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Digital Arrest का शिकार हुए Vardhman समूह के मालिक, 7 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी
डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराधियों का नया हथियार बनता जा रहा है. वर्धमान समूह के मालिक एस पी ओसवाल से अपराधियों ने 7 करोड़ रुपए की जालसाजी की है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
ऑनलाइन होने वाली धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. हाल ही में वर्धमान समूह के चेयरमैन एस पी ओसवाल (Vardhman Group Chairman SP Oswal) भी इसका शिकार बने. ओसवाल के साथ पूरे सात करोड़ की धोखाधड़ी की गई. अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों के गिरोह ने इस जालसाजी को अंजाम दिया. पुलिस ने इस मामले में दो अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है. जबकि सात अन्य की पहचान हो गई और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी है.
48 घंटे में सुलझा लिए केस
लुधियाना के पुलिस आयुक्त कुलदीप सिंह चहल के अनुसार, पकड़े गए दो अपराधियों से 5.25 करोड़ रुपए बरामद किए गए हैं. इस गिरोह के सभी 9 सदस्य असम और पश्चिम बंगाल के हैं. शेष सदस्यों की गिरफ़्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. चहल ने बताया कि अपराधियों ने वर्धमान समूह के मालिक एस पी ओसवाल के विभिन्न बैंक खातों से सात करोड़ रुपए की निकासी की थी. साइबर सेल ने ओसवाल की शिकायत पर केस दर्ज किया और महज 48 घंटे के अंदर ही पुलिस ने मामले को सुलझा लिया.
बिजनेसमैन को ऐसे डराया
अपराधियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए SP ओसवाल को कॉल किया था. उसके बाद वीडियो कॉल पर उन्हें एक अरेस्ट वॉरंट दिखाया गया, जो पूरी तरह से फर्जी था, लेकिन ओसवाल इसे असली मान बैठे. साइबर अपराधियों ने इसके बाद ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया और मामला खत्म करने के लिए पैसे ट्रांसफर करने को कहा. अपराधियों ने प्रवर्तन निदेशालय और कस्टम विभाग का नाम लेकर भी ओसवाल को डराया. वर्धमान समूह के मालिक अपराधियों के जाल में फंस गए और इस तरह उनसे 7 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी हो गई.
पहले आहूजा बने थे शिकार
एक सप्ताह के भीतर किसी उद्योगपति को शिकार बनाने की यह दूसरी वारदात है. इससे पहले, पंजाब के एक स्थानीय उद्योगपति से कुछ जालसाजों ने 1.01 करोड़ की ठगी की थी. रजनीश आहूजा को अपने जाल में फंसाने के लिए अपराधियों ने दावा किया था कि जबरन वसूली की रकम उनके बैंक खाते में ट्रांसफर हुई है. जालसाजों ने उन्हें गिरफ्तारी वारंट की धमकी भी दी थी. बात दें कि डिजिटल अरेस्ट के मामले में लगातार बढ़ रहे हैं. इस स्कैम के शिकार अधिकतर पढ़े-लिखे और अधिक होशियार लोग ही होते हैं. डिजिटल अरेस्ट को लेकर सरकारी एजेंसियां लगातार लोगों को अलर्ट कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग इसका शिकार बन रहे हैं.
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