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नॉन कम्यूनिकेबल बीमारियों को लेकर हम सभी को मिलकर काम करना होगा-डॉ पॉल
इस कार्यक्रम को चलाने के लिए बागची दंपत्ति ने अहमदाबाद यूनिवर्सिटी को 55 करोड़ रुपये का डोनेशन दिया है. इससे फिजिकल, डिजिटल और इंटिलेक्चुअल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में शुरू हुए बागची स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के नेतृत्व में मंगलवार को आयोजित हुए एक कार्यक्रम में नीति आयोग के हेल्थ मेंबर डॉ वीके पॉल ने कहा कि गैर संचारी बीमारियों से निपटने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा. सरकार प्राइमरी हेल्थकेयर से लेकर दूसरे क्षेत्रों में काम कर रही है लेकिन उसमें देश की जनता का साथ आना जरूरी है. इस पैनल में उनके साथ आईसीएमआर के वैज्ञानिक और एनसीडी डिविजन के हेड डॉ. आर एस धालीवाल, जॉर्ज इंस्टीटयूट ऑफ साइंसेस के एक्जिक्यूटिव डॉयरेक्टर डॉ. विवेकानंद झा और झपीजो की न्यूट्रनिस्ट डॉ. स्वेता खंडेलवाल शामिल रहे.
लाइफस्टाल इस मामले में सबसे अहम
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी के पॉल ने कहा कि एनसीडी में कई विषयों को लेकर इस क्षेत्र के जानकारों ने अपनी बात उठाई है. इसमें नमक से लेकर शुगर तक का लगातार बढ़ता इस्तेमाल और हमारी लाइफस्टाइल से होने वाली बीमारियां ज्यादा शामिल हैं. उन्होंने कहा कि आज लाइफस्टाइल के कारण ओबेसिटी की बीमारी से हर कोई जूझ रहा है. हमारे फूड पर नजर रखने के फूड रेग्यूलेटर संस्थाए काम कर रही है. उन्होंने रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म को लेकर कहा कि इसमें जनता की भागीदारी के बिना सफलता नहीं पाई जा सकती है.
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सुब्रोतो बागची ने कही ये बात
पब्लिक हेल्थ के विषय पर बिजनेस वर्ल्ड से सीधे बात करते हुए सुब्रतो बागची ने कहा कि आपकी बात बिल्कुल सही है कि बातें तो बहुत होती हैं लेकिन काम के बीच में काफी गैप है. हिंदुस्तान में जो काम हुआ है उसमें बड़ा काम हुआ है. अब वो भले ही नेशनल मलेरिया इरेडीकेशन प्रोग्राम हो, पोलियो मुक्त भारत का प्रोग्राम रहा हो इसका काफी इम्पैक्ट रहा है. यही नहीं इम्यूनाइजेशन को लेकर जो प्रोग्राम चलाया गया उसकी वजह से आप और हम यहां बैठे हैं.अगर ये प्रोग्राम नहीं होते तो शायद ये हो नहीं पाता.
सवाल ये उठता है कि आगे चलकर इसमें क्या क्या चुनौतियां आने वाली हैं. अगर आप देखें तो हम पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाले देश हैं. कहा जाता है कि 2060 तक इंडिया की पॉप्यूलेशन और बढ़ेगी. इसका सबसे बड़ा असर मदर और चाइल्ड के उपर रहेगा. आज इंडिया में मदर चाइल्ड न्यूट्रिशन सबसे बड़ी चुनौती है. अगर हमें हेल्थ सेक्टर के लिए काम करना है तो उसके लिए हमें बेंचमार्क बनाने होंगे. रोडमैप बनाने का काम उसके बाद शुरू होगा.
आशा वर्कर, एएनएम और आंगनवाणी है रीढ़ की हड्डी
सुस्मिता बागची ने पब्लिक हेल्थ को लेकर हाईजीन को लेकर कहा कि हमारे देश में आशा वर्कर, एएनएम और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हेल्थ सिस्टम की सबसे बड़ी रीढ है. अगर हमें हाइजीन और हेल्दी फूड की तरफ आगे बढ़ना है तो उसके लिए जरूरी है कि हम इसे अपने बच्चों को शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण देना होगा. हमें उन्हें इसके बारे में अच्छे से सिखाना होगा. सबसे बड़ी बात ये है कि कोरोना के समय जिस तरह से हमने अपने बच्चों को हाथ धोना सिखाया उसी तरह से हमें इसे लेकर उन्हें छोटी छोटी बातों को सिखाना होगा.
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