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महंगे मोबाइल टैरिफ से नहीं मिलेगी राहत, सरकार ने ये कहकर झाड़ा पल्ला
मोबाइल में अभी जहां भारत में टैरिफ के दाम कम हैं वहीं कॉल ड्राप से लेकर स्लो कनेक्टिविटी की समस्या भी लोगों को परेशान करती है. ऐसे में क्वॉलिटी का बेहतर होना आवश्यक है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
सबसे पहले जियो और उसके बाद एयरटेल और आखिरी में वोडा आईडिया की ओर से बढ़ाए गए मोबाइल टैरिफ से फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. इस मामले पर निगरानी रखने वाले टेलीकॉम मंत्रालय से लेकर ट्राई का फिलहाल इसमें दखल देने का कोई इरादा नहीं है.अधिकारियों का मानना है कि सेवाओं में सुधार और बेहतर क्वॉलिटी के लिए ये जरूरी है.
सेवाओं में बेहतर गुणवत्ता जरुरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों की ओर से बढ़ाए गए टैरिफ में दखलंदाजी को लेकर अधिकारियों का कहना है कि लोगों को बेहतर क्वॉलिटी की सेवा मिलना बेहद जरूरी है. यही नहीं रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दुनिया के ज्यादातर देशों में भारत ही ऐसा देश है जहां मोबाइल टैरिफ सबसे कम हैं. इसलिए अगर टैरिफ बढ़ने से गुणवत्ता में सुधार होता है तो निश्चित तौर से तो उसे कम नहीं किया जाना चाहिए.
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मोबाइल यूजरों पर पड़ी थी महंगाई की मार
पहले से ही कई तरह की महंगाई का सामना कर रही आम जनता की उस वक्त और परेशानी बढ़ गई थी जब जियो, एयरटेल और वोडा आईडिया की ओर से टैरिफ में इजाफा कर दिया गया था. सभी कंपनियों ने 11 से लेकर 25 प्रतिशत तक टैरिफ में इजाफा कर दिया था. हर कंपनी की ओर से टैरिफ बढ़ाने को लेकर अपनी वजह दी गई है. एयरटेल और जियो ने जहां स्पेक्ट्रम के लिए मोटी रकम चुकाई है तो वहीं वोडा आईडिया इसकी वजह ये बता रहे हैं कि उन्हें 5जी लॉन्च करना है और अपने सेवाओं का विस्तार करना है.
एयरटेल ने खरीदे हैं सबसे ज्यादा स्पेक्ट्रम
एयरटेल और दूसरी कंपनियों की ओर से टैरिफ में हुए इस इजाफे का ऐलान तब किया गया है जब 27 जून को स्पेक्ट्रम का एलोकेशन हुआ है. इस स्पेक्ट्रम एलोकेशन में सबसे ज्यादा खरीददारी एयरटेल ने की है. एयरटेल ने 97 MHz स्पेक्ट्रम के लिए 6856 करोड़ रुपये चुकाए हैं जबकि रिलायंस ने 14.4MHz स्पेक्ट्रम के लिए 973 करोड़ रुपये चुकाए हैं. इसी तरह वोडाफोन आईडिया ने 50 MHz स्पेक्ट्रम के लिए 3510 करोड़ रुपये चुकाए हैं. पिछले कुछ सालों में भारत के टेलीकॉम बाजार का ARPU दुनिया में सबसे कम भारत मे है.
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