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डीजल एक्सपोर्ट एक साल के टॉप पर, सितंबर में भारत से रोजाना 6.2 लाख बैरल का निर्यात; यूरोप सबसे बड़ा बाजार
सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वैश्विक स्तर पर डीजल की कीमतों में तेजी के बीच भारत से डीजल का निर्यात सितंबर में एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया. कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत ने रोजाना करीब 6.2 लाख बैरल डीजल का निर्यात किया. इसमें करीब आधा हिस्सा यूरोप भेजा गया. बेहतर निर्यात मार्जिन ने भारतीय रिफाइनरों को घरेलू बाजार के बजाय विदेशी बाजारों में डीजल बेचने के लिए प्रोत्साहित किया.
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, लेकिन देश में बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन होता है और उनका निर्यात भी किया जाता है. सितंबर में डीजल निर्यात में आई तेजी ऐसे समय में हुई है जब यूरोप और अमेरिका समेत कई बाजारों में डीजल की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं.
यूरोप को सबसे ज्यादा डीजल भेजा गया
केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारत से रोजाना करीब 2.8 लाख बैरल डीजल यूरोप भेजा गया. यह अगस्त के मुकाबले करीब 80 फीसदी अधिक है. अफ्रीका के ग्राहकों को रोजाना करीब 2 लाख बैरल, एशिया को 50,000 बैरल और अमेरिका को करीब 40,000 बैरल डीजल भेजा गया. करीब 50,000 बैरल की खेप ऐसे गंतव्यों को गई, जिनकी जानकारी उपलब्ध नहीं है. केप्लर के अनुसार, सितंबर में रूस को भारत से डीजल की कोई खेप नहीं भेजी गई.
बढ़े मार्जिन ने दिया एक्सपोर्ट का प्रोत्साहन
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, डीजल की बढ़ती कीमतों और बेहतर मार्जिन का असर भारत के निर्यात पर पड़ा है. केप्लर में रिफाइनिंग के लीड एनालिस्ट निखिल दुबे ने बताया कि सितंबर में दुबई के मुकाबले सिंगापुर डीजल क्रैक 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था. डीजल क्रैक रिफाइनर के लिए कच्चे तेल को डीजल में बदलने से मिलने वाले अनुमानित मार्जिन को दर्शाता है. ऊंचे मार्जिन ने रिफाइनरों के लिए डीजल उत्पादन और उसके निर्यात को बढ़ाने का मजबूत प्रोत्साहन दिया.
सप्लाई में रुकावट से बढ़ीं कीमतें
सितंबर में बेंचमार्क डीजल की कीमतें एक साल पहले की तुलना में करीब दोगुनी थीं. पश्चिम एशिया और रूस में रिफाइनरियों तथा शिपिंग से जुड़ी रुकावटों के कारण वैश्विक बाजार में डीजल की आपूर्ति प्रभावित हुई. कम आपूर्ति और ऊंची कीमतों के बीच चीन ने भी डीजल के निर्यात पर रोक लगाई है. यूरोप डीजल के आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए वैश्विक आपूर्ति में बदलाव का असर वहां की मांग और कीमतों पर ज्यादा पड़ता है.
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को फायदा
भारत के डीजल निर्यात में रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी की अहम भूमिका है. सितंबर में डीजल के निर्यात पर लागू विंडफॉल टैक्स करीब 37 डॉलर प्रति बैरल था, जिससे निर्यातकों के मार्जिन पर दबाव पड़ा. हालांकि, यह टैक्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर स्थित केवल निर्यात के लिए संचालित होने वाली रिफाइनरी पर लागू नहीं होता. ऐसे में वैश्विक स्तर पर डीजल के ऊंचे मार्जिन का फायदा इस रिफाइनरी को अपेक्षाकृत ज्यादा मिल सकता है.
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