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कौन हैं श्रीधर वेम्बू और TATA-Adani को टक्कर देने का क्या है उनका प्लान?
देश में आने वाले समय में कई सेमीकंडक्टर प्लांट लगने वाले हैं. कई कंपनियों ने इसके लिए आवेदन किये हैं और अब इसमें एक नया नाम जुड़ गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने के मोदी सकरार के सपने को पूरा करने के लिए कई कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है. इसमें एक नया नाम जुड़ गया है. खबरों के अनुसार, टेक्नोलोजी कंपनी जोहो कॉर्पोरेशन (Zoho Corporation) ने भी एक पार्टनर के साथ इसके लिए आवेदन किया है. कंपनी बतौर निवेशक इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है.
आवेदन की मंजूरी का इंतजार
जोहो कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने साझेदारी में चिप मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी स्थापित करने के लिए सरकार के पास आवेदन दिया है. हालांकि, अभी आवेदन को मंजूरी नहीं मिली है. फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि Zoho ने इसके साथ पार्टनरशिप के है. बताया जा रहा है कि श्रीधर वेम्बू की कंपनी सेमीकंडक्टर प्लांट के लिए 700 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी.
ये भी लगा रहे हैं प्लांट
श्रीधर वेम्बू की कंपनी के आवेदन को यदि मंजूरी मिलती है, तो वह टाटा, वेदांता और अडानी समूह के लिए चुनौती पेश करेगी. टाटा समूह गुजरात और असम में प्लांट लगाएगा. गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ताइवान की कंपनी पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्प के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर फैब प्लांट स्थापित करेगी. इसके अलावा, टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड असम में चिप असेंबली और टेस्टिंग यूनिट भी लगाएगी. अडानी समूह ने भी इसके लिए इजरायल की कंपनी से हाथ मिलाया है. अडानी समूह महाराष्ट्र में 10 अरब डॉलर की लागत से सेमीकंडक्टर प्लांट लगाएगा. वहीं, अनिल अग्रवाल के वेदांता भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है.
सादगी के लिए हैं फेमस
अब जब श्रीधर वेम्बू के सेमीकंडक्टर मिशन की बात निकली है, तो उनके बारे में भी कुछ जान लेते हैं. श्रीधर वेम्बू अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते हैं. 39,000 करोड़ की फर्म के मालिक होने के बाद भी वह साइकिल से चलना पसंद करते हैं. तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाले श्रीधर ने दसवीं तक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, फिर आईआईटी मद्रास में प्रवेश लिया और इसके बाद 1989 में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री भी हासिल की.
अमेरिका से लौटे भारत
अमेरिका में लंबा समय गुजारने के बाद जब श्रीधर ने भारत आकर अपना बिज़नेस शुरू करने की बात कही, तो उनके रिश्तेदार हैरान रह गए. वह समझ नहीं पा रहे थे कि अमेरिका में सबकुछ वह भारत क्यों आना चाहते हैं. 1996 में श्रीधर वेम्बू ने अपने भाई के साथ मिलकर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट फर्म एडवेंटनेट की शुरुआत की. 2009 में उन्होंने इस कंपनी का नाम बदलकर जोहो कॉर्पोरेशन रख दिया. यह कंपनी सॉफ्टवेयर सॉल्युशन सर्विस मुहैया कराती है.
गांव से की शुरुआत
खास बात है कि श्रीधर ने अपनी कंपनी शुरू करने के लिए किसी महानगर को नहीं चुना बल्कि उन्होंने तमिलनाडु के तेनकासी जिले में इसकी स्थापना की. दरअसल, वह ग्रामीण क्षेत्रों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट बिजनेस का विस्तार करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने इस गांव को चुना. Zoho के यूजर्स का आंकड़ा 6 करोड़ को पार कर गया है. इसके ग्राहकों में लिवाइस, अमेजन, फिलिप्स, ओला, शाओमी और जोमेटो जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं. श्रीधर ने अमेरिका के साथ-साथ जापान, सिंगापुर, ताइवान जैसे बाजारों को गहराई से जानने के बाद भारत में अपना कारोबार शुरू किया. आज वह न केवल एक सफल बिजनेसमैन हैं बल्कि लोगों के लिए प्रेरणा भी हैं.
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