✕

होम / बिजनेस / अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago

पलक शाह 

जिस दिन सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा गिरा, उस दिन स्क्रीन पर इंडेक्स सबसे कम दिलचस्प चीज थी. असली कहानी अडानी के शेयरों में थी और इसे समझने के लिए आपको फ्लोरिडा की एक फंड हाउस और उस सौदे से शुरुआत करनी होगी, जो मुंबई के ज्यादातर लोगों के सुबह की चाय खत्म करने से पहले ही हो चुका था.

वह फंड हाउस GQG Partners है. और गुरुवार को उसने फैसला किया कि अब वह ITC के साथ नहीं रहना चाहता.

शुरुआती कारोबार

प्री-ओपन ब्लॉक विंडो में करीब 36.66 करोड़ ITC शेयर, यानी कंपनी के लगभग 2.9 फीसदी शेयर, औसतन ₹257 प्रति शेयर की कीमत पर हाथ बदले. इस सौदे की कीमत करीब ₹9,437 करोड़ थी. रिपोर्टों में GQG को संभावित विक्रेता बताया गया और एक बैंकर ने इसे "क्लीन-आउट ट्रेड" कहा, जिसका सीधा मतलब है कि विक्रेता पूरी तरह बाहर निकलना चाहता था, न कि सिर्फ अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा कम करना.

खरीदारों की कोई कमी नहीं थी. एक विदेशी लॉन्ग-ओनली फंड ने कथित तौर पर ब्लॉक का करीब एक-तिहाई हिस्सा खरीदा. घरेलू म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया, ICICI प्रूडेंशियल, SBI, कोटक और आदित्य बिड़ला ने बाकी हिस्सेदारी खरीद ली. इसके बावजूद ITC 5 फीसदी गिरकर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गया. 2026 में अब तक शेयर करीब 30 फीसदी गिर चुका है.

यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. इस सप्ताह की शुरुआत में GQG ने बताया था कि उसने मई 2025 से 5 अक्टूबर 2026 के बीच खुले बाजार में पहले ही ITC के 3.97 करोड़ शेयर बेच दिए थे, जिससे उसकी संयुक्त हिस्सेदारी 3.48 फीसदी से घटकर 3.17 फीसदी रह गई थी. गुरुवार का ब्लॉक वह क्षण था जब धीमी निकासी जोरदार बिकवाली में बदल गई.

GQG को क्यों बेचना पड़ रहा है

इसका जवाब GQG की अपनी किताबों में है. 2026 की पहली छमाही में ग्राहकों ने फर्म से शुद्ध रूप से 15.1 अरब डॉलर निकाल लिए. यह लगातार छठा महीना था जब फर्म में आने वाले पैसे की तुलना में बाहर जाने वाला पैसा ज्यादा रहा. विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि पांच साल का कमजोर प्रदर्शन रिसर्च हाउस की रेटिंग में गिरावट और निवेशकों के और तेजी से बाहर निकलने की स्थिति पैदा कर सकता है.

रिडेम्पशन का सामना कर रहे फंड मैनेजर के पास यह चुनने का विकल्प नहीं होता कि उसे बेचना है या नहीं. उसके पास सिर्फ यह चुनने का विकल्प होता है कि क्या बेचना है. और भारत में GQG के दो सबसे बड़े दांव हर स्ट्रीट ट्रेडर को पता हैं: ITC और अडानी समूह.

यही कारण है कि गुरुवार का ब्लॉक ITC से कहीं ज्यादा मायने रखता है.

डीलिंग रूम में फुसफुसाहट

यहां बाजार की चर्चा सार्वजनिक रिकॉर्ड से आगे निकल जाती है.

कई बाजार प्रतिभागियों का आरोप है कि GQG के ट्रेड संभालने वाले कुछ संस्थानों को ITC ब्लॉक के बारे में पहले से जानकारी थी. उनके मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों से जुड़े सिंगापुर स्थित कुछ हेज फंड उन शेयरों में शॉर्ट पोजीशन बनाने लगे, जिनमें GQG की बड़ी हिस्सेदारी है. अडानी मुख्य निशाना था.

ट्रेडरों के मुताबिक इसका तर्क जितना सरल है, उतना ही निर्मम भी. अगर GQG रिडेम्पशन पूरा करने के लिए ITC बेच रहा है, तो बाजार जल्द ही यह पूछेगा कि अगली बिक्री किसमें होगी. अडानी के शेयर इसका स्पष्ट जवाब हैं. उस डर के फैलने से पहले उन्हें शॉर्ट कर दो और फिर डर को बाकी काम करने दो.

