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Anil Agarwal को आता है मुश्किलों को मात देना, इस बार भी भेद देंगे परेशानियों का चक्रव्यूह!

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल इस समय मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. स्टॉक मार्केट में भी उनकी कंपनी का प्रदर्शन खराब होता जा रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

कारोबारी दुनिया में अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) ऐसा नाम हैं, जिनकी सक्सेस स्टोरी लोगों को प्रेरित करती है. पिछले साल जब अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने ताइवान की कंपनी फॉक्सकॉन के साथ मिलकर भारत में पहला सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट (Semiconductor Manufacturing Plant) लगाने का ऐलान किया, तो हर तरफ बस उनकी ही चर्चा थी. लेकिन इसके बाद अनिल अग्रवाल के लिए सबकुछ बदलता चला गया और आज वह एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं जहां यह समझना मुश्किल है कि कौनसी राह चुनी जाए. फॉक्सकॉन वेदांता से रिश्ता तोड़ चुकी है, कंपनी पर कर्ज का बोझ अभी भी काफी है और स्टॉक मार्केट में वेदांता के शेयर लगातार कमजोर हो रहे हैं.     

सपना टूटा, सरकार भी नाराज
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अनिल अग्रवाल का ड्रीम प्रोजेक्ट था, जो फिलहाल के लिए अटक गया है. हालांकि, अग्रवाल ने किसी दूसरे पार्टनर के साथ आगे बढ़ने की बात कही है, लेकिन उन्हें नए सिरे से शुरुआत करनी होगी और इसमें काफी समय लगेगा. इस बुरे दौर में अग्रवाल को सरकार की नाराजगी का भी सामना करना पड़ा है. जिंक इंटरनेशनल की संपत्ति बेचने को लेकर वेदांता को सरकार ने कानूनी कार्रवाई तक की चेतावनी दे डाली थी. कहा तो यहां तक जाता है कि फॉक्सकॉन को भी वेदांता से रिश्ता तोड़ने की सलाह दी गई थी, अब ये सलाह किसने दी, यह फॉक्सकॉन की बता सकती है. 

इस रणनीति पर चल रहा विचार  
अनिल अग्रवाल मुश्किलों को मात देकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते हैं. उनका जीवन इस तरह की कहानियों से भरा हुआ है. वह सोशल मीडिया पर लोगों को संघर्ष की ताकत से रूबरू कराते रहे हैं और अब उन्हें फिर एक संघर्षशील दौर से गुजरना है. अग्रवाल ने भविष्य को लेकर एक खाका तैयार किया है, जिसकी एक झलक उन्होंने हाल में दी. वेदांता (Vedanta) के चेयरमैन ने बताया कि वह अपने सभी या कुछ कारोबारों को स्टॉक मार्केट पर अलग से लिस्ट करने पर विचार कर सकते हैं. मेटल, माइनिंग से लेकर ऑयल एंड गैस के साथ-साथ कई सेक्टर्स में काम रही वेदांता के मालिक अनिल अग्रवाल के मुताबिक, उन्होंने अपने सभी एडवाइजर्स और मेरे लोगों से इस बारे में पूछा है कि क्या हम सभी प्रोडक्ट्स या कुछ को स्वतंत्र कर सकते हैं या नहीं.

इस तरह मिल सकता है फायदा
अग्रवाल का मानना है कि इससे वेदांता लिमिटेड के शेयरधारकों के पास कई कंपनियों के शेयर होंगे. इससे लोगों को विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी वेदांता की इकाइयों में इन्वेस्ट करने का मौका मिलेगा. साथ ही कुछ इंटरनेशनल कंपनियां किसी विशेष क्षेत्र में निवेश करना चाहती हैं, इससे उन्हें अवसर मिलेगा. जानकार मानते हैं कि अग्रवाल अपने कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को सरल बनाने की प्रक्रिया को तेज करना चाहते थे, जिसमें अब तक वह ज्यादा कामयाब नहीं रहे हैं. वेदांता की मूल कंपनी वेदांता रिसोर्सेज फंड्स के लिए जूझ रही है. इसकी वजह क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों द्वारा उसके आउटलुक को डाउनग्रेड करना है. ऐसा फंडिंग रिस्क और कर्ज चुकाने से जुड़ी चिंताओं के चलते किया गया है.

कर्ज कम करना बन गया चुनौती
अनिल अग्रवाल कर्ज का बोझ कम करना चाहते हैं और इस दिशा में लगातार प्रयास भी कर रहे हैं. इस साल की शुरुआत में उन्होंने 7.7 अरब डॉलर के कर्ज को कम करने के जिंक इंटरनेशनल की संपत्ति वेदांता की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक को 2.98 अरब डॉलर के नकद मूल्य पर बेचने की तैयारी की थी, लेकिन भारत सरकार ने इस कदम का विरोध किया, जिसकी हिंदुस्तान जिंक में 30% हिस्सेदारी है. इसके बाद वेदांता ने जून में अपने स्टील और स्टील रॉ मेटेरियल कारोबारों की रणनीतिक समीक्षा शुरू की. क्योंकि कंपनी कर्ज के बोझ को कम करने के लिए अपनी यूनिट्स में पैसा तलाश रही थी, लेकिन बात ज्यादा बन नहीं पाई. वैसे, वेदांता ने काफी कर्जा चुका भी दिया है, मगर अब भी काफी बाकी है. 

लगातार लुढ़क रहे कंपनी के शेयर
अनिल अग्रवाल के लिए एक मुश्किल ये भी है कि उनकी कंपनी का स्टॉक मार्केट पर प्रदर्शन लगातार खराब होता जा रहा है. शुक्रवार को वेदांता का शेयर करीब 2% की गिरावट के साथ 233.30 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. पिछले 5 कारोबार दिन में यह 0.36% और एक महीने में 16.36% नीचे आ चुका है. वेदांता के स्टॉक का छह महीने और एक साल का रिकॉर्ड भी बेहद खराब है. इस दौरान यह क्रमशः 18.81% और 13.46% नीचे गिरा है. लिहाजा, यह जरूरी हो गया है कि अग्रवाल कोई ऐसा कदम उठाएं, जिससे निवेशकों का भरोसा वेदांता में बढ़े और उसके शेयरों की रफ्तार में भी तेजी आई.  

 


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