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इन 4 छोटे बैंकों का होने जा रहा है मर्जर, सरकार ने बनाई ये योजना
सरकार ने इन 4 बैंकों के विलय के लिए दो योजनाएं बनाई हैं. सरकार बैंकिग अधिनियम में भी बदलाव कर सकती है. सरकार बैंकों के विलय का काम लंबे समय से कर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
पब्लिक सेक्टर बैंकों के विलय पर काम करने वाली केन्द्र सरकार ने आने वाले दिनों में 4 छोटे बैंकों के विलय की योजना तैयार कर ली है. सरकार ने इन बैंकों के विलय की योजना में 2 विकल्पों पर काम कर रही है. सरकार उससे पहले बैंकिंग अमेडमेंट करने की भी तैयारी कर रही है. सरकार पहले राउंड में इससे पहले कई छोटे बैंकों का मर्जर कर चुकी है. अब इसी के दूसरे चरण में कुछ और बैंकों के लिए योजना बना रही है.
आखिर क्या है सरकार की योजना?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इसके लिए जो योजना बनाई है उसके अनुसार 4 बैंकों के विलय के लिए 2 विकल्प रखे हैं. पहले विकल्प में यूको बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र का विलय और पंजाब एंड सिंध बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का विलय हो सकता है. जबकि दूसरा विकल्प ये है कि इंडियन बैंक और केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का विलय किया जाए.
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पहले कार्यकाल से विलय कर रही है सरकार
2014 में सरकार बनने के बाद से मोदी सरकार लगातार बैंकों के विलय को लेकर काम कर रही है. सबसे पहले जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सभी सहयोगियों का और भारतीय महिला बैंक का एसबीआई में विलय किया गया वहीं 2018 में सरकार ने कुछ और छोटे बैंकों का विलय कर दिया था. इनमें बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक शामिल है. यही नहीं सरकार की ओर से पंजाब नेशनल बैंक में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक का विलय कर चुकी है. यही नहीं सरकार केनरा बैंक का विलय सिंडिकेट बैंक में कर चुकी है.
आखिर क्यों इनका विलय कर रही है सरकार?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल इन बैंकों का विलय इसलिए कर रही है क्योंकि कई इनका एनपीए काफी बढ़ चुका है. कई बैंक ऐसे हैं जिनका एनपीए 7 प्रतिशत से ऊपर जा चुका है. ऐसे में विलय से इनका एनपीए कम हो जाएगा. जानकार बताते हैं कि बैंकों के लिए एनपीए एक बड़ी समस्या है. अनुमान ये भी जताया गया कि सरकारी बैंकों का 88 फीसदी बिजनेस इन 10 बैंकों के पास चला जाएगा. इससे 10 सरकारी बैंकों का एनपीए चार से पांच फीसदी तक कम होने की उम्मीद है.
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