एक वरिष्ठ फंड मैनेजर ने इस संवाददाता को बताया कि गोल्डमैन सैक्स पार्टिसिपेटरी नोट्स के जरिए बिकवाली गुरुवार को भारी रही. ये ऐसे ऑफशोर इंस्ट्रूमेंट हैं जो विदेशी खिलाड़ियों को भारत में रजिस्टर हुए बिना भारतीय शेयरों में पोजीशन लेने की सुविधा देते हैं.

इनमें से किसी भी दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी. किसी नियामक ने कोई टिप्पणी नहीं की है और इसमें शामिल फंडों के नाम भी सामने नहीं आए हैं. लेकिन अगर किसी ने किसी ब्लॉक डील की पहले से मिली जानकारी के आधार पर कारोबार किया है, तो यह मामला सीधे SEBI के अधिकार क्षेत्र में आता है.

स्क्रीन पर क्या दिखा

कारण चाहे जो भी हो, कीमतों में हुई हलचल उस पैटर्न से मेल खाती है जिसका ट्रेडर वर्णन कर रहे हैं.

समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज 7 फीसदी गिरकर ₹2,566 पर आ गया, जबकि यह ₹2,744 पर था. यह 14 मई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और अब छह कारोबारी सत्रों में 13 फीसदी गिर चुका है. अडानी ग्रीन एनर्जी दोपहर 2:39 बजे तक 6.71 फीसदी गिरकर ₹1,251.40 पर था. अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस 6 फीसदी गिरकर ₹1,241.30 पर आ गया और अडानी पावर 5.6 फीसदी गिरकर ₹185.60 पर पहुंच गया.

एक बार इन हाई-बीटा शेयरों ने अहम तकनीकी स्तरों को तोड़ा, तो बिकवाली खुद ही बढ़ने लगी. स्टॉप-लॉस ट्रिगर हुए, मार्जिन कॉल आए और लीवरेज वाले ट्रेडरों को गिरते बाजार में ही बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा. बाहर से देखने पर सफल शॉर्ट रेड इसी तरह दिखाई देता है. वास्तव में ऐसा हुआ या नहीं, यही वह सवाल है जिसका जवाब नियामकों को देना पड़ सकता है.

यहां एक विडंबना है, जिसे बाजार नजरअंदाज नहीं कर पाया. 2023 में जब हिंडनबर्ग की रिपोर्ट ने अडानी के शेयरों को गिरावट में धकेल दिया था, तब राजीव जैन ही थे जो अरबों डॉलर लेकर आगे आए और गिरावट को रोकने में मदद की. गुरुवार को ट्रेडर यह दांव लगा रहे थे कि वही निवेशक अब विक्रेता बन सकता है.

एलन मस्क की एंट्री

जैसे इस दिन को एक और मोड़ की जरूरत थी, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी इसमें शामिल हो गए.

रातोंरात एलन मस्क ने X पर अज्ञात "कुलीन कारोबारियों" पर आरोप लगाया कि वे भारत के इंटरनेट बाजार पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारत से बाहर रख रहे हैं. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया और कोई सबूत भी पेश नहीं किया. इसकी जरूरत भी नहीं पड़ी. भारत का टेलीकॉम बाजार मुकेश अंबानी की Jio और सुनील मित्तल की Airtel के पास है और इस पोस्ट को दोनों पर निशाना साधने के तौर पर व्यापक रूप से देखा गया.

नई दिल्ली ने इस दावे को निराधार बताया और कहा कि उसकी सैटेलाइट लाइसेंसिंग व्यवस्था निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण है. लेकिन बाजार बयानों पर नहीं, भावनाओं पर कारोबार करते हैं. निफ्टी का सबसे भारी शेयर रिलायंस 2.5 फीसदी गिर गया, ऐसे दिन जब इंडेक्स के पास किसी और भारी-भरकम शेयर की गिरावट को सहने की गुंजाइश नहीं थी.

पृष्ठभूमि

इनमें से कुछ भी शांत बाजार में नहीं हुआ. एक दिन पहले RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.5 फीसदी कर दिया था. यह करीब चार साल में पहली बढ़ोतरी थी. ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. विदेशी निवेशक लगातार नौ सत्रों से बिकवाली कर रहे हैं और करीब ₹57,000 करोड़ निकाल चुके हैं.

