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सबसे बड़ा सवाल: करोड़ों खर्च के बाद भी बारिश में बेबस क्यों हो जाती है मुंबई? 

मानसून में मुंबई की हर साल वाली तस्वीर फिर सामने आ गई है. शहर के कई इलाकों में पानी भर गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

Mumbai Rains: बारिश ने एक बार फिर से मुंबई (Mumbai) की चेन खींच दी है और कभी न थमने वाले इस शहर की रफ़्तार बुरी तरह प्रभावित हुई है. रविवार रात से मुंबई में शुरू हुई तेज बारिश के चलते जगह-जगह पानी भर गया है. कई इलाकों में सड़कें तालाब में तब्दील हुई हैं. मुंबई की धड़कन कही जाने वालीं लोकल ट्रेनों के पहिये ही कुछ रूट्स पर थमे हैं. वाशी से मुंबई की तरफ जाने वाली लोकल ट्रेनें आज सुबह चल ही नहीं पाईं, जिसके चलते रेल से यात्रा करने वाली पूरी भीड़ सड़कों पर आ गई और  हालात बाद से बदतर हो गए. 

249 करोड़ हुए खर्च
मुंबई में एक दिन की बारिश में हुए जलभराव को लेकर लोगों में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के खिलाफ खासा गुस्सा है. लोगों का गुस्सा लाजमी भी है, क्योंकि यह पहली बार नहीं है जब मुंबई बारिश के आगे बेबस हुई है. लगभग हर मानसून में ऐसा होता है. BMC हर बार तैयारी पूरी होने के दावे करती है और बारिश शुरू होते ही उसके दावों की पोल खुल जाती है. इस बार BMC ने बारिश से निपटने की तैयारी पर 249 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं. लेकिन नतीजा वही है, जो हर बार होता है - जलमग्न मुंबई.

31 एजेंसियां ने क्या किया?
मार्च में खबर आई थी कि BMC ने नाली-नालों की सफाई के लिए 31 एजेंसियों को नियुक्त किया है. ये एजेंसियां 249 करोड़ की लागत से मानसून की दस्तक से पहले शहर के सभी नाली-नालों को साफ करेंगी, ताकि जलभराव जैसी  स्थिति उत्पन्न न हो. पिछले महीने यानी जून में BMC ने कहा था कि वो बारिश के लिए पूरी तरह से तैयार है. बीएमसी ने दावा किया था कि पूरी मुंबई में छोटे-बड़े सभी नालों की सफाई हो चुकी है. लेकिन जिस तरह के हालात शहर में एक दिन के बारिश के बाद हुए हैं, उसे देखकर BMC के दावों पर शक होना लाजमी है.

सवाल पूछा जाना चाहिए
मुंबई में रविवार को रात भर हुई बारिश ने BMC के दावों की कलई खोलकर रख दी है. सोमवार सुबह जब लोग ऑफिस जाने लिए घर से बाहर निकले, तो उन्हें तमाम इलाकों में जलभराव दिखाई दिया. हिंदमाता इलाके से भारी जलभराव की तस्वीरें सामने आई हैं. इसी तरह, गांधी मार्किट, कुर्ला और परेल इलाकों की कई सड़कें भी तालाब जैसी दिखाई दीं. सड़कों पर पानी भरने से लोगों की गाड़ियां बीच में बंद हो गईं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश की तैयारियों पर करोड़ों रुपए खर्च होता है, मगर हालात नहीं बदलते. लिहाजा, अधिकारियों से पूछा जाना चाहिए कि पैसा जाता कहां है?

सवालों में रेलवे भी 
लोकल ट्रेन मुंबई की धड़कन कही जाती है. मुंबई और नवी मुंबई से हर रोज सैकड़ों लोग लोकल से सफ़र करते हैं. लेकिन बारिश के मौसम में शहर की इस धड़कन की रफ़्तार बुरी तरह प्रभावित हो जाती है. अब सवाल यह भी उठने लगे हैं कि रेलवे इस मुद्दे को गंभीरता से क्यों नहीं लेता? आखिर क्या वजह है कि ट्रैक पर इतना पानी जमा हो जाता है कि ट्रेनों के पहिये थामने पड़ते हैं? एक रिटायर्ड रेल अधिकारी ने BW हिंदी से बातचीत में कहा कि इस स्थिति के लिए रेलवे के साथ-साथ आम जनता भी कुसूरवार है. उन्होंने कहा कि ट्रैक पर पानी जमा न हो इसके लिए निर्धारित समय पर ड्रेनेज की सफाई की जाती है, लेकिन कभी-कभी अधिकारी दूसरे कामों को इसपर तवज्जो दे देते हैं. यानी संबंधित कर्मचारियों को कोई दूसरा टास्क थमा दिया जाता है और जब तक इसका नंबर आता है देर ही चुकी होती है. 

मिलकर करना होगा काम
उन्होंने आगे कहा कि रेलवे को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बारिश से पहले पानी निकासी के सभी इंतजाम पुख्ता किए जाएं. साथ ही उनका कहना है कि आम यात्रियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. लोग ट्रैक पर कचरा फैलाते रहते हैं. स्टेशन पर ट्रैक की सफाई तुरंत हो जाती है, लेकिन उसकी सीमा से बाहर यह तुरंत संभव नहीं हो पाता. रेलवे ने कई जगहों पर बाकायदा दीवार उठाई है, ताकि आसपास की बस्तियों से लोग ट्रैक पर कचरा न फेंके, लेकिन वो दीवार से ऊपर से कचरा फेंक देते हैं. उनके अनुसार, इस तरह की समस्या के लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी हैं. रेलवे के साथ-साथ जनता को भी इसमें भागीदारी देनी होगी.
 


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