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मुश्किलों के के समुंदर में घिरे Byju Raveendran के पास अब क्या हैं विकल्प?
बायजू के निवेशकों द्वारा बुलाई गई EGM में बायजू रवींद्रन को हटाने का प्रस्ताव पारित हो गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
बायजू रवींद्रन (Byju Raveendran) की मुश्किलों में इजाफा हो गया है. वह अपनी ही बनाई हुई कंपनी से बाहर निकलने की दहलीज पर पहुंच गए हैं. बायजू के निवेशकों के एक समूह ने शुक्रवार को बुलाई गई असाधारण आम बैठक (EGM) में कुछ बड़े फैसले लिए हैं. बैठक में शामिल सदस्यों ने बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन और उनके परिवार को कंपनी से बाहर करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है. अब सवाल ये उठता है कि बायजू रवींद्रन के पास कंपनी में बने रहने के क्या विकल्प हैं?
किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
बायजू के बोर्ड में फिलहाल बायजू रवींद्रन, उनके भाई रीजू रवींद्रन और पत्नी दिव्या गोकुलनाथ शामिल हैं. जिनके पास करीब 25% हिस्सेदारी है. जबकि बायजू के निवेशकों में हॉलैंड की इन्वेस्टमेंट कंपनी Prosus, जनरल अटलांटिक, पीक-15 पार्टनर्स, सोफिना, आउल, चैन जुकरबर्ग इनिशिएटिव और सैंड्स हैं. बायजू में इनकी कुल मिलाकर लगभग 30% हिस्सेदारी है. निवेशकों द्वारा बुलाई गई EGM में कंपनी के निदेशक मंडल को बदलने, बायजू रवींद्रन, उनकी पत्नी एवं कंपनी की सह-संस्थापक दिव्या गोकुलनाथ और उनके भाई ऋजु रवींद्रन को बोर्ड से हटाने के प्रस्ताव को पारित कर दिया गई. हालांकि, रवींद्रन और उनका परिवार इस बैठक में शामिल नहीं हुआ.
Prosus ने किया ये बड़ा दावा
बायजू रवींद्रन का दावा है कि यह बैठक और उसमें लिए गए फैसले अवैध हैं और कानून के विपरीत हैं. उन्होंने एक बयान जारी कर कहा है कि ईजीएम के दौरान चुनिंदा शेयरधारकों के एक छोटे समूह की ओर से प्रस्ताव पारित किए गए जो अमान्य और अप्रभावी हैं. हालांकि, Prosus का कहना है कि निवेशकों ने कानून के दायरे में रहते हुए सबकुछ किया है. प्रोसस के अनुसार, शेयरधारकों और महत्वपूर्ण निवेशकों के रूप में, हम ईजीएम बैठक की वैधता और इसके निर्णायक नतीजे पर अपनी स्थिति को लेकर आश्वस्त हैं, जिसे हम अब उचित प्रक्रिया के अनुसार कर्नाटक उच्च न्यायालय में पेश करेंगे. उसका यह भी कहना है कि 60% शेयरहोल्डिंग वाले निवेशकों ने कंपनी में इस बदलाव के पक्ष में मतदान किया है.
अब हाई कोर्ट पर हैं निगाह
बायजू का कहना है कि किसी भी सूरत में ये प्रस्ताव केवल बोर्ड से बैठक में पारित सिफारिशों पर विचार करने का अनुरोध करते हैं. उनका कंपनी या उसकी निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर कोई बाध्यकारी प्रभाव नहीं है. कंपनी ने आगे कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने उसे अंतरिम राहत दी थी और साफ तौर पर कहा था कि बैठक के दौरान लिया गया कोई भी निर्णय अगली सुनवाई तक लागू नहीं होगा. बायजू रवींद्रन के पास निवेशकों के फैसले को अदालत में चुनौती देने का विकल्प खुला है. वह EGM से पहले ही कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं और इस मामले में अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी. यदि बायजू रवींद्रन यह साबित कर पाते हैं कि EGM अवैध है, तो उन्हें राहत मिल सकती है.
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