तो हां, गुरुवार की गिरावट की आधिकारिक वजह कच्चा तेल, RBI और विदेशी बिकवाली है. तीनों वास्तविक हैं. लेकिन ये बताते हैं कि बाजार कमजोर क्यों था. ये यह नहीं बताते कि अडानी को बाकी शेयरों की तुलना में इतना ज्यादा नुकसान क्यों हुआ.

निचोड़

इसके एक ब्लॉक डील के साथ खत्म होने की संभावना कम है. GQG के पास अभी भी ITC में 3.17 फीसदी हिस्सेदारी और अडानी समूह की कई कंपनियों में बड़ी हिस्सेदारी है और जब तक रिडेम्पशन जारी रहेगा, बाजार यह पूछता रहेगा कि वह अगली बिक्री किसमें करेगा. शॉर्ट सेलर्स इस जवाब के लिए अपनी पोजीशन बनाते रहेंगे. विदेशी फंड अब भी बाहर निकल रहे हैं और बाहर जाने वाला हर रुपया करेंसी पर दबाव बढ़ा रहा है.

एक सकारात्मक पहलू जरूर रहा. BofA Securities ने करीब दो साल की सतर्कता के बाद भारतीय इक्विटी पर सकारात्मक रुख अपनाया है और निफ्टी के लिए 26,200 का लक्ष्य देखा है. गुरुवार शाम को, जब स्क्रीन अब भी लाल थीं, यह संख्या काफी दूर नजर आ रही थी.

पलक शाह

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)


टैग्स
सम्बंधित खबरें

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

3 hours ago

डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार

सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.

6 hours ago

पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर RBI का एक्शन, शेड्यूल बैंकों की सूची से बाहर किया; पहले रद्द हो चुका है लाइसेंस

बैंक का लाइसेंस इसी साल अप्रैल में नियमों का पालन नहीं करने के चलते रद्द किया गया था. इससे पहले आरबीआई ने बैंक के खिलाफ कई कारोबारी पाबंदियां भी लगाई थीं.

7 hours ago

शारजाह में 3 अरब डॉलर निवेश करेंगी भारतीय कंपनियां, खाड़ी बाजारों के लिए खोरफक्कन पोर्ट बनेगा नया गेटवे

*हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते समुद्री तनाव के बीच शारजाह भारतीय कंपनियों को निवेश का बड़ा अवसर दे रहा है. अमीरात को 2026 और 2027 के दौरान भारत से कुल 3 अरब डॉलर निवेश मिलने की उम्मीद है.

7 hours ago

UPI पर MDR की तारीख बढ़ी आगे, अब 1 जनवरी 2027 से लागू होने की संभावना; छोटे कारोबारियों को छूट संभव

बैठक में 40 लाख रुपये तक सालाना कारोबार वाले व्यवसायों को MDR से छूट देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और कारोबारियों पर डिजिटल भुगतान की लागत का बोझ कम रखना है.

9 hours ago


बड़ी खबरें

भारतीय दीवार पर किसका होगा कब्जा?

जैसे-जैसे बिरला ओपस, जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स और पिडिलाइट की हैशा स्थापित दिग्गजों को चुनौती दे रही हैं, त्योहारी सीजन यह दिखाएगा कि क्या वितरण क्षमता, डीलर अर्थशास्त्र और पेंटर का प्रभाव लंबे समय से चली आ रही उपभोक्ता आदतों को बदल सकता है.

3 hours ago

अडानी समूह पर शॉर्ट-सेलिंग हमले की फुसफुसाहट

राजीव जैन के GQG ने ITC में अपनी हिस्सेदारी बेच दी. डीलिंग रूम में चर्चा है कि कुछ ऑफशोर खिलाड़ियों को इसका पहले से अंदाजा था और उन्होंने पहले ही फंड की प्रमुख होल्डिंग्स में शॉर्ट पोजीशन बना ली थी. एलन मस्क की X पोस्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में बिकवाली को और बढ़ा दिया.

1 hour ago

विसर्जित भारत

2047 तक विकसित, दिवाली 2026 तक विसर्जित

3 hours ago

2037-38 की जरूरत की 84% हुई कोल्ड स्टोरेज क्षमता, पैक-हाउस और रीफर वाहनों की भारी कमी: रिपोर्ट

रिपोर्ट में प्रमुख बागवानी उत्पादन केंद्रों के आसपास बहु-वस्तु और अलग-अलग तापमान पर काम करने वाली सुविधाएं विकसित करने की जरूरत बताई गई है. इसके साथ भरोसेमंद रेफ्रिजरेटेड परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.

3 hours ago

डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार

सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.

6 hours ago