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US Fed रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती से भारत पर पड़ेगा ये असर, क्या RBI भी उठाएगा ये कदम?

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7-9 अक्टूबर के दौरान बैठक करने वाली है और ब्याज दर पर फैसला लेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

अमेरिका में आखिरकार ब्याज दरें घटाने का ऐलान कर दिया गया है. यूएस फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) ने ब्याज दरें 50 बेसिस प्वॉइंट कम करने की घोषणा कर दी. इस फैसले का 4 साल से इंतजार किया जा रहा था. पिछले बार फेड रिजर्व ने साल 2020 में ब्याज दरें घटाई थीं. इसके साथ ही अब उम्मीद बढ़ गई है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी अपनी आगामी मोनेटरी पॉलिसी बैठक के दौरान भारत में ब्याज दरें घटाने का ऐलान कर सकता है. अमेरिका में नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह बड़ा फैसला लिया गया है.

अमेरिका में ब्याज दरें 4.75 से 5.00 फीसदी के बीच हो जाएंगी

फेड रिजर्व की बैठक में इस फैसले के साथ ही अमेरिका में ब्याज दरें 4.75 से 5.00 फीसदी के बीच हो जाएंगी. इसके अलावा फेड रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल के अंत तक आधा फीसदी ब्याज दरें और कम की जा सकती हैं. ब्याज दरें घटाने से कंज्यूमर और बिजनेस को कर्ज लेने में आसानी हो जाएगी. बैंकों को भी अब अपनी ब्याज दरें कम करनी पड़ेंगी. विशेषज्ञों को अब उम्मीद जाग गई है कि आगे भी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला जारी रह सकता है. उनका मानना है कि इस साल के अंत तक आधा फीसदी, साल 2025 में एक फीसदी और 2026 में आधा फीसदी की कटौती के साथ ही फेड रिजर्व देश में ब्याज दरों को 2.75 से 3.0 फीसदी के आसपास रखेगा.

भारत के बाजार पर पड़ेगा पॉजिटिव असर

अमेरिकी फेड रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेजी देखने को मिल सकती है. सबसे ज्यादा असर आईटी और बैंकिंग शेयरों में देखने को मिल सकता है. डॉलर इंडेक्स के गिरने से रुपए में तेजी आएगी. भारत की आईटी कंपनियां टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक जैसी कंपनियों के शेयरों में इजाफा देखने को मिल सकता है. वहीं दूसरी ओर कॉमेक्स पर गोल्ड और सिल्वर की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच चुकी हैं. जिसके असर से भारत के एमसीएक्स बाजार में गोल्ड के दाम रॉकेट बन सकते हैं.

रुपये का बढ़ेगा रुतबा

एक्सपर्ट्स  के मुताबिक विदेशी पूंजी के प्रवाह से भारतीय रुपये पर भी असर पड़ने की संभावना है. जैसे-जैसे विदेशी निवेशक इन्वेस्टमें के उद्देश्य से अपनी करेंसी को भारतीय रुपये में बदलते हैं, रुपये की मांग बढ़ेगी. इससे बहुत हद तक संभव है अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में बढ़ेगी. मजबूत रुपया आयात की लागत को कम कर सकता है, यह विदेशी खरीदारों के लिए उनके सामान को अधिक महंगा बनाकर भारतीय निर्यातकों को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है.

आरबीआई पर प्रभाव

फेड की इस रेट कटौती के फैसले पर RBI का रिएक्शन महत्वपूर्ण होगा. ऐतिहासिक रूप से भारतीय मौद्रिक नीति अमेरिकी दरों से प्रभावित रही है. हालांकि, RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पहले ही संकेत दे दिया है कि भारत को इसका अनुसरण करने और अपनी दरें कम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. खास बात तो ये है कि आरबीआई एमपीसी ने फरवरी 2023 से ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर रखा है. यह लगातार नौवीं एमपीसी बैठक थी जिसमें ब्याज दरों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला.
 

 


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