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बस खत्म होने वाला है इस दिग्गज एयरलाइन का वजूद, आखिरी उड़ान की डेट आई सामने
सिंगापुर एयरलाइंस और टाटा ग्रुप की जॉइंट वेंचर विस्तारा एयरलाइन इस साल के अंत तक खत्म हो जाएगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
विस्तारा के विमान अगले कुछ दिनों में अपनी आखिरी उड़ान भरेंगे. यात्री 3 सितंबर से विस्तारा की फ्लाइट बुक नहीं कर सकेंगे. दरअसल, विस्तारा और एयर इंडिया के मर्जर (Air India-Vistara Merger) का रास्ता साफ हो गया है. सरकार ने इस राह की आखिरी रुकावट को भी दूर कर दिया है. दरअसल, सिंगापुर एयरलाइंस को एयर इंडिया के साथ विस्तारा के विलय के हिस्से के रूप में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल गई है.
जल्द पूरी होगी प्रक्रिया
विस्तारा, सिंगापुर एयरलाइंस और टाटा ग्रुप का जॉइंट वेंचर है. FDI की मंजूरी मिलने का मतलब है कि विलय इस वर्ष के अंत तक पूरा हो सकता है. हालांकि, इसके टिकट की बुकिंग 3 सितंबर से ही बंद हो जाएगी. विस्तारा की तरफ से बताया गया है कि वो 11 नवंबर 2024 तक फ्लाइट्स को ऑपरेट करेगी. ग्राहक 12 नवंबर को या उसके बाद यात्रा करने के लिए 3 सितंबर से विस्तारा की फ्लाइट बुक नहीं कर सकेंगे. 11 नवंबर के बाद सभी एयर इंडिया द्वारा विस्तारा के विमानों का संचालन किया जाएगा. इसके लिए बुकिंग एयर इंडिया की वेबसाइट पर रीडायरेक्ट की जाएगी.
कितनी है हिस्सेदारी?
विस्तारा में टाटा ग्रुप की 51% हिस्सेदारी है, जबकि सिंगापुर एयरलाइंस की 49%. टाटा समूह ने पिछले साल नवंबर में एयर इंडिया और विस्तारा के विलय की घोषणा की थी. मर्जर के बाद विस्तारा का वजूद एक तरह से खत्म हो जाएगा. टाटा समूह और सिंगापुर एयरलाइंस (SI) में हुए समझौते के तहत 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए सिंगापुर एयरलाइंस एयर इंडिया में करीब 2000 करोड़ रुपए निवेश करेगी. एयर इंडिया इस राशि का इस्तेमाल खुद को मजबूत करने के लिए कर सकती है. कंपनी नए विमान खरीद सकती है, कई नए रूट्स पर संभावनाएं एक्सप्लोर कर सकती है, यात्रियों को लुभाने के लिए नई सुविधाओं की शुरुआत कर सकती है.
ऐसे मिलेगा फायदा
एक्सपर्ट का कहना है कि विलय के बाद एयर इंडिया का ऑर्गनाइजेशनल स्ट्रक्चर बेहतर हो सकता है, जिससे कंपनी को लागत घटाने में भी मदद मिल सकती है. चूंकि, एविएशन इंडस्ट्री बहुत चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, ऐसे में लागत कम होने से एयर इंडिया को कई फायदे मिलेंगे. यह भी कहा जा रहा है कि इस मर्जर के बाद एयर इंडिया दुनिया के सबसे बड़े एयरलाइन समूहों में से एक होगी. जानकार मानते हैं कि विलय के बाद टाटा ग्रुप के लिए एयरलाइन कारोबार को संभालना ज्यादा आसान हो जाएगा. क्योंकि अलग-अलग कंपनियों पर फोकस करने के बजाए उसे केवल एक पर ध्यान देना होगा. इसके अलावा, उड़ानों और इसकी पोजिशनिंग के मामले में एयर इंडिया ताकतवर बनेगी और ओवरलैपिंग रूट्स को व्यवस्थित करके नए रूट खोलने में भी उसे मदद मिलेगी.
बढ़ेगी विमानों की संख्या
विस्तारा के विलय से एयर इंडिया के बेड़े में विमानों की संख्या बढ़ जाएगी. उसके पास 200 से ज्यादा विमान हो जाएंगे. इसके अलावा, एयर इंडिया को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर कुछ और प्रमुख स्लॉट मिल जाएंगे, जो एयर विस्तारा के लिए उपलब्ध नहीं थे. इस समय एविएशन सेक्टर में IndiGo का दबदबा है. उसके पास बाजार की 60% से ज्यादा हिस्सेदारी है. ऐसे में उसके मुकाबले के लिए एयर इंडिया को अपने पंख और फैलाने की जरूरत है और इस जरूरत को कुछ हद तक एयर विस्तारा पूरा कर सकती है.
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