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आखिर क्यों Indigo को गंभीरता से नहीं ले रही थी Airbus, इस किताब में हुआ खुलासा
इस किताब में इंडिगो के उस संघर्ष के बारे बताया गया है, जो उन्होंने उस दौर में किया जब इस फील्ड में कई प्लेयर काम कर रहे थे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
आज भारतीय एविएशन बाजार की सबसे बड़ी कंपनी बनने वाली इंडिगो (INDIGO) का सफर यहां तक ऐसे ही नहीं पहुंचा. कंपनी को यहां तक पहुंचाने वाले राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया ने कई परिस्थितियों का सामना किया. हाल ही में आई एक किताब स्काई हाई : द अनटोल्ड स्टोरी में उनके संघर्ष का एक ऐसा ही वाकया बताया गया है जिसमें एक समय ऐसा भी था जब दुनिया की सबसे बड़ी विमान निर्माता कंपनी राकेश और राहुल के 100 विमानों के ऑर्डर को गंभीरता से ले ही नहीं रही थी. तरुण शुक्ला की लिखी इस किताब में ऐसे ही कई और दिलचस्प वाकयों के बारे में बताया गया है.
आखिर क्या हुआ था ये पूरा मामला?
हॉर्पर कॉलिन्स पब्लिकेशन की बुक ‘स्काई हाई’: द अनटोल्ड स्टोरी में इस वाकये के बारे में बताते हुए राकेश और राहुल बताते हैं कि 2006 में भारतीय विमान क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए कई वर्षों तक योजना बनाने से लेकर सौदेबाजी करनी पड़ी. वो कहते हैं कि जिस समय वो भारत में अपने पैर पसारने की तैयारी कर रहे थे उस वक्त बोइंग का वर्चस्व कम हो चुका था और एयरबस की लोकप्रियता तेजी से आगे बढ़ रही थी. उस वक्त भारत में एयर बस के वाइस प्रेसीडेंट निगेल हारवुड ऐसे किसी भी व्यक्ति से मिलने में दिलचस्पी रखते थे जो विमान खरीदना चाहता हो. जब तक चेक पर साइन होकर डील फाइनल होती थी तब तक कई खरीदार पीछे हट जाते थे. ये पहचानना भी कठिन था कि कौन असली है और कौन नकली है.
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जब एयरबस के वीसी से मिले राहुल भाटिया
इन सभी परिस्थितियों के बीच जब एयरबस के वीसी को पता चला कि इंटरग्लोब एविएशन के राहुल भाटिया उनसे मिलना चाहते हैं तो वो तैयार हो गए. इस मुलाकात में राहुल के सफेद कुर्ते पैजामे ने एयरबस के वीसी पर गहरा प्रभाव छोड़ा और उन्होंने अपने हेडक्वॉर्टर इस मीटिंग की जानकारी दे दी. भाटिया का सुझाव था कि एयरबस के अधिकारी राकेश गंगवाल से भी मिले लेकिन वो उन्हें गंभीरता से लेने के मूड में नहीं थे. एयरबस के सीईओ लेही जो कि गंगवाल के दोस्त थे उन्हें लगा कि भारत में उनका कोई कनेक्शन नहीं है क्योंकि वो अमेरिका में बसे हुए थे. एयरबस को विश्वास नहीं हो रहा था कि भारत से कोई 100 विमानों का ऑर्डर कर सकता है. उनके लिए ये एक नॉनसेंस बात थी. आखिरकार ये 6 बिलियन की डील होने वाली थी.
विमानों की संख्या को गुप्त रखने की रणनीति
इधर इंटरग्लोब के राकेश और राहुल ये योजना बना रहे थे कि विमानों की सही संख्या को पहले जाहिर नहीं करना है. वो पहले इस बात से आश्वस्त होना चाहते थे ज्यादा विमानों के ऑर्डर करने पर डील में क्या बदलाव आता है. उन्होंने सोचा तो 20 25 विमानों के बारे में था लेकिन बातचीत 40 45 विमानों से की. गंगवाल एक सख्त नेगोसिएटर थे और अंत में उन्होंने गंगवाल को मान लिया. हालांकि गंगवाल के पास एयरबस के पास जाने का भी विकल्प था.
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