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यूनियन बजट 2026: उद्योग को टैक्स सरप्राइज नहीं, नीति स्थिरता चाहिए

ग्रांट थॉर्नटन भारत के सर्वे के अनुसार टैक्स, व्यापार और इंफ्रास्ट्रक्चर, तीनों क्षेत्रों में उद्योग की साझा मांग स्पष्टता और पूर्वानुमेयता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

यूनियन बजट 2026 से पहले भारतीय उद्योग जगत सरकार से बड़े और चौंकाने वाले टैक्स ऐलानों की बजाय नीति स्थिरता, करों में पूर्वानुमेयता और बेहतर क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने की मांग कर रहा है. ग्रांट थॉर्नटन भारत के प्री-बजट सर्वे के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय अनुशासन, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग और टैक्स स्थिरता उद्योग की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं.

आर्थिक वृद्धि मजबूत, लेकिन अगला चरण निजी निवेश पर निर्भर

सर्वे ऐसे समय में आया है जब वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले देशों में बना हुआ है. हाल के वर्षों में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में तेज़ बढ़ोतरी ने इस वृद्धि को समर्थन दिया है.

केंद्र सरकार का कैपेक्स अब वित्त वर्ष 2020 की तुलना में तीन गुना से अधिक हो चुका है. हालांकि, उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि आगे की वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या स्थिर और भरोसेमंद नीतियों के जरिए निजी निवेश को आकर्षित किया जा सकता है.

वित्तीय घाटे पर संतुलित दृष्टिकोण की वकालत

जबकि वित्तीय घाटा धीरे-धीरे सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 4.4 प्रतिशत की ओर बढ़ रहा है, उद्योग जगत आक्रामक प्रोत्साहन पैकेज की मांग नहीं कर रहा है. इसके बजाय, वह ऐसा संतुलित दृष्टिकोण चाहता है जो वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकासोन्मुख खर्च को जारी रखे.

सर्वे के अनुसार, 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि यदि वित्तीय समेकन की गति धीमी भी पड़े तो विकास और रोजगार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. वहीं, 28 प्रतिशत ने घाटा नियंत्रण और विकास खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने का समर्थन किया.

बड़े ऐलानों से हटकर नीति निरंतरता पर जोर

ग्रांट थॉर्नटन भारत के अनुसार, उद्योग की अपेक्षाएं अब “बड़े ऐलानों” से हटकर नीति निरंतरता और भरोसे की दिशा में स्थानांतरित हो गई हैं. कंपनियां क्षमता विस्तार, सप्लाई चेन और डीकार्बोनाइजेशन जैसे दीर्घकालिक फैसले लेते समय स्थिर नीति वातावरण को अधिक महत्व दे रही हैं.

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में कर स्थिरता सबसे अहम

InvITs, REITs और इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स पर टैक्स स्पष्टता की मांग

इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश उद्योग की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर बना हुआ है. सर्वे में 41 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs), रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड्स के लिए स्थिर टैक्स व्यवस्था इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश को सबसे अधिक गति दे सकती है. इसके बाद पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और हाइब्रिड प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर पर स्पष्टता की मांग सामने आई.

ग्रीन एनर्जी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस

नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण इंफ्रास्ट्रक्चर 43 प्रतिशत उत्तरदाताओं के साथ प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहे. यह भारत के 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य के अनुरूप है.

इसके बाद शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन को प्राथमिकता दी गई, जबकि डिजिटल और टेलीकॉम कनेक्टिविटी को निकट भविष्य की तुलना में अपेक्षाकृत कम महत्व मिला.

क्रियान्वयन में देरी से उद्योग परेशान

सर्वे में यह भी सामने आया कि उद्योग जगत फंडिंग से ज्यादा क्रियान्वयन में देरी को लेकर चिंतित है. कंपनियों ने डिजिटल प्रोजेक्ट-ट्रैकिंग डैशबोर्ड, रियल-टाइम पारदर्शिता और मंत्रालयों व एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की है.

टैक्स, जीएसटी और कस्टम्स में पूर्वानुमेयता की जरूरत

कर व्यवस्था को लेकर उद्योग ने आयकर, जीएसटी और कस्टम्स तीनों में स्थिरता पर जोर दिया है. नए आयकर अधिनियम में संक्रमण को लेकर अकाउंटिंग, पेरोल और कंप्लायंस सिस्टम में व्यवधान की आशंका जताई गई है. इस कारण उद्योग ने संक्रमण अवधि बढ़ाने, समय से पहले दिशानिर्देश जारी करने और शुरुआती चरण में दंड में राहत की मांग की है.

सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए राहत की मांग

सर्वे के अनुसार, 44 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि नए टैक्स सिस्टम को आकर्षक बनाने के लिए टैक्स दरों में कमी या स्लैब को व्यापक बनाया जाना चाहिए. यह दर्शाता है कि हालिया सुधारों के बावजूद व्यक्तिगत कर राहत की मांग बनी हुई है.

एमएसएमई, स्टार्टअप और ग्रीन ट्रांजिशन पर अपेक्षाएं

एमएसएमई सेक्टर के लिए सस्ता वर्किंग कैपिटल सबसे बड़ी प्राथमिकता के रूप में उभरा है. इसके साथ निर्यात तैयारियों और डिजिटल सप्लाई चेन को अपनाने के लिए समर्थन की मांग की गई है. स्टार्टअप्स और शुरुआती चरण की कंपनियों के लिए आर एंड डी आधारित टैक्स क्रेडिट और वेंचर कैपिटल व एंजेल निवेश को बढ़ावा देने वाले इंसेंटिव्स का समर्थन किया गया.

ग्रीन ट्रांजिशन के तहत, 42 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने नवीकरणीय ऊर्जा और लो-कार्बन आर एंड डी में निवेश को तेज़ करने के लिए ग्रीन कैपेक्स पर टैक्स क्रेडिट को प्राथमिकता देने की बात कही.


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