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थोक महंगाई फिर बढ़ी, जून में WPI 9.87% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
जून 2026 में देश की थोक महंगाई (Wholesale Price Index-WPI) बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 14 hours ago
देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिख रहा है. खुदरा महंगाई (CPI) के बाद अब जून 2026 में थोक महंगाई (WPI) भी बढ़कर 9.87 फीसदी पर पहुंच गई है, जो मई में 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, खनिज तेल, बेसिक मेटल और रसायन उत्पादों की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही. विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है.
खुदरा महंगाई के बाद WPI में भी उछाल
थोक महंगाई के आंकड़े ऐसे समय आए हैं, जब एक दिन पहले जारी आंकड़ों में खुदरा महंगाई (CPI) भी बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई थी. जून 2026 में देश की थोक महंगाई बढ़कर 9.87 फीसदी हो गई. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में यह दर 9.68 फीसदी थी. खाद्य वस्तुओं, मिनरल ऑयल, बेसिक मेटल और केमिकल उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते लगातार दूसरे महीने WPI महंगाई में तेजी दर्ज की गई है. वहीं, कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई 5.32 फीसदी दर्ज की गई, जो मई के 4.78 फीसदी से अधिक है. इससे साफ है कि खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है.
खाद्य वस्तुओं और कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी
जून में प्राथमिक वस्तुओं (Primary Articles) की महंगाई 4.99 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी हो गई. खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी 3.60 फीसदी से बढ़कर 5.49 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़कर 11.07 फीसदी हो गई. WPI फूड इंडेक्स भी 4.49 फीसदी से बढ़कर 6.14 फीसदी दर्ज किया गया, जो कृषि और खाद्य उत्पादों की बढ़ती लागत को दर्शाता है.
ईंधन महंगा, बिजली में राहत
ईंधन एवं बिजली श्रेणी की महंगाई जून में 27.41 फीसदी रही. हालांकि यह मई के 30.33 फीसदी से कुछ कम है, लेकिन अब भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. मिनरल ऑयल की महंगाई 46.48 फीसदी रही, जबकि कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई घटकर 34.75 फीसदी रह गई. दूसरी ओर, बिजली की कीमतों में 0.76 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत का दबाव बरकरार
जून में विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की महंगाई 7.48 फीसदी पर स्थिर रही. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के भीतर खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल की कीमतों में तेजी देखी गई. बेसिक मेटल और केमिकल सेक्टर में भी लागत का दबाव बना रहा.
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं और प्राथमिक उत्पादों की कीमतों में तेजी के कारण थोक महंगाई बढ़ी है. उनका कहना है कि यदि कच्चे माल और कृषि उत्पादों की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिलती, तो इसका असर खुदरा महंगाई और कंपनियों के मुनाफे दोनों पर पड़ सकता है. जून में WPI उम्मीद से अधिक बढ़ी है. उनके अनुसार, जुलाई में भी खाद्य महंगाई का दबाव बना रह सकता है, हालांकि वैश्विक कमोडिटी कीमतों में कुछ नरमी राहत दे सकती है. उन्होंने जुलाई में WPI महंगाई करीब 9 फीसदी रहने का अनुमान जताया है.
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