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Voda-Idea ने सरकार को अलॉट किए 3,690 करोड़ रुपये के शेयर, इतनी बढ़ गई हिस्सेदारी
Vodafone-Idea का यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, हालांकि शेयर की गिरावट और कंपनी के परिचालन नियंत्रण को लेकर कुछ चिंता बनी हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
कर्ज में डूबी दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया ( Vodafone-Idea) ने सरकार को 3,690 करोड़ रुपये के शेयर जारी कर निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) को आवंटित किए हैं. इस निर्णय के बाद कंपनी की विस्तारित चुकता पूंजी आधार में सरकार की हिस्सेदारी 48.99 प्रतिशत हो गई है. यह कदम स्पेक्ट्रम नीलामी के बकाये को इक्विटी में बदलने के सरकार के फैसले का हिस्सा है.
DIPAM को आवंटित किए गए 3,690 करोड़ शेयर
वोडाफोन आइडिया ने हाल ही में अपने निदेशक मंडल की पूंजी जुटाने वाली समिति की बैठक में 10 रुपये अंकित मूल्य के 3,690 करोड़ इक्विटी शेयर दीपम विभाग को जारी और आवंटित करने का निर्णय लिया. इन शेयरों का कुल मूल्य 36,950 करोड़ रुपये बताया जा रहा है. कंपनी ने शेयर बाजार को भेजी गई सूचना में यह जानकारी दी और बताया कि इन नए शेयरों के आवंटन के बाद सरकार की कंपनी में हिस्सेदारी 48.99 प्रतिशत तक पहुँच गई है.
सरकार के पास नहीं जाएगा कंपनी का परिचालन नियंत्रण
वोडाफोन आइडिया ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के पास भले ही बड़ी हिस्सेदारी हो, लेकिन कंपनी के प्रवर्तक अपने परिचालन नियंत्रण में बने रहेंगे. यह कदम तब उठाया गया जब वोडाफोन आइडिया सरकार के स्पेक्ट्रम नीलामी बकाये का भुगतान नहीं कर पाई थी, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी ने सरकार को 22.6 प्रतिशत हिस्सेदारी दी थी.
वोडाफोन आइडिया के शेयर का हाल
इस खबर के बाद भी वोडाफोन आइडिया के शेयरों में गिरावट देखी गई. मंगलवार को कंपनी के शेयर 2.58% गिरकर 7.18 रुपये पर बंद हुए. वहीं, बुधवार को शेयर में और ज्यादा गिरावट देखने को मिली, खबर लिखने तक शेयर 0.56 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7.13 रुपये पर कारोबार कर रहा था. यह शेयर का 52 हफ्ते का लो है, जबकि जून 2024 में यह 19.15 रुपये के स्तर पर था, जो कि इसका 52 हफ्ते का हाई है. हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार के इस कदम से वोडाफोन आइडिया को अगले तीन वर्षों में नकदी प्रवाह में बड़ी राहत मिल सकती है. इसके अलावा, यह कदम कंपनी को लंबे समय से लंबित बैंक ऋण जुटाने में भी मदद करेगा. सरकार के इस फैसले से इंडस टावर्स जैसी टावर कंपनियों की चिंताएं भी कम हो गई हैं, जो वोडाफोन आइडिया के ऋण की स्थिति के कारण परेशान थीं.
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