वित्तीय सौदे होते हैं, जहां ब्याज दरें 10% से 14% के बीच होती हैं, लेकिन व्यापारी अपनी मौजूदा स्थिति को बनाए रखते हुए बड़ी स्थिति बना पाते हैं.

अब, लगभग 1000 स्टॉक्स जिनको गिरवी रखकर उधारी लेना संभव नहीं रहा, वे व्यापारियों के लिए बेकार हो गए, जिससे इन स्टॉक्स में भारी बिकवाली हुई. ब्रोकरों के अनुसार, इस बिकवाली ने छोटे और मिड-कैप स्टॉक्स में और भी गिरावट ला दी, जिससे पूरे बाजार में नुकसान हुआ. इसके अलावा, एक्सचेंज समय-समय पर कुछ स्टॉक्स को अपने विशेष निगरानी उपायों में रखते हैं और उनके सर्किट फिल्टर को भी सीमित कर देते हैं, जिससे लोग उन्हें बेचने लगते हैं. कुल मिलाकर, छोटे और मिड-कैप स्टॉक्स की मांग और आपूर्ति का खेल इन नियामक उपायों से बहुत प्रभावित हुआ, ऐसा विशेषज्ञ कहते हैं.

जुलाई में एक्सचेंजों द्वारा गिरवी रखे जाने वाले स्टॉक्स की सूची को घटाने के लिए एक सर्कुलर जारी किया गया था. इसका तुरंत कोई बड़ा असर नहीं हुआ, क्योंकि गिरवी रखे गए स्टॉक्स पर मिलने वाले लोन या ट्रेडिंग मार्जिन में धीरे-धीरे कटौती की गई थी. उदाहरण के लिए, पहले जिन स्टॉक्स पर 80% या 75% तक का लोन मिलता था, वो धीरे-धीरे घटकर 40% तक आ गया, लेकिन नवंबर में कई स्टॉक्स पर मिलने वाला लोन शून्य हो जाएगा, जिससे बाजार में घबराहट फैल सकती है.

सीधे शब्दों में कहें तो जुलाई में जिन स्टॉक्स की कीमत 100 रुपये थी और उन पर 75 या 80 रुपये का लोन या ट्रेडिंग मार्जिन मिल रहा था, वह अक्टूबर में घटकर 40 रुपये रह गया और नवंबर से यह शून्य हो सकता है. इस वजह से, पिछले कुछ दिनों में लगभग 1000 स्टॉक्स और उन स्टॉक्स में भी, जिन्हें इन 1000 स्टॉक्स को गिरवी रखकर खरीदा गया था, भारी बिकवाली हुई है, जिससे एक संकट पैदा हो गया है.

इस नियामक सर्कुलर ने बाजार के पसंदीदा स्टॉक्स जैसे अडानी पावर, टाटा इन्वेस्टमेंट्स, हडको (HUDCO) आदि को भी गिरवी सूची से बाहर कर दिया है. अन्य स्टॉक्स जिन पर अब या तो लोन नहीं मिलेगा या बहुत कम मिलेगा, उनमें YES बैंक, सुजलॉन, भारत डायनेमिक्स, पेटीएम, पिलानी इन्वेस्टमेंट्स एंड इंडस्ट्रीज (बिड़ला ग्रुप की होल्डिंग कंपनी और एनबीएफसी), ऑटम इन्वेस्टमेंट्स, अतुल ऑटो, ऑलकार्गो, IRB इंफ्रास्ट्रक्चर, NBCC, गो डिजिट, इनॉक्स विंड, ज्यूपिटर वैगन्स, KIOCL, ज्योति CNC ऑटोमेशन, JBM ऑटो, हॅटसन एग्रो प्रोडक्ट, तेजस नेटवर्क्स और कई अन्य छोटे और मिड-कैप कंपनियां शामिल हैं, जिनमें ट्रेडर्स की बहुत रुचि थी. 

 

(लेखक- पलक शाह, BW रिपोर्टर. पलक शाह ने "द मार्केट माफिया-क्रॉनिकल ऑफ इंडिया हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" नामक पुस्तक लिखी है. पलक लगभग दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं, उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसी प्रमुख वित्तीय अखबारों के लिए काम किया है).


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