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छोटे कारोबारियों के लिए बड़ा प्लेटफॉर्म बना GeM, हो रहा हजारों करोड़ों का कारोबार!

मेक इन इंडिया अवधारणा के तहत सरकार ने जेम पोर्टल (GEM Portal) की शुरुआत की थी. 26 हजार स्टार्टअप जेम के जरिए कारोबार कर चुके हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GEM) ने मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत पिछले आठ सालों में छोटे कारोबारियों के लिए बाजार के अवसरों को पारदर्शी बनाया है. इसने बिचौलिए प्रणाली को खत्म करके नई तकनीक के जरिए स्टार्टअप एवं छोटे कारोबारियों को बड़ा प्लेटफॉर्म दिया है. वहीं, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के साथ ही महिला उद्यमियों को भी बाजार में मजबूती के साथ आगे बढ़ने का मौका दिया है. आज इस प्लेटफॉर्म पर हजारों करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है. तो चलिए जानते हैं, इस पोर्टल की शुरुआत कैसे हुई और अब तक इसमें कितना कारोबार हुआ है?

2016 में हुई जेम पोर्टल की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 'मेक इन इंडिया' अवधारणा के तहत सितंबर 2016 में जेम पोर्टल की शुरुआत की गई थी. इसका उद्देश्य कारोबार में नवाचार के जरिए बुनियादी ढांचे का विकास करना, ताकि देश की प्रगति को सहारा मिल सके. पोर्टल में उत्पादों एवं सेवाओं को सूचिबद्ध करने के लिए मेक इन इंडिया की शर्तों को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे स्थानीय निर्माताओं की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता देना आसान हो गया है. 

इन लोगों को हुआ फायदा

जेम ने वोकल फोर लोकल स्टोर के जरिए महिला, एससी-एसटी, एमएसएमई, कारीगर, बुनकर, शिल्पकार, स्वयं सहायता समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और सहकारी समितियों के कारोबारी दायरे का विस्तार कर उन्हें फायदा पहुंचाया है. बता दें, जेम पर अभी तक साढ़े 26 हजार से ज्यादा स्टार्टअप जेम के माध्यम से 29 हजार करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर चुके हैं. सिर्फ वित्त वर्ष 23-24 में जेम पोर्टल पर स्टार्टअप द्वारा 97 हजार से अधिक के आर्डर पूरे किए गए.

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तेजी से बढ़ रहा जेम पोर्टल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जेम पोर्टल में पांच लाख से अधिक के अनुमानित मूल्य वाली बोलियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. महज तीन वर्ष पहले तक जेम पोर्टल पर सरकारी संस्थाओं द्वारा मंगाई गई 39 प्रतिशत बिड 'मेक इन इंडिया' की थी, जो अब बढ़कर (सितंबर 2024 तक) 81 प्रतिशत हो गई है. जेम की सामान्य शर्तों के तहत केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों एवं सार्वजनिक उपक्रमों में खरीदारी पोर्टल पर निबंधित विक्रेताओं से करने की बाध्यता है. सरकार राज्यों से भी आग्रह कर रही है कि जेम पोर्टल की प्रणाली को अपनाएं. घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए जेम पोर्टल पर मेक इन इंडिया फिल्टर भी उपलब्ध है, ताकि खरीदारों को उत्पादों की जानकारी आसानी से हो सके. 

लेन-देन शुल्क में कटौती
जेम ने छोटे उद्यमों को बड़ी राहत देते हुए अपने लेन-देन शुल्क को एक ही झटके में 96 प्रतिशत तक कम कर दिया है. दस लाख से कम के आर्डर पर कोई शुल्क नहीं है, जबकि पहले यह सीमा पांच लाख थी. पिछले वर्ष 97 प्रतिशत लेन-देन पर शून्य शुल्क लगा है. दस लाख से दस करोड़ तक के आर्डर पर आर्डर मूल्य का मात्र 0.30 प्रतिशत शुल्क ही लगाया जाएगा. पहले 0.45 प्रतिशत लगता था. दस करोड़ रुपये से अधिक के आर्डर पर अधिकतम तीन लाख का शुल्क देना होगा, जो पहले 72.5 लाख था. अधिकतम शुल्क तीन लाख रुपये से ज्यादा नहीं होगा. 


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