होम / बिजनेस / जिन लड्डुओं पर मचा है बवाल, उनसे तिरुपति मंदिर की हर साल होती है कितनी कमाई?
जिन लड्डुओं पर मचा है बवाल, उनसे तिरुपति मंदिर की हर साल होती है कितनी कमाई?
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (TTD) की तरफ से मंदिर की रसोई में में ही प्रसाद के रूप में मिलने वाले लड्डू तैयार किए जाते हैं. एक लड्डू का वजन करीब 175 ग्राम होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
आंध्र प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के प्रसाद को लेकर इस समय बवाल मचा हुआ है. इस बवाल की वजह है मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का प्रसाद को लेकर पूर्व सरकार पर लगाया गया आरोप. मौजूदा CM नायडू का कहना है कि पिछली जगनमोहन रेड्डी की सरकार में महाप्रसादम बनाने में जिस घी का इस्तेमाल किया जाता था उसमें बीफ-सूअर की चर्बी और मछली का तेल की मिलावट थी.
मंदिर में होते हैं तैयार
सत्ताधारी TDP ने जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस पर हिंदुओं की आस्था और विश्वास को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया है. एक रिपोर्ट में नायडू के आरोपों की पुष्टि का दावा भी किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला घी शुद्ध नहीं था और इसमें सूअर-गाय की चर्बी मिलाई गई थी. गौरतलब है कि प्रसाद के रूप में मिलने वाले खास तरह के लड्डू मंदिर की ही रसोई में तैयार किए जाते हैं और इन्हें पोटू कहा जाता है.
छह बार बदली रेसिपी
तिरुपति बालाजी मंदी में मिलने वाले महाप्रसाद के लड्डू बनाने की प्रक्रिया को 'दित्तम' के नाम से जाना जाता है. इसमें खास मात्रा में सभी चीजें डाली जाती हैं. करीब 300 साल के इतिहास में इसकी रेसिपी में केवल छह बार बदलाव किया गया है. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड (TTD) की तरफ से कुछ समय पहले बताया गया था कि प्रसाद के लड्डू को खराब होने से बचाने के लिए इसमें गुड़ का सीरा उपयोग किया जाता है. इसके बाद इसमें आंवला, काजू और किशमिश को मिलाया जाता है. लड्डू की बूंदी बनाने के लिए शुद्ध घी इया इस्तेमाल किया जाता है.
हर रोज 3 लाख लड्डू
टीटीडी हर रोज लगभग 3 लाख लड्डू तैयार करवाता है. प्रसाद के रूप में मिलने वाले इन लड्डुओं से तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड को हर साल मोटी कमाई होती है. एक अनुमान के मुताबिक, बोर्ड को लड्डुओं की बिक्री से लगभग 500 करोड़ रुपए की सालाना कमाई होती है. 1715 से ही लगातार प्रसाद में लड्डू बनाए जा रहे हैं. 2014 में तिरुपति के लड्डू को जीआई टैग भी मिल गया. इसका मतलब है कि अब इस नाम से कोई और लड्डू नहीं बेच सकता. एक लड्डू का वजन करीब 175 ग्राम होता है.
जुलाई में हुई थी पुष्टि
इसी साल जुलाई में एक लैब टेस्ट के दौरान पाया गया था कि महाप्रसादम में इस्तेमाल घी में कुछ बाहरी फैट मौजूद हैं. इसके बाद टीटीडी ने कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट कर दिया और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से घी लेना शुरू कर दिया. तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड एक किलो घी के लिए कॉन्ट्रैक्टर को 320 रुपए का भुगतान करता था. जबकि कर्नाटक मिल्क फेडरेशन से एक लीटर शुद्ध घी उसे 475 रुपए में पड़ रहा है. तेलुगु देशम पार्टी (TDP) ने अब इसी रिपोर्ट को सार्वजनिक करके पूर्व सरकार को कठघरे में खड़ा किया है.
टैग्स