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अमेरिका में बढ़ा भारत में बने स्मार्टफोन का दबदबा, Apple के दम पर 47% उछला निर्यात
भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. अप्रैल 2026 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात सालाना आधार पर 47.24 फीसदी बढ़कर 2.43 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. इस वृद्धि में एप्पल (Apple) की अहम भूमिका रही है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला आयात शुल्क लाभ समाप्त हो चुका है.
अमेरिकी बाजार में मजबूत हुई भारत की हिस्सेदारी
अप्रैल 2025 में भारत ने अमेरिका को 1.65 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात किए थे, जो एक साल बाद बढ़कर 2.43 अरब डॉलर से अधिक हो गए. अप्रैल 2026 में अमेरिका को भारत के कुल 8.47 अरब डॉलर के निर्यात में अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 29 फीसदी रही. वहीं, अमेरिका के कुल स्मार्टफोन आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है.
Apple की रणनीति ने बढ़ाई निर्यात की रफ्तार
अमेरिकी बाजार के लिए भारत से स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने में एप्पल की रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. पिछले कुछ महीनों से यह आशंका जताई जा रही थी कि चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला शुल्क लाभ खत्म होने के बाद कंपनी की उत्पादन शिफ्टिंग की गति धीमी पड़ सकती है. हालांकि, ताजा आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अब भी भारत को अपने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
वित्त वर्ष 2025-26 में 86 फीसदी बढ़ा निर्यात
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात 10.56 अरब डॉलर से बढ़कर 19.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह सालाना आधार पर 86.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है. इस अवधि में भारत में निर्मित iPhone के कुल निर्यात मूल्य का लगभग 78 फीसदी हिस्सा अमेरिका भेजा गया. एप्पल के अलावा लेनेवो (Lenovo) जैसी कंपनियां भी अमेरिका को भारत से स्मार्टफोन निर्यात कर रही हैं.
ड्यूटी लाभ खत्म होने के बाद भी बनी बढ़त
ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में चीन से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर 20 फीसदी शुल्क लगाया गया था, जबकि भारत से आने वाले स्मार्टफोन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं था. इससे भारत को बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ मिला. हालांकि बाद में अमेरिका और चीन के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत शुल्क में कटौती की गई और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस शुल्क को अवैध करार दे दिया. इसके बाद भारत और चीन दोनों से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर शुल्क का अंतर समाप्त हो गया.
इसके बावजूद भारत लागत और सरकारी प्रोत्साहनों के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र बना हुआ है.
भारत में उत्पादन बढ़ाने पर कायम है एप्पल
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एप्पल अपने वैश्विक iPhone उत्पादन का 30 फीसदी से अधिक हिस्सा भारत में तैयार कर सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह हिस्सेदारी 25 फीसदी थी.
वित्त वर्ष 2026-27 तक कंपनी के भारत में विदेशी मुद्रा के लिहाज से नेट पॉजिटिव होने की संभावना भी जताई जा रही है. इसके लिए कंपनी को भारत में बनने वाले iPhone उत्पादन का करीब 85 फीसदी निर्यात करना होगा. वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 83 फीसदी रहा था.
अगले कुछ वर्षों में दोगुना हो सकता है उत्पादन
विश्लेषकों का मानना है कि यदि एप्पल मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखता है, तो अगले तीन वित्त वर्षों में भारत में उसका उत्पादन मूल्य दोगुना हो सकता है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच भारत में करीब 70 अरब डॉलर का उत्पादन मूल्य हासिल किया है. भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है.
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