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हिंडनबर्ग के आरोपों पर तुरंत सफाई देने वालीं SEBI चीफ कांग्रेस के सवालों पर क्यों हैं खामोश?

कांग्रेस सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी है, लेकिन बुच ने एक भी आरोप पर सफाई नहीं दी है. उनकी खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) कांग्रेस के निशाने पर हैं. पार्टी ने बीते कुछ दिनों में बुच पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. लेकिन हिंडनबर्ग के आरोपों पर तुरंत सफाई देने वालीं सेबी चीफ कांग्रेस के आरोपों पर पूरी तरह खामोश हैं. माधबी पुरी बुच की यह खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है. कांग्रेस ने बुच पर कई कंपनियों से आर्थिक रिश्ते के आरोप लगाए हैं. जिन कंपनियों का नाम कांग्रेस ने लिया है, उनका स्पष्टीकरण भी आ गया है, मगर सेबी प्रमुख ने अपने होंठ पूरी तरह सिल रखे हैं. 

हिंडनबर्ग ने पूछा सवाल
अमेरिकी शॉर्ट सेलर 'हिंडनबर्ग रिसर्च' ने भी सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच की खामोशी पर सवालों के तीर दागे हैं. उसने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि माधबी पर हाल ही में कई आरोप लगे हैं, लेकिन इन आरोपों पर वह चुप्‍पी साधे हुए हैं और कोई सफाई नहीं दी है. ऐसा क्‍यों है? हिंडनबर्ग रिसर्च ने आगे लिखा ही - नए आरोपों के मुताबिक निजी परामर्श इकाई, जिसका 99% स्वामित्व सेबी अध्यक्ष माधबी बुच के पास है, ने सेबी द्वारा विनियमित कई सूचीबद्ध कंपनियों से भुगतान स्वीकार किया. ऐसा बुच के सेबी की पूर्णकालिक सदस्य रहते हुए किया गया. लेकिन बुच ने अपने ऊपर लगे इन आरोपों पर चुप्‍पी साधी हुई है और हफ्तों बाद भी सफाई नहीं दी है.

भारी पड़ेगी खामोशी?
जानकारों का मानना है कि माधबी पुरी बुच की खामोशी उन पर भारी पड़ सकती है. आरोपों पर सफाई न देकर कहीं न कहीं वह खुद आरोपों को बल दे रही हैं. हिंडनबर्ग के आरोपों पर उन्होंने तुरंत बयान जारी किया था. उनके पति धवल बुच की तरफ से भी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया गया था, लेकिन कांग्रेस के आरोपों पर दोनों खामोश हैं. जबकि जिन कंपनियों से बुच के रिश्ते की बात कांग्रेस ने कही है, वो सफाई पेश कर चुकी हैं. 

यहां अटकी है बात 
कुछ वक्त पहले खबर आई थी कि संसदीय लोक लेखा समिति (PAC) सेबी प्रमुख के खिलाफ आरोपों की जांच करने वाली है और इस महीने के अंत में उन्हें तलब किया जा सकता है. PAC की अध्यक्षता कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल कर रहे हैं और इसमें सत्तारूढ़ दल और कांग्रेस दोनों के सदस्य हैं. हालांकि, इस मामले में बात कितनी आगे बढ़ी इसे लेकर कोई जानकारी नहीं है.  बताया जा रहा है कि सेबी चीफ को तलब करने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों में मतभेद है. विपक्ष जहां चाहता है कि बुच को तलब किया जाए, वहीं भाजपा सांसद नियमों का हवाला देकर इसका विरोध कर रहे हैं. इस वजह से मामला अभी तक अटका हुआ है.

ऐसे हुई शुरुआत
 माधबी पुरी बुच पर आरोपों की शुरुआत सबसे पहले हिंडनबर्ग ने की थी. उसने आरोप लगाया था कि अडानी ग्रुप के विदेशी फंड में सेबी चीफ माधबी पुरी बुच और उनके पति की हिस्सेदारी है. रिपोर्ट में अडानी ग्रुप और सेबी के बीच मिलीभगत का भी आरोप था. हालांकि, सेबी चीफ और उनके पति धवल बुच ने आरोपों को खारिज किया था. इसके बाद कांग्रेस ने मामले को आगे बढ़ाया. पार्टी ने एक के बाद एक कई आरोप लगाए. कांग्रेस का यह भी कहना है कि सेबी चीफ के द्वारा प्रमोटेड कंसल्टेंसी कंपनी को करीब 3 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया. जिस समय बुच सेबी की पूर्णकालिक सदस्य थीं और सेबी महिंद्रा समूह के खिलाफ मामलों की जांच कर रहा था, उस समय अगोरा एडवाइजरी प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान किया गया. बुच के पास अगोरा के 99 फीसदी शेयर है. इस तरह यह सेबी कोड के सेक्शन 5 के तहत हितों के टकराव का मामला है.


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