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क्या AI बनाने की रेस में दांव पर लग गई है सुरक्षा, कई देशों में हो रहा है मंथन ?
AI के ऊपर काम कर रही कपंनियों के द्वारा दूसरी कंपनियों की आक्रामक चालों को नियंत्रित करने के लिए अगली तकनीक को लॉन्च करना चाहती हैं जो उनके चैटबोट्स को ईंधन दे सकती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मौजूदा समय में तकनीक पर काम कर रही है कंपनियों में हमेशा यही प्रतिस्पर्धा रहती है कि आखिर कौन किससे बेहतर तकनीक लेकर आता है. इसी कड़ी में हर कंपनी एक दूसरे से आगे निकलना चाहती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मार्च में, Google के दो कर्मचारियों ने जिनका काम कंपनी के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्पादों की समीक्षा करना है, उन्होंने Google को AI चैटबॉट लॉन्च करने से रोकने की कोशिश की. उनका मानना था कि यह गलत और खतरनाक ट्रेंड उत्पन्न कर सकते है. मीडिया रिपोर्ट ये भी कहती है कि दस महीने पहले माइक्रोसॉफ्ट में भी कुछ कर्मचारियों ने इसी तरह की चिंताओं को उठाया था. उन्होंने कई दस्तावेजों में लिखा है कि नियोजित चैटबॉट के पीछे एआई तकनीक फेसबुक ग्रुप को गलत सूचनाओं से भर सकती है, जो नुकसानदायक हो सकती है।
माइक्रोसॉफ्ट और गूगल लॉन्च कर चुके हैं चैटबोट
सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट ने पहली बार फरवरी में एक शानदार इवेंट के जरिए अपने बिग सर्च इंजन को जारी कर दिया और उसके बाद गूगल ने भी लगभग 6 महीने की देर से अपने चैटबोट को लॉन्च कर दिया. कंपनियों की इस प्रतिस्पर्धा ने नवंबर में एक दिलचस्प मोड़ उस वक्त ले लिया जब Microsoft के साथ काम करने वाले एक सैन फ्रांसिस्को स्टार्टअप OpenAI ने चैटबॉट जारी कर दिया, ये लोगों की कल्पना के बारे में बता सकता है और अब इसके अनुमानित 100 मिलियन मासिक उपयोगकर्ता हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चैटजीपीटी की अभूतपूर्व सफलता ने गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को पिछले लंबे समय से समाज पर टेक्नोलॉजी के असर को लेकर बनाई अपनी नैतिकतावादी लाइन से रिस्क लेने पर मजबूर कर दिया. मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि ये बात कंपनी के 15 मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों और दस्तावेजों के आधार पर सामने आई है.
हर कंपनी जल्द लॉन्च करना चाहती है तकनीक
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जल्द से जल्द एक नए एआई के निर्माण करने की जल्दबाजी को माइक्रोसॉफ्ट के एक तकनीकी कार्यकारी सैम शिलेस द्वारा पिछले महीने भेजे गए एक आंतरिक ईमेल में स्पष्ट किया गया था. उन्होंने ईमेल में लिखा था, जिसे एक मीडिया हाउस ने पब्लिश किया था और उन्होंने लिखा था कि इस वक्त उन चीजों के बारे में चिंता करना एक घातक गलती थी जिसे बाद में भी ठीक किया जा सकता है. जब टेक इंडस्ट्री अचानक एक नई तरह की तकनीक की ओर बढ़ रही तो ऐसे में लॉन्ग टर्म विनर वही होता है जो उस उत्पाद को पहले पेश करता है, क्योंकि उन्होंने इसकी पहले शुरुआत की थी, उन्होंने अपने मेल में ये भी लिखा कि कभी-कभी अंतर हफ्तों में भी मापा जाता है.
पिछले हफ्ते, उद्योग की चिंताओं और जोखिम लेने वाले 1,000 से अधिक शोधकर्ताओं और उद्योग के नेताओं के बीच तनाव सामने आया जिसमें ईलॉन मस्क और ऐप्पल के सह-संस्थापक स्टीव वोज्नियाक शामिल थे, जिन्होंने पावरफुल एआई तकनीक के विकास में छह महीने के ठहराव का आह्वान किया था. उन्होंने कहा कि इससे समाज को रिस्क हो सकता है.
कई देशों में खड़े हो रहे हैं इस पर सवाल
इस मामले में अलग-अलग देशों में कई स्तर पर एआई की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं. एक ओर यूरोपीय संघ ने एआई को रेग्यूलेट करने के लिए कानून का प्रस्ताव दिया है तो इटली ने पिछले सप्ताह अस्थायी रूप से चैटजीपीटी पर प्रतिबंध लगा दिया है. संयुक्त राज्य अमेरिका में, राष्ट्रपति जो बॉइडेन मंगलवार को एआई की सुरक्षा पर सवाल उठाकर इस तकनीक पर सवाल उठाने वाला नवीनतम देश बन गया है. बॉइडेन ने इसे लेकर कहा कि टेक कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने उत्पादों को सार्वजनिक करने से पहले सुनिश्चित करें कि वे सुरक्षित हैं या नहीं.
तकनीक को लॉन्च कर जोखिम लेने को तैयार कंपनियां
इस पूरी तकनीक को लेकर अब जो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, वे कभी चिंता का विषय थे, जिसने कुछ कंपनियों को नई तकनीक पर होल्ड करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने जान लिया था कि समय से पहले एआई जारी करना शर्मनाक भी हो सकता है. पांच साल पहले, उदाहरण के लिए, माइक्रोसॉफ्ट ने जल्दी से टे नामक एक चैटबॉट खींच लिया, क्योंकि ये चैटबोट रेसिस्ट रिस्पांस दे रहा था. इस मामले में रिसर्चरों का ये भी कहना है इन्हें विकसित करने वाले इंजीनियरों के खुद इन्हें समझे बिना गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां इन्हें लॉन्च करके जोखिम लेने को तैयार हैं. कंपनियों का कहना है कि उन्होंने इसके अंदर फिल्टरेशन टूल लगाया है जो इन्हें हेट स्पीच से बचाता है.
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